हाइलाइट्स
• CJP प्रदर्शन से पहले ध्रुव राठी हिरासत में
• क्या विदेशी नागरिक भारत में प्रदर्शन कर सकते हैं?
• संविधान का अनुच्छेद 19 भारतीय नागरिकों को देता है सभा का अधिकार
• ध्रुव राठी की नागरिकता और वीजा पर आधिकारिक पुष्टि जरूरी
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले यूट्यूबर ध्रुव राठी को शनिवार सुबह गुरुग्राम स्थित उनके आवास से हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। यह प्रदर्शन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर बुलाया गया था। ध्रुव राठी ने भी इस प्रदर्शन में शामिल होने की बात कही थी। उनकी हिरासत के बाद उनकी नागरिकता और भारत में रहने की कानूनी स्थिति को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
लेकिन यहां एक अहम सवाल है: क्या जर्मनी में रहने वाला या किसी दूसरे देश का नागरिक भारत में राजनीतिक प्रदर्शन में हिस्सा ले सकता है? क्या भारतीय संविधान इसकी अनुमति देता है, या इसके लिए अलग नियम लागू होते हैं? इन सवालों का जवाब नागरिकता, वीजा की शर्तों और संबंधित कानूनों को समझकर ही दिया जा सकता है।
ध्रुव राठी को हिरासत में क्यों लिया गया?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली में CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले ध्रुव राठी को गुरुग्राम स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया गया। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। एक रिपोर्ट में गुरुग्राम पुलिस के अधिकारी के हवाले से बताया गया कि राठी को प्रदर्शन में शामिल न होने के लिए समझाने की कोशिश की गई थी।
ध्रुव राठी जर्मनी में रहते हैं और सोशल मीडिया पर सामाजिक व राजनीतिक मुद्दों पर वीडियो बनाते हैं। उन्होंने CJP के प्रदर्शन का समर्थन किया था। हालांकि, जर्मनी में रहने और जर्मन नागरिक होने में अंतर है। केवल विदेश में रहने के आधार पर किसी व्यक्ति की नागरिकता तय नहीं की जा सकती।
इसी मामले में उनकी नागरिकता, पासपोर्ट और वीजा की स्थिति की जांच की मांग भी उठाई गई है। लेकिन जांच की मांग होना अपने आप में किसी नियम के उल्लंघन का प्रमाण नहीं है।
भारतीय संविधान क्या कहता है?
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(b) भारत के नागरिकों को शांतिपूर्वक और बिना हथियार इकट्ठा होने का अधिकार देता है। यह अधिकार विदेशी नागरिकों को उसी रूप में उपलब्ध नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 19 में दिए गए अधिकारों का दायरा स्पष्ट रूप से भारतीय नागरिकों से जुड़ा है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत में मौजूद विदेशी नागरिक हर सार्वजनिक गतिविधि से प्रतिबंधित हैं। लेकिन राजनीतिक प्रदर्शन में उनकी भागीदारी को लेकर उनकी कानूनी स्थिति और उन पर लागू नियमों को देखना जरूरी है।
क्या विदेशी नागरिक को प्रदर्शन के लिए अनुमति चाहिए?
इस सवाल का जवाब हर परिस्थिति में एक जैसा नहीं हो सकता। भारत में विदेशी नागरिकों के प्रवेश और यहां रहने से जुड़े नियम लागू होते हैं। विदेशी अधिनियम, 1946 की धारा 3 केंद्र सरकार को विदेशी नागरिकों के भारत में प्रवेश, मौजूदगी और गतिविधियों पर शर्तें लगाने तथा कुछ गतिविधियों को नियंत्रित करने का अधिकार देती है।
इसलिए यह तय करने के लिए कि कोई विदेशी नागरिक किसी राजनीतिक प्रदर्शन में शामिल हो सकता है या नहीं, उसकी नागरिकता, भारत में प्रवेश के आधार, वीजा की शर्तों और लागू प्रतिबंधों को देखना होगा। सिर्फ किसी व्यक्ति के विदेश में रहने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि उसका प्रदर्शन में शामिल होना गैरकानूनी है।
क्या ध्रुव राठी की नागरिकता की जांच से मामला स्पष्ट होगा?
ध्रुव राठी की नागरिकता और वीजा को लेकर सवाल उठाए जाने के बाद इस विषय पर चर्चा तेज हुई है। लेकिन इन सवालों का जवाब संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक जानकारी से ही मिल सकता है। उनकी नागरिकता की पुष्टि के बिना उन्हें जर्मन नागरिक कहना उचित नहीं होगा।
इसी तरह, किसी प्रदर्शन में शामिल होने की इच्छा या उसका समर्थन करने भर से यह साबित नहीं होता कि किसी व्यक्ति ने कानून का उल्लंघन किया है। इसके लिए संबंधित नियमों और परिस्थितियों के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जा सकता है।
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल क्या है?
ध्रुव राठी की हिरासत ने दो अलग मुद्दों को सामने रखा है—एक, दिल्ली में प्रस्तावित CJP प्रदर्शन और उस पर पुलिस की कार्रवाई; दूसरा, विदेशी नागरिकों के भारत में राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने से जुड़े नियम।
संविधान का अनुच्छेद 19 शांतिपूर्ण सभा का अधिकार भारतीय नागरिकों को देता है, जबकि विदेशी नागरिकों की स्थिति पर उनके प्रवेश और रहने से जुड़े कानून तथा लागू शर्तें भी असर डाल सकती हैं। इसलिए ध्रुव राठी के मामले में किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले उनकी नागरिकता, वीजा की शर्तों और हिरासत के आधिकारिक आधार की पुष्टि जरूरी है।