पीएम पर विपक्षी बोल
|
|
जयराम रमेश ने कह, प्रधानमंत्री उन लाखों युवाओं से माफ़ी मांगेंसु
प्रिया श्रीनेत ने कहा, कांग्रेस की विधवा, जर्सी गाय, पचास करोड़ की गर्लफ्रेंड, मुजरा क्या है
संजय सिंह ने कहा, ये ज्ञान प्राप्त करने में आपको बहुत समय लग गया
अंभिजीत दीपके ने कहा, 20 से ज्यादा बच्चों ने आत्मह*त्या कर ली और यह सोचते हैं कि सब शहद टपकाए
|
जंतर मंतर आंदोलन के दौरान भद्दी गालियां देने वाले बच्चों को माफ़ करने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बयान को काँग्रेस ने ‘विक्टिम कार्ड’ बताते हुए युवाओं से माफ़ी मांगने की माँग की है।
काँग्रेस मीडिया डिपार्टमेंट के प्रमुख जयराम रमेश Jairam Ramesh ने कहा, ‘पूरा देश चाहता है कि प्रधानमंत्री उन लाखों युवाओं से माफ़ी मांगें जिन्हें पेपर लीक करने वाली NTA और छात्र प्रदर्शनकारियों पर गृह मंत्रालय की मंज़ूरी से हुई बर्बरता के कारण तकलीफ़ उठानी पड़ी।’
सोशल मीडिया पर शेयर किये इस पोस्ट में रमेश के अनुसार
कल देर रात, अपनी ही तारीफ़ में डूबे प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने युवाओं को माफ़ कर दिया। यह देश और उन युवाओं का अपमान है जिन्होंने उनकी सरकार के दौर में तकलीफ़ें झेली हैं और जो उनसे माफ़ी की जायज़ मांग कर रहे हैं।
काँग्रेस नेता ने कहा कि ‘चंदा चोरी, आस्था के साथ धोखा' और ‘तुगलकी नोटबंदी’ पर भी पूरा देश माफ़ी की उम्मीद कर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री पर झूठ फैलाने और इंस्टाग्राम पर जनसभा करने का आरोप लगाया।
दूसरी तरफ़ पार्टी की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, “किसी भी सभ्य समाज में गालियों की जगह नहीं होती , तो कांग्रेस की विधवा, जर्सी गाय, पचास करोड़ की गर्लफ्रेंड, मुजरा क्या है ?”
आम आदमी पार्टी के नेता और राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने अपनी पोस्ट में लिखा, ‘मैं मोदी Sir से सहमत हूँ गाली-गलौज नहीं करनी चाहिए।लेकिन ये ज्ञान प्राप्त करने में आपको बहुत समय लग गया प्रभु, आपके लोगों ने तो किसी की माँ, बहन, बेटी किसी को नहीं बख्शा सबको भद्दी भद्दी गालियाँ दी।’
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजित दीपके ने अपनी पोस्ट में कहा, ’20 से ज्यादा बच्चों ने आत्मह*त्या कर ली और यह सोचते हैं कि सब शहद टपकाए।’
राश्ड्रीय जनता दल के सांसद और प्रवक्ता मनोज झा ने कहा, 'यदि आपका यह आग्रह सचमुच दिल से निकला है कि अमर्यादित भाषा बोलने वाले छात्रों को क्षमा कर दिया जाए और उन्हें एफआईआर, गिरफ्तारी तथा अदालतों की अंतहीन यातना से बचाया जाए, तो यह स्वागतयोग्य है।... बस एक छोटी-सी जिज्ञासा है सर! क्या देश यह आशा करे कि इस बार क्षमा केवल दी नहीं जाएगी, माँगी भी जाएगी? '