EPFO Salary Limit: कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, वेतन सीमा बढ़कर 25 हजार रुपये

EPFO Salary Limit: कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, वेतन सीमा बढ़कर 25 हजार रुपये
  1. EPFO वेतन सीमा ₹15,000 से ₹25,000 हुई।

  2. 51 लाख से अधिक कर्मचारियों को मिलेगा लाभ।

  3. प्रोविडेंट फंड, पेंशन, बीमा के फायदे मिलेंगे।


EPFO Salary Limit: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब यह सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने का प्रस्ताव है। इस बदलाव से 51 लाख से ज्यादा कर्मचारी अनिवार्य EPFO कवरेज के दायरे में आ सकते हैं।

इस दायरे में आने वाले कर्मचारियों को लागू स्कीम के प्रावधानों के तहत प्रोविडेंट फंड, पेंशन और इंश्योरेंस से जुड़े फायदे मिल सकेंगे।

2014 में बढ़ी थी EPFO की वेतन सीमा

EPFO की वेतन सीमा आखिरी बार सितंबर 2014 में बढ़ाई गई थी। उस समय इसे बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति माह किया गया था।

सरकार के मुताबिक, नई सीमा तय करने के दौरान 2014 के बाद वेतन में हुई लगातार बढ़ोतरी, बढ़ती आय और औपचारिक रोजगार के विस्तार को ध्यान में रखा गया है।

इससे पहले 2004 से 2014 के बीच EPFO की वेतन सीमा में कोई बदलाव नहीं हुआ था। सितंबर 2014 में इसे बढ़ाकर 15,000 रुपये किया गया था। अब मौजूदा फैसला इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए सीमा को 25,000 रुपये करने की दिशा में है।

51 लाख कर्मचारियों को मिलेगा फायदा

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, "इससे लगभग 51 लाख कर्मचारियों को फायदा होगा। सरकार का खर्च 11,339 करोड़ रुपये होगा।"

उन्होंने कहा, "यह लंबे समय से मांग की जा रही थी और अब PM ने इसे मंज़ूरी दे दी है। सुरक्षा का यह दायरा कर्मचारियों और नियोक्ताओं, दोनों के लिए मददगार साबित होगा।"

अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, कई राज्यों में अकुशल श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन 15,000 रुपये से ज्यादा हो गया है। ऐसे में 2014 में तय की गई वेतन सीमा का आधार नहीं रह गया था।

वेतन सीमा बढ़ाकर 25 हजार करने का फैसला

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि बातचीत के बाद वेतन सीमा को बढ़ाकर 25,000 रुपये करने का फैसला लिया गया है। उन्होंने नौकरी चाहने वालों के लिए कहा कि "इससे सोशल सिक्योरिटी कवरेज बढ़े".

नई सीमा का उद्देश्य कर्मचारियों को EPFO के तहत मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है। सरकार ने वेतन वृद्धि, बढ़ती आय और औपचारिक रोजगार के विस्तार को इस फैसले के प्रमुख आधार के तौर पर बताया है।