पाकिस्तान में बढ़ते ऊर्जा संकट के बीच सरकार अब ईंधन और बिजली की खपत को कम करने के लिए सख्त कदम उठाने पर विचार कर रही है। इसी कड़ी में हर हफ्ते दो दिन ‘स्मार्ट लॉकडाउन’ लागू करने का प्रस्ताव सामने आया है। इस योजना का उद्देश्य देश में ऊर्जा संसाधनों पर बढ़ते दबाव को कम करना है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार ने इस प्रस्ताव को प्रांतीय सरकारों, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और गिलगित-बाल्टिस्तान के अधिकारियों के साथ साझा किया है। सरकार इस मुद्दे पर सभी संबंधित पक्षों की राय जानना चाहती है, ताकि कोई अंतिम फैसला लेने से पहले सहमति बनाई जा सके। प्रस्तावित योजना के अनुसार, ‘स्मार्ट लॉकडाउन’ हर हफ्ते शनिवार दोपहर से शुरू होकर रविवार आधी रात तक लागू रहेगा। इस दौरान देशभर में बाजार, कार्यालय और सभी गैर-जरूरी सेवाएं बंद रहेंगी। साथ ही शादी-ब्याह जैसे सामाजिक कार्यक्रमों पर भी रोक लगाई जा सकती है।
इस कदम का मुख्य उद्देश्य उन दिनों में आर्थिक गतिविधियों को सीमित करना है, जब ऊर्जा की खपत सबसे अधिक होती है। सरकार का मानना है कि यदि सप्ताहांत में गतिविधियां कम कर दी जाएं, तो बिजली और ईंधन की खपत में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, अगर इस प्रस्ताव पर सभी प्रांतों की सहमति बन जाती है, तो जल्द ही एक औपचारिक अधिसूचना जारी की जाएगी। संभावना है कि यह ‘स्मार्ट लॉकडाउन’ 4 अप्रैल से लागू किया जा सकता है।
यह फैसला ऐसे समय में लिया जा रहा है जब पाकिस्तान ईंधन की आपूर्ति को लेकर चुनौतियों का सामना कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश ईरान के साथ तेल और गैस आपूर्ति को लेकर समझौते का दावा कर रहा है, लेकिन घरेलू स्तर पर ऊर्जा संकट अभी भी बना हुआ है। दूसरी ओर, भारत में स्थिति अपेक्षाकृत स्थिर नजर आ रही है। हाल के दिनों में पेट्रोल पंपों पर दिखी भीड़ अब कम हो गई है और भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। इसके अलावा, दो गैस टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पार कर भारत की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे आपूर्ति और मजबूत होने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का यह कदम अल्पकालिक राहत दे सकता है, लेकिन लंबे समय में ऊर्जा संकट से निपटने के लिए स्थायी समाधान जरूरी होंगे। ‘स्मार्ट लॉकडाउन’ से आम लोगों और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में सरकार के पास सीमित विकल्प ही मौजूद हैं।