राजनाथ सिंह के आरोपों पर कांग्रेस का पलटवार, पवन खेड़ा ने याद दिलाया 1977 का सत्ता परिवर्तन

राजनाथ सिंह के आरोपों पर कांग्रेस का पलटवार, पवन खेड़ा ने याद दिलाया 1977 का सत्ता परिवर्तन
हाइलाइट्स
• राजनाथ सिंह के आरोपों पर कांग्रेस का पलटवार
• पवन खेड़ा ने याद दिलाया 1977 का सत्ता परिवर्तन
• जंतर-मंतर से प्रतिबंध हटाने की मांग

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के विपक्ष पर बांग्लादेश जैसी स्थिति पैदा कर सत्ता हासिल करने की कोशिश करने के आरोपों पर कांग्रेस ने जवाब दिया है। शुक्रवार को कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य चुनाव के जरिए सरकार बदलना है। उन्होंने सवाल उठाया कि लोकतंत्र में चुनाव के माध्यम से सत्ता परिवर्तन की मांग को गलत कैसे कहा जा सकता है।

पवन खेड़ा ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर सत्ता से बाहर होने का डर होने का आरोप भी लगाया। अपनी बात के समर्थन में उन्होंने 1977 में हुए सत्ता परिवर्तन का उदाहरण दिया। साथ ही, उन्होंने सरकार से जंतर मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति से जुड़ा प्रतिबंध हटाने की मांग की।

'वोट चोर, गद्दी छोड़' अभियान को लेकर क्या बोले पवन खेड़ा?

प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवन खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस 'वोट चोर, गद्दी छोड़' अभियान चला रही है। उनके मुताबिक, इस मुद्दे पर देश में आवाज उठ रही है और विपक्ष खुलकर कह रहा है कि वह चुनाव में मौजूदा सरकार को हराकर सत्ता से हटाना चाहता है।

खेड़ा ने कहा कि जब विपक्ष अपनी राजनीतिक मंशा स्पष्ट रूप से सामने रख रहा है, तो राजनाथ सिंह को इस तरह के आरोप लगाने की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने विपक्ष की सरकार बदलने की मांग को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ते हुए कहा कि इसमें कुछ भी छिपा हुआ नहीं है।

1977 के सत्ता परिवर्तन का दिया उदाहरण

पवन खेड़ा ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष सरकार की नीतियों का विरोध करता है और चुनाव के जरिए उसे सत्ता से बाहर करने की कोशिश करता है। उन्होंने 1977 में हुए सत्ता परिवर्तन का जिक्र करते हुए सवाल किया कि क्या उस समय देश में सरकार नहीं बदली थी?

खेड़ा के अनुसार, जब विपक्ष सड़कों पर उतरकर आंदोलन करता है, तो सरकार बदलने की मांग उठना स्वाभाविक है। उन्होंने जोर दिया कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में सत्ता परिवर्तन का रास्ता चुनाव है।

राजनाथ सिंह ने विपक्ष पर क्या आरोप लगाए थे?

दरअसल, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर युवाओं के विरोध प्रदर्शनों का इस्तेमाल राजनीतिक अशांति फैलाने के लिए करने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि विपक्ष भारत में भी बांग्लादेश जैसी स्थिति पैदा करके सत्ता परिवर्तन की कोशिश कर रहा है।

लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सिंह ने दिल्ली में पिछले कुछ दिनों में हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा था कि ये कई गंभीर सवाल खड़े करती हैं।

युवाओं को राजनीतिक टकराव में इस्तेमाल करने का आरोप

राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस और उसके सहयोगी संगठन युवाओं की ऊर्जा का उपयोग देश निर्माण के बजाय राजनीतिक टकराव और अव्यवस्था फैलाने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने कहा था कि युवाओं को अशांति की राजनीति में मोहरा बनाया जा रहा है।

यह बयान चुनावी प्रक्रिया और चुनाव आयोग को लेकर विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों के बीच आया था। इन प्रदर्शनों के बाद केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव तेज हुआ है।

चुनाव आयोग को लेकर जारी विवाद में बढ़ी सियासी बयानबाजी

चुनावी प्रक्रिया और चुनाव आयोग से जुड़ा विवाद अब सरकार बदलने की मांग तक पहुंच गया है। राजनाथ सिंह विपक्ष पर देश में अस्थिरता पैदा करने का आरोप लगा रहे हैं, जबकि कांग्रेस अपनी मांग को चुनाव के जरिए सत्ता परिवर्तन की लोकतांत्रिक कोशिश बता रही है।

दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक मतभेद सामने आ रहे हैं।

जंतर मंतर से प्रतिबंध हटाने की मांग

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पवन खेड़ा ने सरकार से जंतर मंतर को फिर से प्रदर्शन स्थल के रूप में बहाल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को जंतर मंतर से प्रतिबंध हटाना चाहिए, क्योंकि कोई भी खान मार्केट या दूसरी जगहों पर जाकर धरना-प्रदर्शन नहीं करेगा।