भारत को 2019 से अब तक 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाने में सफलता मिली है।
भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम' (Fugitive Economic Offenders Act) लागू होने और भगोड़ों के खिलाफ एक एकीकृत, खुफिया-आधारित और प्रौद्योगिकी-संचालित मॉडल विकसित होने से भगोड़ों को वापस लाने का रास्ता साफ हुआ।
संक्षेप में
|
|
2019 से 2026 के बीच मिली सफलता
INTERPOL से रेड कार्नर नोटिस में बढ़ोतरी
पिछले 3 साल में, 401 भगोड़ों के खिलाफ नोटिस
'ऑपरेशन त्रिशूल' से जियो-लोकेशन ट्रैकिंग से मदद
|
इतनी बड़ी संख्या में भगोड़ों को वापस लाना इस लिहाज़ से बड़ी सफलता कहा जायेगा क्योंकि 2004 से 2013 के बीच एक वर्ष में औसतन केवल 4 भगोड़ों का प्रत्यर्पण होता था जबकि 110 अनुरोध लंबित थे।
मोदी सरकार ने PMLA के सख्ती से लागू होने से वर्ष 2019 से 2026 तक भगौड़ों की कुल ₹17,874 करोड़ की संपत्ति जब्त की। 2019 से 2026 तक ₹18,762 करोड़ की वापसी (Restitution) की गई, इसमें देश छोड़कर भागे आर्थिक अपराधियों का पैसा शामिल है।
CBI ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भगोड़ों को पकड़ने के लिए विशेष ग्लोबल ऑपरेशन्स सेंटर स्थापित किया है। यह केंद्र इंटरपोल के माध्यम से दुनिया भर की पुलिस से रियल-टाइम समन्वय करता है।
इंटरपोल द्वारा रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की संख्या में वृद्धि हुई है। वर्ष 2022 में 40, वर्ष 2023 में 100, वर्ष 2024 में 107, वर्ष 2025 में 112, और 2026 में अब तक 182 रेड कार्नर नोटिस जारी हुए हैं।
भगोड़ों की जियो-लोकेशन ट्रैक करने के लिए ऑपरेशन त्रिशूल चलाया गया। इसके तहत इंटरपोल के सहयोग से छिपे हुए अपराधियों की सैटेलाइट, सर्विलांस, डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर लोकेशन स्थापित की गई। भगोड़ों द्वारा विदेश में नाम या पहचान बदल ली गई थी लेकिन फिर भी तकनीक और प्रोफाइल-मैपिंग के ज़रिये उन्हें खोज निकाला गया।