- भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 20 लाख करोड़ के निवेश अवसर
- अगले 10 से 11 वर्षों में 500 गीगावाट क्षमता जोड़ने का लक्ष्य
- पीएम सूर्य घर योजना से 65 लाख से अधिक परिवार जुड़े
- 44 हजार सरकारी भवन सौर ऊर्जा से जुड़े, 700 करोड़ की सालाना बचत
- सौर मॉड्यूल उत्पादन क्षमता 2 से बढ़कर 200 गीगावाट से अधिक
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India Renewable Energy Investment: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक निवेशकों को भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने का आमंत्रण देते हुए कहा है कि देश में राजनीतिक और नीतिगत स्थिरता के साथ निवेश के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं। भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं एक्सपो 2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दशक के अंत तक इस क्षेत्र में 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश अवसर पैदा होंगे। भारत अगले 10 से 11 वर्षों में करीब 500 गीगावाट अतिरिक्त गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता जोड़ने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि देश अपनी क्षमता और निरंतर प्रयासों के दम पर इस लक्ष्य को हासिल कर लेगा।
वैश्विक संकट के बीच मजबूत बनी भारत की आर्थिक वृद्धि
प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना महामारी से लेकर वर्तमान पश्चिम एशिया संकट तक वैश्विक अर्थव्यवस्था ने कई बड़े व्यवधानों का सामना किया है। इसके बावजूद भारत ने मजबूत आर्थिक विकास दर बनाए रखी है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में लगातार निवेश और व्यवस्था में सुधार ने देश को बाहरी संकटों से निपटने में मजबूती दी है।
मोदी ने कहा कि यदि भारत ने पिछले दशक में स्वच्छ ऊर्जा में निवेश नहीं किया होता और इसके लिए नई व्यवस्थाएं विकसित नहीं की होतीं, तो देश का संकट अन्य देशों की तुलना में कहीं अधिक गंभीर हो सकता था। उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक सुरक्षा के बीच सीधे संबंध का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवाश्म ईंधन पर अत्यधिक निर्भरता वैश्विक अर्थव्यवस्था को बार-बार प्रभावित करती रहेगी। ऊर्जा सुरक्षा का भविष्य स्वच्छ ऊर्जा में निहित है।
2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म क्षमता का लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा को संकल्प, जुनून और प्रदर्शन से परिभाषित बताया। उन्होंने कहा कि भारत ने वर्ष 2025 में ही अपनी कुल स्थापित बिजली क्षमता का आधा हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित समय से पांच वर्ष पहले हासिल कर लिया। देश की गैर-जीवाश्म स्थापित क्षमता 50 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है और स्वच्छ ऊर्जा क्षमता करीब 300 गीगावाट तक पहुंच गई है।
मोदी ने कहा कि भारत सौर और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में दुनिया के शीर्ष तीन देशों में शामिल है। उन्होंने विश्वास जताया कि देश 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को प्राप्त कर लेगा। उन्होंने इसे कठिन लक्ष्य जरूर बताया, लेकिन देश की क्षमता पर भरोसा जताते हुए कहा कि भारत इसे हासिल करके रहेगा।
65 लाख परिवारों को मिला रूफटॉप सोलर का लाभ
प्रधानमंत्री ने पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया कि फरवरी 2024 में शुरू हुई इस योजना के तहत एक करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य है। अब तक 65 लाख से अधिक परिवार इस अभियान से जुड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि हर छह दिन में एक लाख नए घर योजना से जुड़ रहे हैं।
एक अध्ययन के अनुसार, योजना से बिजली बिलों में लगभग 76 प्रतिशत की कमी आई है। लाखों परिवारों के बिजली बिल शून्य हो गए हैं और कुछ परिवार अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेचकर आय भी अर्जित कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की यह योजना अन्य देशों की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत कर सकती है।
44 हजार सरकारी भवनों से 700 करोड़ की सालाना बचत
मोदी ने बताया कि 44 हजार से अधिक सरकारी भवनों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जा चुका है, जिससे प्रतिवर्ष लगभग 700 करोड़ रुपये की बचत हो रही है। उन्होंने सरकारी भवनों, स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों और स्ट्रीट लाइट नेटवर्क को शीघ्र सौर ऊर्जा से जोड़ने का आह्वान किया।
कुसुम योजना के तहत 30 लाख से अधिक किसानों को सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई की सुविधा मिली है। प्रधानमंत्री के अनुसार, प्रत्येक सौर पंप लाभार्थी को हर साल लगभग एक लाख रुपये की बचत हो रही है। उन्होंने किसानों से खेतों की मेड़ों और अनुपयोगी जमीन पर सौर पैनल लगाने की संभावनाओं का उपयोग करने की अपील की।
सौर विनिर्माण में भारत की बड़ी छलांग
प्रधानमंत्री ने स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण की बढ़ती क्षमता को आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया की सफलता बताया। उन्होंने कहा कि एक दशक पहले भारत की सौर मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता लगभग दो गीगावाट थी, जो अब 200 गीगावाट से अधिक हो गई है। देश में करीब 40 गीगावाट सौर सेल विनिर्माण क्षमता भी विकसित हो चुकी है। उन्होंने हरित हाइड्रोजन क्षेत्र में राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत इस दशक के अंत तक 50 लाख टन हरित हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य बताया। साथ ही परिवहन क्षेत्र में इसके उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही।
हरित ऊर्जा कॉरिडोर और नई तकनीकों पर जोर
मोदी ने कहा कि सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाने के साथ उसका कुशल वितरण भी जरूरी है। इसके लिए हरित ऊर्जा कॉरिडोर और समर्पित पारेषण लाइनों का विकास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार ने हरित ऊर्जा कॉरिडोर के दूसरे चरण के लिए लगभग दो लाख करोड़ रुपये का निवेश निर्धारित किया है।
प्रधानमंत्री ने स्टार्टअप, आईआईटी, शोधकर्ताओं और उद्यमियों से नई सौर तकनीकों, बैटरी भंडारण, सौर कुकिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए घरेलू सौर चार्जिंग सुविधाएं विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा से विनिर्माण, स्थापना, रखरखाव और परिवहन जैसे क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
20 लाख करोड़ से अधिक निवेश की संभावनाएं
प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले एक दशक में भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हुआ है। इसमें 2024 के री-इन्वेस्ट शिखर सम्मेलन के बाद के दो वर्षों में छह लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश शामिल है। उन्होंने कहा कि दशक के अंत तक निवेश के अवसर 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है।