बृजभूषण शरण सिंह के बयान से बढ़ा विवाद, मुसलमानों और सवर्णों पर टिप्पणी से सियासत गरम

Authored By: News Corridors Desk | 29 Mar 2026, 04:47 PM
news-banner

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद Brij Bhushan Sharan Singh के एक बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। बिहार के बाढ़ विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिए गए उनके बयान को लेकर विभिन्न दलों और सामाजिक समूहों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

यह बयान Ram Navami के अवसर पर आयोजित एक मंच से दिया गया, जहां बृजभूषण शरण सिंह ने अपने संबोधन में समाज और राजनीति से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। इसी दौरान उन्होंने एक विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि “देश में दो ही खलनायक हैं—एक मुस्लिम और दूसरा इस समय सवर्ण।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनकी यह बात लोगों को “अंदर तक चोट पहुंचाएगी।”

अपने बयान में उन्होंने यह भी दावा किया कि मुसलमानों का समर्थन करने के लिए भाजपा को छोड़कर लगभग सभी राजनीतिक दल खड़े हैं, लेकिन सवर्ण समुदाय के साथ कौन खड़ा है, यह सवाल उन्होंने सार्वजनिक रूप से उठाया। इस टिप्पणी को लेकर अब राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है और इसे लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान चुनावी माहौल में सामाजिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा दे सकते हैं। वहीं, विपक्षी दलों ने इस बयान की आलोचना करते हुए इसे समाज को बांटने वाला करार दिया है। कई नेताओं ने कहा कि इस तरह की भाषा लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक सौहार्द के खिलाफ है।

दूसरी ओर, भाजपा की ओर से इस बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि व्यक्तिगत बयान को पार्टी की आधिकारिक लाइन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

यह पहली बार नहीं है जब बृजभूषण शरण सिंह अपने बयानों को लेकर चर्चा में आए हैं। इससे पहले भी वे कई बार अपने स्पष्ट और बेबाक बयानों के कारण सुर्खियों में रह चुके हैं। हालांकि, इस बार उनका बयान ज्यादा संवेदनशील विषय से जुड़ा होने के कारण व्यापक बहस का कारण बन गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में नेताओं को संयमित भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि उनके बयान का असर समाज के विभिन्न वर्गों पर पड़ता है। खासतौर पर जब बात धर्म और जाति जैसे मुद्दों की हो, तो जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।

फिलहाल, इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और भी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।