निठारी कांड में मौत की सजा से बरी होने तक...हरिद्वार में सुरेंद्र कोली की मौत, जानिए पूरी कहानी

निठारी कांड में मौत की सजा से बरी होने तक...हरिद्वार में सुरेंद्र कोली की मौत, जानिए पूरी कहानी
HIGHLIGHTS
  • हरिद्वार के भूपतवाला में चाय की दुकान पर सुरेंद्र कोली का शव फंदे से लटका मिला
  • निठारी कांड में आरोपी रहे सुरेंद्र कोली को 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 मामलों में बरी किया था
  • जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने 12 मामलों में बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखा
  • नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम लंबित मामले में भी दोषसिद्धि रद्द कर रिहाई का आदेश दिया था

हरिद्वार के भूपतवाला में सड़क किनारे चलने वाली एक छोटी-सी चाय की दुकान शुक्रवार को अचानक चर्चा में आ गई। इसी दुकान में सुरेंद्र कोली का शव फंदे से लटका मिला। आसपास के लोगों के लिए कोली की पहचान एक दुकानदार के तौर पर थी, लेकिन उसकी मौत के साथ ही करीब दो दशक पुराना निठारी कांड फिर चर्चा में आ गया।

रिहाई के बाद सुरेंद्र कोली हरिद्वार में रह रहा था और किराये पर लेकर चाय का खोखा चला रहा था। वह सुबह से शाम तक दुकान खोलता था और कई बार वहीं सो जाता था। स्थानीय लोगों के मुताबिक, उसका किसी से ज्यादा मेलजोल नहीं था।

अब उसकी मौत को लेकर पुलिस जांच कर रही है। मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिलने की बात सामने आई है। पोस्टमार्टम और जांच के बाद ही मौत की परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।

भूपतवाला में चाय बेचकर रह रहा था कोली

सुरेंद्र कोली भूपतवाला में भारतमाता मंदिर के पास सड़क किनारे एक छोटे से खोखे पर चाय बेचता था। दुकान पर चाय और पानी के अलावा पान, बिस्किट और सिगरेट भी मिलते थे। आसपास रहने वाले लोगों के लिए उसकी दुकान आम जगह थी, जहां लोग चाय पीने के लिए आते थे। स्थानीय लोगों के मुताबिक, कोली पिछले कुछ समय से यहां रह रहा था और किराये पर दुकान लेकर अपना काम चला रहा था। लेकिन शुक्रवार को इसी दुकान के भीतर उसका शव फंदे से लटका मिला। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। फिलहाल मौत की वजह को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

निठारी कांड में कैसे आया सुरेंद्र कोली का नाम?

सुरेंद्र कोली का नाम दिसंबर 2006 में नोएडा के निठारी कांड के बाद सामने आया था। निठारी में कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर के घर के पीछे बने नाले से बच्चों के कंकाल और मानव अवशेष मिलने के बाद पूरे देश में सनसनी फैल गई थी। कोली इसी मकान में घरेलू सहायक के तौर पर काम करता था। जांच आगे बढ़ने के बाद उसका नाम इस मामले से जुड़ा और उसे कई मामलों में आरोपी बनाया गया।

मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली दोनों को दिसंबर 2006 में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद निठारी से जुड़े कई अलग-अलग मामलों में कानूनी कार्रवाई चली।

हत्या, अपहरण और बलात्कार के आरोप लगे

निठारी मामले में सुरेंद्र कोली पर हत्या, अपहरण, बलात्कार और सबूत मिटाने से जुड़े आरोप लगाए गए थे। अलग-अलग मामलों में उसे दोषी ठहराया गया और एक समय उसे मौत की सजा भी सुनाई गई। लेकिन इसके बाद अदालतों में मामलों की स्थिति बदलती गई और उसकी सजा को लेकर कानूनी लड़ाई लंबे समय तक चलती रही।

2009 में ट्रायल कोर्ट ने सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को बलात्कार और हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी। कोली की मौत की सजा को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा था। बाद में 2015 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। इसके पीछे उसकी दया याचिकाओं के फैसले में हुई लंबी देरी को भी आधार बनाया गया था।

2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 मामलों में किया बरी

निठारी कांड से जुड़े मामलों में अक्टूबर 2023 में एक बड़ा कानूनी मोड़ आया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुरेंद्र कोली को 12 मामलों में बरी कर दिया। इसी दौरान मोनिंदर सिंह पंढेर को भी उसके खिलाफ चल रहे दो मामलों में बरी किया गया। इन मामलों में जांच और सबूतों को लेकर अदालत के सामने सवाल थे। कोली के कथित इकबालिया बयान और बरामदगी से जुड़े साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठे। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में 12 मामलों में बरी होने का फैसला बरकरार रखा

जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को निठारी के 12 मामलों में बरी किए जाने के खिलाफ दायर 14 अपीलों को खारिज कर दिया। इस फैसले के बाद इन 12 मामलों में कोली के बरी होने की स्थिति बरकरार रही।

हालांकि, उस समय निठारी से जुड़ा एक अंतिम मामला अभी लंबित था। इसलिए उसकी कानूनी लड़ाई पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी।

नवंबर 2025 में अंतिम मामले में भी दोषसिद्धि रद्द

नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने निठारी से जुड़े अंतिम लंबित मामले में भी सुरेंद्र कोली की दोषसिद्धि रद्द कर दी। कोर्ट ने उसकी क्यूरेटिव याचिका मंजूर की और उसे रिहा करने का आदेश दिया। इसके साथ ही निठारी कांड से जुड़े उसके खिलाफ लंबित अंतिम मामले में भी उसे राहत मिल गई। रिहाई के बाद कोली हरिद्वार पहुंचा और भूपतवाला में चाय की छोटी-सी दुकान चलाने लगा। यहां रहने वाले लोगों के लिए उसकी पहचान एक दुकानदार की थी।

निठारी कांड की पूरी कहानी फिर क्यों चर्चा में?

निठारी कांड साल 2006 में उस समय सामने आया, जब नाले से बच्चों के कंकाल और मानव अवशेष बरामद हुए। इसके बाद इस मामले ने पूरे देश का ध्यान खींचा।

मोनिंदर सिंह पंढेर के घर और उसके पीछे मिले मानव अवशेषों की जांच के बीच सुरेंद्र कोली का नाम सामने आया। वह उस मकान में घरेलू सहायक के तौर पर काम करता था।

कई मामलों में आरोपी बनाए जाने के बाद कोली को दोषी ठहराया गया और मौत की सजा तक सुनाई गई। लेकिन 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली राहत और फिर 2025 में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के बाद उसके खिलाफ निठारी से जुड़े मामलों की स्थिति बदल गई।

नवंबर 2025 में अंतिम लंबित मामले में दोषसिद्धि रद्द होने के बाद उसे रिहा करने का आदेश दिया गया।

अब सुरेंद्र कोली की मौत ने खड़े किए सवाल

निठारी कांड से जुड़ा नाम रहे सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत ने उसके पुराने अतीत को फिर चर्चा में ला दिया है। जिस शख्स की पहचान कभी निठारी मामले के आरोपी के तौर पर होती थी, वह रिहाई के बाद भूपतवाला में एक छोटी-सी चाय की दुकान चला रहा था। अब पुलिस उसकी मौत की परिस्थितियों की जांच कर रही है। मौके से सुसाइड नोट नहीं मिलने की बात सामने आई है।