संसद में राघव चड्ढा ने उठाए जनता से जुड़े बड़े मुद्दे, सरकार से मांगे जवाब

Authored By: News Corridors Desk | 02 Apr 2026, 02:52 PM
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संसद के मौजूदा बजट सत्र 2026 में आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने जनता से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया है। उनके सवाल और सुझाव आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं, जिनका असर सीधे देश के करोड़ों नागरिकों पर पड़ता है।

टेलीकॉम और डेटा अधिकार का मुद्दा

डेटा रोलओवर (Data Rollover): राघव चड्ढा ने सबसे पहले टेलीकॉम सेक्टर से जुड़े मुद्दों को उठाया। उन्होंने ‘डेटा रोलओवर’ की मांग की, जिसमें अगर कोई यूजर अपने डेटा प्लान का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो बचा हुआ डेटा अगले दिन इस्तेमाल करने की सुविधा मिलनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब ग्राहक पूरे महीने का पैसा देता है, तो रात 12 बजे डेटा खत्म क्यों हो जाता है। इसके अलावा उन्होंने 28 दिनों की वैलिडिटी वाले रिचार्ज प्लान पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि इस सिस्टम की वजह से लोगों को साल में 12 की जगह 13 बार रिचार्ज करना पड़ता है, जिससे आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।

सामाजिक और पारिवारिक अधिकार

पैटरनिटी लीव (Paternity Leave): राघव चड्ढा ने ‘पितृत्व अवकाश’ यानी Paternity Leave को लेकर भी महत्वपूर्ण मांग की। उन्होंने कहा कि बच्चे की देखभाल सिर्फ मां की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पिता की भी बराबर जिम्मेदारी है। इसलिए भारत में पितृत्व अवकाश को कानूनी अधिकार बनाया जाना चाहिए, ताकि पिता भी अपने परिवार के साथ समय बिता सकें।

उपभोक्ता संरक्षण के मुद्दे

भ्रामक विज्ञापन (Misleading Ads): उन्होंने बाजार में मिलने वाले उत्पादों को लेकर भी चिंता जताई। खासकर ‘फ्रूट जूस’ के नाम पर बेचे जा रहे शुगर सिरप पर उन्होंने सवाल उठाया और कहा कि यह जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने सरकार से भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ सख्त नियम बनाने की मांग की। इसके अलावा उन्होंने विमान सेवाओं को लेकर भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि फ्लाइट्स में देरी होने पर यात्रियों को उचित मुआवजा मिलना चाहिए और एयरलाइंस को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।

आर्थिक और टैक्स से जुड़े सुझाव

इनकम टैक्स में राहत: बजट चर्चा के दौरान राघव चड्ढा ने मिडिल क्लास को राहत देने के लिए ‘स्टैंडर्ड डिडक्शन’ को ₹75,000 से बढ़ाकर ₹1.5 लाख करने का प्रस्ताव रखा। उनका कहना है कि इससे मध्यम वर्ग को सीधा फायदा मिलेगा। उन्होंने बैंकों द्वारा मिनिमम बैलेंस न रखने पर लगाए जाने वाले पेनाल्टी चार्ज को खत्म करने की भी मांग की। उनका कहना है कि इससे गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।

शहरी समस्याओं पर चिंता

शहरी बुनियादी ढांचा (Urban Issues) ट्रैफिक जाम: देश के बड़े शहरों में बढ़ते ट्रैफिक जाम को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई। दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में ट्रैफिक की समस्या गंभीर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि इससे लोगों का समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है, साथ ही मानसिक तनाव भी बढ़ रहा है।

अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे

राघव चड्ढा ने ‘राइट टू रिकॉल’ यानी जनता को अपने चुने हुए प्रतिनिधि को वापस बुलाने का अधिकार देने की बात भी रखी। इसके अलावा उन्होंने गिग वर्कर्स जैसे डिलीवरी पार्टनर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा की भी मांग की।

अन्य सवालों पर सरकार से जवाब की मांग

इस दौरान कुछ अन्य गंभीर मुद्दे भी सामने आए। कानपुर में किडनी बेचने वाले गैंग के पकड़े जाने के बाद यह सवाल उठाया गया कि पिछले पांच सालों में ऐसे कितने मामले सामने आए, कितने अस्पतालों पर कार्रवाई हुई और कितने लोग गिरफ्तार किए गए। इसके अलावा पेट्रोल पंप आवंटन को लेकर भी सवाल उठे। पूछा गया कि देशभर में कितने पेट्रोल पंप हैं, उनमें से कितने सांसदों के परिवारों को दिए गए हैं और उनका आवंटन किस प्रक्रिया से होता है। साथ ही मिलावट के मामलों में कितनी कार्रवाई की गई, इसकी भी जानकारी मांगी गई।

निष्कर्ष :- 

राघव चड्ढा ने संसद में ऐसे मुद्दे उठाए हैं, जो सीधे आम जनता की जिंदगी से जुड़े हैं। उनके सुझाव और सवाल सरकार को जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।