हाइलाइट्स :
• राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार पर चुनावी गड़बड़ियों और वोट चोरी के आरोप लगाए
• 2024 लोकसभा और विधानसभा चुनावों में गड़बड़ी होने का दावा किया
• ज्ञानेश कुमार से तुरंत पद से इस्तीफा देने की मांग की
• दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का भी राहुल गांधी ने जिक्र किया
• चुनाव आयोग ने आरोपों को खारिज कर कहा- सभी कार्रवाई कानून और आयोग के निर्देशों के मुताबिक हुई
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने कहा कि भारत में एंटी-इन्कंबेंसी एक मौलिक बल है, जो अलग-अलग सरकारों के खिलाफ खड़ी होती है। उन्होंने दावा किया कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह समेत किसी भाजपा नेता के साथ आज ऐसा नहीं हो रहा है।
राहुल गांधी ने चुनावों में गड़बड़ी का दावा करते हुए कहा कि वह बिना आधार के कोई बात नहीं कह रहे हैं और अपने दावों के समर्थन में सबूत सामने रख चुके हैं। उन्होंने कहा कि उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह 100 प्रतिशत स्पष्ट है कि भारत के 2024 के लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनावों में गड़बड़ियां हो रही हैं।
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर लगाए आरोप
राहुल गांधी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सभी चुनावों में धांधली की। उन्होंने वोट चोरी को लोकतंत्र कमजोर होने से जोड़ते हुए चुनाव आयोग पर पहले की तीन प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए अपने आरोपों का भी जिक्र किया।
उन्होंने चुनाव आयोग को सरकार की 'B टीम' बताया और भाजपा के साथ वोट चोरी करने का आरोप लगाया।
राहुल गांधी ने कहा कि हरियाणा और महाराष्ट्र में एंटी-इन्कंबेंसी खत्म हो जाती है और गुजरात समेत कई राज्यों में भी यह नहीं रहती। उन्होंने कहा कि जहां लोकतंत्र नहीं होता, वहां एंटी-इन्कंबेंसी नहीं होती है।
वोट और संविधान को लेकर राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने कहा, 'अगर आप वोट को खत्म कर दें तो हमारा संविधान भी तबाह हो सकता है। उसे अपनी ताकत नहीं मिलती, वह कार्य नहीं कर सकता। अगर हमारा संविधान तबाह हो जाए तो हमारे कानून अवैध हो जाते हैं और अगर कानून ही वैध न रहे तो संस्थान भी बर्बाद हो जाते हैं।'
उन्होंने कहा कि वोटों की रक्षा करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। उनके मुताबिक, यह सिर्फ वोट पर हमला नहीं बल्कि उस बुनियादी व्यवस्था पर हमला है, जो लोगों को अपना नेता चुनने का अधिकार देती है।
राहुल गांधी ने आगे कहा कि अगर चुने गए सांसद चोरी हुए वोट से संसद में बैठे हैं और वही सांसद कानून बना रहे हैं, तो उनके अनुसार उन कानूनों और संस्थागत बदलावों की वैधता पर भी सवाल उठता है।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
राहुल गांधी ने कहा कि उनकी पहली मांग है कि सीईसी ज्ञानेश कुमार तुरंत पद से इस्तीफा दें। उन्होंने ज्ञानेश कुमार से कहा कि वह समझें कि क्या हो रहा है और उनके मुताबिक, उन्होंने जो किया है वह भारत देश के खिलाफ है।
राहुल गांधी ने दावा किया कि उनके पास वोट चोरी को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को भारत में तबाह नहीं होने दिया जाएगा और इस गड़बड़ी में शामिल हर व्यक्ति को सजा मिलेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि ज्ञानेश कुमार को खुद सोचना चाहिए और इन गड़बड़ियों का गवाह बनना चाहिए।
मोदी और शाह को लेकर राहुल गांधी का बयान
राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की भी जांच होगी। उन्होंने दोनों को इस साजिश के शीर्ष पर बताया। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि उन्होंने 2023 से इन मुद्दों को तथ्यों के साथ उठाया है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर हमला किया है।
क्या है चुनाव आयोग के भीतर आपत्ति का मामला?
इससे पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा था, 'संविधान के दुश्मनों का पर्दाफाश हो गया है। न्याय जरूर होगा। मैं शाम चार बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करूंगा।'
राहुल गांधी ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर बताया था कि वह शाम चार बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। यह बात ऐसे समय सामने आई थी जब चुनाव आयोग के भीतर ही एसआईआर प्रक्रिया के विरोध में आवाज उठने की बात कही गई।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग के कामकाज और फैसले लेने की प्रक्रिया को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि दो चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में 14 बार आपत्ति दर्ज कराई।
फॉर्म-6 और SIR को लेकर क्या सवाल उठे?
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ फैसलों और आदेशों को लेकर कहा कि उन्हें इसकी जानकारी या उनकी मंजूरी नहीं ली गई। इन आपत्तियों में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR, नए मतदाताओं का पंजीकरण, फॉर्म-6 में बदलाव, वोटर लिस्ट से नाम हटाने और जोड़ने, नाम बहाल करने के आदेशों के खिलाफ अपील और वोटर डेटा की सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल थे।
रिपोर्ट के अनुसार, नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में बदलाव पर भी दोनों चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई। इस फॉर्म में SIR से जुड़ा एक सवाल जोड़ा गया था, जिसमें आवेदक से पूछा जा रहा था कि उसका या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम पिछली SIR की मतदाता सूची में था या नहीं।
विवेक जोशी ने रिपोर्ट के मुताबिक मई में इस बदलाव पर आपत्ति दर्ज की थी। उनका कहना था कि फॉर्म-6 में बदलाव के लिए मतदाता पंजीकरण से जुड़े नियमों में संशोधन जरूरी है। सुखबीर सिंह संधू ने भी इस आपत्ति से सहमति जताई। बाद में संधू ने इस बदलाव को अनधिकृत और गैरकानूनी बताते हुए इसे हटाने की मांग की।
चुनाव आयोग ने आरोपों पर क्या कहा?
आयोग ने बुधवार को इन आरोपों को खारिज कर दिया और प्रेस नोट जारी कर अपना पक्ष साफ किया। आयोग ने कहा कि वह संविधान के तहत काम करता है।
आयोग के मुताबिक, वह एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था है और उसके भीतर लिखित टिप्पणियां, सुझाव, तकनीकी राय और आंतरिक जांच-पड़ताल सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि उसकी सभी कार्रवाइयां कानून और आयोग के निर्देशों के मुताबिक की गई हैं।