Drone Attack on Mecca: मक्का को लेकर सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच अलग-अलग दावे सामने आए हैं। सऊदी अरब का कहना है कि हूतियों की ओर से मक्का की तरफ एक ड्रोन भेजा गया था, जिसे सऊदी एयर डिफेंस ने पवित्र शहर की प्रतिबंधित हवाई सीमा में पहुंचने से पहले ही मार गिराया। दूसरी तरफ हूतियों ने इस आरोप को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे झूठ बताया है।
इस मामले पर इस्लामिक सहयोग संगठन यानी OIC ने भी प्रतिक्रिया दी है। वहीं, मक्का को निशाना बनाए जाने के पुराने दावों के साथ 1979 में ग्रैंड मस्जिद पर हुए कब्जे की घटना भी एक बार फिर चर्चा में है।
मक्का के पास ड्रोन को लेकर सऊदी अरब का दावा
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी के मुताबिक, सऊदी एयर डिफेंस ने मंगलवार शाम मक्का के दक्षिण में एक ड्रोन को इंटरसेप्ट कर नष्ट किया।
सऊदी पक्ष का कहना है कि ड्रोन के पवित्र शहर के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में दाखिल होने से पहले ही उसे मार गिराया गया। गठबंधन ने इसे मक्का को निशाना बनाने की कोशिश बताया।
सऊदी अधिकारियों ने दो पवित्र मस्जिदों और जायरीनों की सुरक्षा को 'रेड लाइन' बताया है। ऐसे में सऊदी के दावे के मुताबिक, यह मामला केवल ड्रोन को मार गिराने तक सीमित नहीं है, बल्कि पवित्र स्थलों की सुरक्षा से भी जुड़ा है।
हूतियों ने सऊदी के आरोप को बताया झूठ
सऊदी अरब के दावे के बाद हूतियों की ओर से इसका खंडन किया गया। हूती नेता हाजेम अल-असद ने मक्का को निशाना बनाने के आरोप को 'झूठ' बताया।
हूतियों का कहना है कि उन्होंने मक्का या किसी धार्मिक स्थल को निशाना नहीं बनाया। उन्होंने सऊदी अरब पर पुराने आरोप को दोहराने की बात कही है।
इस मामले में फिलहाल दोनों पक्षों के बयान एक-दूसरे से अलग हैं। सऊदी अरब ड्रोन को हूतियों की ओर से आया बता रहा है, जबकि हूती इस दावे को नकार रहे हैं।
OIC की प्रतिक्रिया क्या रही?
मामले के सामने आने के बाद इस्लामिक सहयोग संगठन यानी OIC ने मक्का और मदीना के पवित्र इलाकों में ऐसी घटना की कड़ी निंदा की।
OIC ने पवित्र स्थलों की सुरक्षा और उनकी पवित्रता बनाए रखने पर जोर दिया। संगठन की प्रतिक्रिया मक्का और मदीना के पवित्र इलाकों को लेकर सामने आई चिंता से जुड़ी है।
मक्का को लेकर पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे दावे
मौजूदा घटना को सऊदी गठबंधन ने मक्का को निशाना बनाने की दूसरी हूती कोशिश बताया है।
इससे पहले जुलाई 2017 में एक बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च का दावा किया गया था। उस समय सऊदी पक्ष ने कहा था कि मक्का की तरफ मिसाइल भेजी गई थी।
हालांकि, 2017 की घटना को लेकर भी अलग-अलग पक्षों के दावे और उनकी व्याख्याएं अलग रही थीं। अब 2026 में ड्रोन से जुड़ा नया विवाद सामने आया है।
47 साल पहले मक्का में हुआ था बड़ा सशस्त्र कब्जा
मक्का के इतिहास से जुड़ी एक बेहद महत्वपूर्ण घटना करीब 47 साल पुरानी है। 20 नवंबर 1979 को ग्रैंड मस्जिद यानी मस्जिद अल-हराम पर हथियारबंद लोगों ने कब्जा कर लिया था।
इस घटना का नेतृत्व जुहैमैन अल-ओतैबी ने किया था। उसके साथ सैकड़ों हथियारबंद लोग थे। उन्होंने मस्जिद पर कब्जा करने के साथ वहां मौजूद लोगों को बंधक बना लिया था।
हमलावरों ने अपने एक साथी को महदी घोषित किया था। इसके बाद सऊदी सुरक्षा बलों और कब्जा करने वालों के बीच लंबी लड़ाई हुई।
यह घेराबंदी करीब दो सप्ताह तक चली और 4 दिसंबर 1979 को खत्म हुई।
1979 की घटना में कितने लोग मारे गए?
1979 की घटना में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई और लोग घायल भी हुए। अलग-अलग ऐतिहासिक रिकॉर्ड में मृतकों और घायलों के आंकड़ों में अंतर मिलता है।
अमेरिकी विदेश विभाग के ऐतिहासिक दस्तावेजों में शुरुआती दिनों में करीब 300 हथियारबंद लोगों के ग्रैंड मस्जिद पर कब्जे का उल्लेख मिलता है।
Arab News के ऐतिहासिक विवरण के मुताबिक, सऊदी सुरक्षा बलों के 127 लोग मारे गए और 451 घायल हुए। वहीं हमलावरों में 117 लोग मारे गए। इसके बाद 63 लोगों को फांसी दी गई।
अलग-अलग स्रोतों में कुल हताहतों की संख्या अलग होने के कारण इसे एक निश्चित कुल आंकड़े के रूप में पेश नहीं किया जा सकता।
1979 की घटना और 2026 के ड्रोन दावे में फर्क
दोनों घटनाओं के बीच बड़ा अंतर है। 1979 में हथियारबंद लोगों ने ग्रैंड मस्जिद पर सीधे कब्जा कर लिया था और कई दिनों तक वहां संघर्ष चला।
वहीं 2026 के मौजूदा मामले में सऊदी अरब का दावा है कि मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में पहुंचने से पहले ड्रोन को मार गिराया गया। हूतियों ने इस दावे से साफ इनकार किया है।
इसलिए 1979 की सशस्त्र कब्जे वाली घटना और 2026 के कथित ड्रोन इंटरसेप्शन को एक ही तरह की घटना नहीं माना जा सकता।
मक्का ड्रोन मामले में अब तक क्या सामने आया?
मौजूदा मामले में सऊदी अरब की ओर से ड्रोन को हूतियों से जोड़ते हुए मक्का को निशाना बनाने का दावा किया गया है। हूतियों ने इस आरोप को झूठ बताते हुए इससे इनकार किया है।
OIC ने मक्का और मदीना के पवित्र इलाकों में ऐसी घटना की निंदा की है। वहीं, 2017 के मिसाइल दावे और 1979 की ग्रैंड मस्जिद घटना की वजह से मक्का से जुड़ी पुरानी घटनाएं भी इस पूरे मामले के साथ चर्चा में हैं।
फिलहाल इस मामले में सऊदी अरब का दावा और हूतियों का खंडन दोनों सामने हैं।