Parliament Budget Session : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को राज्यसभा में अपने कार्यकाल की समाप्ति पर विदा हो रहे सांसदों को संबोधित करते हुए एक भावुक और प्रेरणादायक भाषण दिया। उन्होंने इस अवसर पर सदन के वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं जैसे मल्लिकार्जुन खरगे,एच. डी. देवेगौड़ा,शरद पवार का विशेष रूप से उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन नेताओं ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा संसदीय परंपराओं को मजबूत करने और लोकतांत्रिक व्यवस्था को सशक्त बनाने में समर्पित किया है। उन्होंने यह भी कहा कि इतने वर्षों का अनुभव और निरंतर सक्रियता अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है, जिससे नए सांसदों को सीख लेनी चाहिए।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि संसद केवल कानून बनाने का मंच नहीं है, बल्कि यह विचारों के आदान-प्रदान और लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण का केंद्र भी है। उन्होंने कहा कि सदन में अनेक विषयों पर गंभीर चर्चा होती है, जहां हर सदस्य अपनी भूमिका निभाता है और देशहित में अपने विचार प्रस्तुत करता है। इस दौरान कई बार मतभेद भी सामने आते हैं और बहस तीखी भी हो जाती है, लेकिन यही लोकतंत्र की शक्ति है। उन्होंने कहा कि जब कोई सदस्य विदा लेता है, तो उस समय सभी दलों के सदस्य आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर उनके योगदान को सम्मान देते हैं और एक साझा भावना के साथ उन्हें विदाई देते हैं।
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि आज जो सदस्य इस सदन से विदा हो रहे हैं, उनमें से कुछ के मन में दोबारा लौटने की आशा है, जबकि कुछ अपने अनुभवों को साथ लेकर समाज और सार्वजनिक जीवन के अन्य क्षेत्रों में योगदान देने के लिए आगे बढ़ेंगे। उन्होंने विशेष रूप से यह कहा कि राजनीति में कभी ‘पूर्ण विराम’ नहीं होता। उनका आशय था कि जनसेवा का कार्य किसी पद या सदन तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह जीवनभर चलने वाली प्रक्रिया है। जो लोग समाज की सेवा के लिए समर्पित होते हैं, वे हर परिस्थिति में देश के लिए काम करते रहते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि सदन में बिताए गए वर्षों के दौरान हर सदस्य को अनेक अनुभव प्राप्त होते हैं कुछ मधुर और कुछ कठिन लेकिन यही अनुभव उन्हें अधिक परिपक्व और जिम्मेदार बनाते हैं। उन्होंने विदा हो रहे सभी सदस्यों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनका अनुभव और मार्गदर्शन भविष्य में भी देश के लिए अत्यंत उपयोगी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे वरिष्ठ नेताओं की कार्यशैली, अनुशासन और समर्पण नई पीढ़ी के नेताओं के लिए एक प्रेरणा है।
इस अवसर पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जो लोग राजनीति और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहते हैं, वे कभी वास्तव में विश्राम नहीं करते, क्योंकि उनके भीतर देश सेवा का जज़्बा हमेशा जीवित रहता है। उन्होंने कहा कि जनसेवा एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें व्यक्ति उम्र या पद की सीमाओं से बंधा नहीं होता, बल्कि वह अपने अनुभव और क्षमता के अनुसार निरंतर योगदान देता रहता है।
मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने संबोधन में एच. डी. देवेगौड़ा के साथ अपने लंबे संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि वे उन्हें कई दशकों से जानते हैं और उनके साथ लंबे समय तक काम किया है। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि समय के साथ परिस्थितियां बदलती रहती हैं, लेकिन आपसी संबंधों और अनुभवों की अहमियत हमेशा बनी रहती है। उनके इस कथन ने सदन के माहौल को सहज और आत्मीय बना दिया।
समग्र रूप से यह अवसर केवल औपचारिक विदाई का नहीं था, बल्कि यह उन अनुभवों, योगदानों और यादों को सम्मान देने का एक महत्वपूर्ण क्षण था, जो इन वरिष्ठ नेताओं ने वर्षों की सेवा के दौरान अर्जित किए। प्रधानमंत्री और अन्य नेताओं के वक्तव्यों ने यह स्पष्ट किया कि लोकतंत्र की मजबूती केवल संस्थाओं से नहीं, बल्कि उन लोगों से आती है जो निष्ठा, समर्पण और जिम्मेदारी के साथ उसमें भाग लेते हैं। यह कार्यक्रम इस बात का प्रतीक था कि राजनीति में भले ही मतभेद हों, लेकिन अंततः सभी का उद्देश्य देश और समाज की सेवा करना ही होता है।