केदारधाम के कपाट खुले, पीएम ने पाँच संकल्प के साथ यात्रा का आग्रह किया

Date: 2026-04-22
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देहरादून। केदारनाथ धाम के कपाट बुधवार को विधिवत पूजा अर्चना के बाद श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। शीतकाल को दौरान छह महीने बंद रहने के बाद भगवान केदारनाथ की मूर्ति को उखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर से लाकर केदारनाथ धाम में स्थापित किया गया।

इस अवसर पर आयोजित समारोह में पारंपरिक रस्मों को पूरा करने के साथ सलामी दी गई और हेलीकाप्टर से फूल बरसाए गए। अब कपाट भाईदूज पर बंद होंगे।

केदारनाथ धाम का कपाट खुलने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संदेश में कहा कि केदारनाथ धाम और चारधाम की यह यात्रा हमारी आस्था, एकता और समृद्ध परंपराओं का दिव्य उत्सव है। इन यात्राओं से हमें भारत की सनातन संस्कृति के दर्शन भी होते हैं।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर किए अपने पोस्ट में कहा कि इस वर्ष चारधाम यात्रा के आरंभ उत्सव पर, उत्तराखंड आने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए मैंने एक पत्र के माध्यम से अपनी भावनाएं व्यक्त की हैं। मेरी कामना है कि बाबा केदार सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें और आपकी यात्राओं को शुभ करें।

इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने जो पत्र लिखा है उसमें उन्होंने चार धाम यात्रा का महत्व रेखांकित करते हुए श्रद्धालुओं से पाँच संकल्प लेने का आग्रह किया है।

प्रधानमंत्री ने जिन संकल्पों का आह्वान किया है वो इस प्रकार हैं-

पहला संकल्प: स्वच्छता सर्वोपरि

धाम और उसके आसपास स्वच्छता बनाएं रखें। नदियों को साफ़ रखने के लिए अपना योगदान दें। सिंगल यूज़ प्लास्टिक से मुक्त यात्रा का संकल्प लें और इस पावन धरा की गरिमा को बनाए रखें।

दूसरा संकल्प: प्रकृति और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता

हिमालय की इस दिव्य धरा के प्रति संवेदनशील रहें। प्रकृति के संतुलन को बनाए रखते हुए , एक पेड़ मां के नाम जैसे प्रयासों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में योगदान दें।

तीसरा संकल्प: सेवा, सहयोग और एकता पर बल

पुरातन काल से हमारी तीर्थ यात्राएं सर्वजन की सेवा और सामाजिक समरसता को स्थापित करने का माध्यम रही हैं। आज भी लोग इसी सेवा भाव से तीर्थयात्रियों की सेवा करते हैं। मैं चार धाम आने वाले हर तीर्थयात्री से भी आग्रह करता हूं कि वो अपनी यात्रा के हर दिन , किसी न किसी रूप में, लोगों की सेवा का एक काम अवश्य करे।

सहयात्रियों की सहायता करें और देश की विभिन्न जगहों से आए लोगों से जुड़ें। उनके परम्पराओं का सहभागी बनकर एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को इस यात्रा के माध्यम से सशक्त करें।

चौथा संकल्प: वोकल फ़ॉर लोकल को बढ़ावा

अपने मूल स्थान से चलकर यात्रा से घर लौटने तक अपने कुल खर्च का पाँच प्रतिशत हिस्सा लोकल उत्पादों को खरीदने पर ज़रूर खर्च करें। अगर किसी स्थानीय चीज़ की ज़रूरत इस मौसम में नहीं भी है तो उसे भविष्य के इस्तेमाल के भाव से ही खरीदने का प्रयास करें।

पांचवां संकल्प: अनुशासन, सुरक्षा और मर्यादा का पालन

यात्रा के नियमों और यातायात निर्देशों का पालन करें। एक ज़िम्मेदार और सजग नागरिक को रूप में इस तीर्थ यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाएं। हम ये प्रयास करें कि हमारी यात्रा से , इस यात्रा के आयोजन और प्रबंधन में जितने भी लोग लगे हुए हैं, उन्हें कोई असुविधा न हो।

महत्वपूर्ण बात:

केदारनाथ यात्रा के लिए उत्तराखंड पर्यटन की आधिकारिक वेबसाइट पर पंजीकरण कराना अनिवार्य है। अपनी यात्रा शुरू करने से पहले वहां के मौसम की जानकारी हासिल कर लें और अगर आप हेलीकाप्टर सेवा का उपयोग करना चाहते हैं तो उसकी बुकिंग आईआरसीटीसी की वेबसाइट से कर सकते हैं।

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