वाराणसी MLC चुनाव में भाजपा-सपा के बीच फिर सीधा मुकाबला

वाराणसी MLC चुनाव में भाजपा-सपा के बीच फिर सीधा मुकाबला
हाइलाइट
• वाराणसी की दोनों MLC सीटों पर भाजपा-सपा आमने-सामने
• भाजपा ने केदारनाथ सिंह को फिर मैदान में उतारा
• शिक्षक सीट पर प्रमोद मिश्र और लाल बिहारी आमने-सामने
• 23 अक्टूबर को मतदान, 27 अक्टूबर को होगी मतगणना

Varanasi MLC Election 2026: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से जुड़े खंड स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के विधान परिषद चुनाव का मुकाबला रोचक होने वाला है क्योंकि इन दोनों सीटों को जहा समाजवादी पार्टी जीतकर बरकरार रखने का प्रयास कर रही है वहीं बीजेपी इसे छीनना चाहेगी।इसके लिए भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी ने अपनी-अपनी रणनीति के हिसाब से उम्मीदवार घोषित किए हैं।


भाजपा ने स्नातक सीट से पूर्व एमएलसी केदारनाथ सिंह और शिक्षक सीट से डॉ. प्रमोद कुमार मिश्र को प्रत्याशी बनाया है। दोनों ही उम्मीदवार पहले भी इन सीटों से चुनाव लड़ चुके हैं। इस बार उनके सामने 2020 में जीत दर्ज करने वाले समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार आशुतोष सिन्हा और लाल बिहारी यादव हैं।

2020 के चुनाव में वाराणसी स्नातक सीट पर सपा के आशुतोष सिन्हा ने भाजपा के केदारनाथ सिंह को 3,850 मतों से हराया था। आशुतोष सिन्हा को 26,535 और केदारनाथ सिंह को 22,685 वोट मिले थे। इस बार भाजपा ने फिर केदारनाथ सिंह को मैदान में उतारा है। इससे पांच वर्ष पहले हुए चुनाव का मुकाबला एक बार फिर चर्चा में है।

केदारनाथ सिंह इससे पहले 2004, 2008 और 2014 में वाराणसी खंड स्नातक सीट से विधान परिषद पहुंचे थे। 2020 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। भाजपा के मौजूदा फैसले के बाद वह चौथी बार चुनावी मैदान में हैं। पार्टी के टिकट के लिए कई नामों की चर्चा थी, लेकिन अंततः केदारनाथ सिंह की वरिष्ठता और अनुभव उनके काम आया और उनके नाम पर निर्णय हुआ।

शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा ने डॉ. प्रमोद कुमार मिश्र को उम्मीदवार बनाया है। 2020 के चुनाव में वह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में थे। उस चुनाव में सपा के लाल बिहारी यादव ने 7,766 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी, जबकि प्रमोद कुमार मिश्र को 6,830 मत मिले थे। दोनों के बीच जीत का अंतर 936 वोट रहा था।पिछली बार मिश्र को ओमप्रकाश शर्मा गुट का समर्थन था।

प्रमोद मिश्र इससे पहले 2007 के शिक्षक एमएलसी उपचुनाव में जीत दर्ज कर चुके हैं। इसके बाद 2008, 2014 और 2020 में उन्हें हार मिली। इस बार वह भाजपा के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं लाल बिहारी यादव फिर समाजवादी पार्टी की ओर से मैदान में हैं। 2020 में जीत के साथ वह पहली बार वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद पहुंचे थे। इससे पहले वह दूसरे क्षेत्रों से क़िस्मत आजमाते थे।

 नामांकन प्रक्रिया छह अक्टूबर तक चलेगी। सात अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और नौ अक्टूबर नाम वापसी की अंतिम तारीख है। मतदान 23 अक्टूबर को सुबह आठ से शाम चार बजे तक होगा, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को निर्धारित है।