पश्चिम बंगाल चुनाव में नया विवाद: ऑब्जर्वर अजय पाल शर्मा पर उठे सवाल

Date: 2026-04-28
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें उत्तर प्रदेश के चर्चित आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा की ऑब्जर्वर के रूप में तैनाती सवालों के घेरे में आ गई है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब राज्य में दूसरे चरण के मतदान की तैयारियां जोरों पर हैं। शर्मा को चुनाव आयोग द्वारा स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए तैनात किया गया है, लेकिन एक वायरल वीडियो ने पूरे घटनाक्रम को विवादित बना दिया है।

क्या है पूरा मामला

वायरल वीडियो में अजय पाल शर्मा को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उम्मीदवार जहांगीर खान को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए देखा जा रहा है। इसी वीडियो के बाद उनकी भूमिका और निष्पक्षता पर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।

कौन हैं जहांगीर खान

जहांगीर खान दक्षिण 24 परगना जिले की फाल्टा विधानसभा सीट से टीएमसी के उम्मीदवार हैं। उपलब्ध चुनावी हलफनामे के अनुसार, वे लगभग 41 वर्ष के हैं और 12वीं तक शिक्षित हैं। उनकी घोषित संपत्ति करीब 2.1 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि उन पर कोई कर्ज नहीं है। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। हालांकि, आधिकारिक दस्तावेजों से अलग राजनीतिक चर्चाओं और सोशल मीडिया में जहांगीर खान का नाम कई आरोपों के साथ जोड़ा जाता रहा है। दावा किया जाता है कि वे एक प्रभावशाली राजनीतिक शख्स ‘भाईपो’ से जुड़े हैं यह संकेत अभिषेक बनर्जी की ओर माना जाता है, जो ममता बनर्जी के करीबी और उनके संभावित उत्तराधिकारी माने जाते हैं।

कुछ रिपोर्टों में यह भी आरोप लगाया गया है कि जहांगीर खान कथित तौर पर स्थानीय स्तर पर सक्रिय एक बड़े नेटवर्क से जुड़े हैं, जिसमें जमीन कब्जा, तस्करी और अन्य संगठित गतिविधियों जैसी बातें कही जाती हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। टीएमसी ने इन सभी दावों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया है।

बीजेपी का आरोप

भारतीय जनता पार्टी ने जहांगीर खान को अभिषेक बनर्जी का करीबी सहयोगी बताया है। पार्टी का दावा है कि वे चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने में भूमिका निभाते हैं। यहां तक कहा गया कि 2024 के चुनाव में फाल्टा क्षेत्र में भारी वोट प्रतिशत इसी प्रभाव का परिणाम था। हालांकि, ये आरोप भी राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा माने जा रहे हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

जहांगीर खान की प्रतिक्रिया

इस पूरे विवाद पर जहांगीर खान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका आरोप है कि अजय पाल शर्मा ने उनके कार्यालय और परिवार के पास जाकर उन्हें धमकाने की कोशिश की। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या एक पुलिस पर्यवेक्षक का काम इस तरह सीधे लोगों को डराना है। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह सब विपक्ष को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे किसी दबाव में आने वाले नहीं हैं और चुनाव में मजबूती से मुकाबला करेंगे।

वायरल वीडियो की सच्चाई

बताया जा रहा है कि अजय पाल शर्मा दक्षिण 24 परगना के संवेदनशील इलाकों का दौरा कर रहे थे। इस दौरान उन्हें शिकायत मिली थी कि कुछ समर्थक मतदाताओं को प्रभावित करने या डराने की कोशिश कर रहे हैं। इसी के बाद वे मौके पर पहुंचे और सख्त चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बीजेपी का समर्थन

बीजेपी ने इस मामले में अजय पाल शर्मा का खुलकर समर्थन किया है। पार्टी ने उन्हें एक सख्त और ईमानदार अधिकारी बताते हुए कहा कि उनका उद्देश्य केवल निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है। पार्टी ने यह भी कहा कि कोई भी व्यक्ति चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश करेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

कौन हैं अजय पाल शर्मा

अजय पाल शर्मा 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और उत्तर प्रदेश कैडर से आते हैं। वर्तमान में वे प्रयागराज में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त के पद पर तैनात हैं। वे अपनी सख्त कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं और उन्हें ‘यूपी का सिंघम’ या ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ जैसी उपाधियों से भी संबोधित किया जाता है।

वे कई बार अपने काम करने के तरीके और सख्त फैसलों के कारण सुर्खियों में रह चुके हैं।

इस पूरे मामले में सच्चाई, आरोप और राजनीतिक बयानबाजी तीनों एक साथ नजर आते हैं। एक तरफ निष्पक्ष चुनाव की जिम्मेदारी है, तो दूसरी तरफ पक्षपात के आरोप। ऐसे में असली सवाल यही है कि क्या यह सख्ती कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए है या फिर राजनीतिक विवाद का हिस्सा बन गई है।

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