300 साल पुरानी हवेली बनी गौरैयों का घर, बिजनौर की ‘गौरैया वाली हवेली’ की अनोखी कहानी

Authored By: News Corridors Desk | 21 Mar 2026, 08:00 PM
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उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के स्यौहारा क्षेत्र में स्थित शेखों की यह करीब 300 साल पुरानी हवेली आज एक खास पहचान बना चुकी है। कभी यह हवेली लोगों की रौनक से भरी रहती थी, लेकिन अब यहां इंसानों से ज्यादा परिंदों का बसेरा है। समय के साथ यह जगह ‘गौरैया वाली हवेली’ के नाम से मशहूर हो गई है। यह नाम इसलिए पड़ा क्योंकि यहां हजारों की संख्या में गौरैया पक्षी रहते हैं, जो इसे एक अनोखा प्राकृतिक ठिकाना बनाते हैं।

गौरैयों का सुरक्षित आशियाना

आज के समय में जहां  गौरैया तेजी से कम होती जा रही है और कई जगहों पर लगभग गायब हो चुकी है, वहीं यह हवेली उनके लिए सुरक्षित घर बनी हुई है। यहां करीब ढाई हजार गौरैयों का बसेरा है। हवेली की बनावट, खुले स्थान और शांत माहौल इन पक्षियों के लिए बेहद अनुकूल है। यही कारण है कि गौरैया यहां बड़ी संख्या में रहती हैं और सुरक्षित महसूस करती हैं। यह हवेली पर्यावरण संरक्षण की एक जीवंत मिसाल बन गई है।

विरासत में मिली जिम्मेदारी

इस हवेली के मालिक रहे मरहूम अकबर शेख ने अपने बेटे जमाल शेख को सिर्फ यह पुरानी इमारत ही नहीं सौंपी, बल्कि इसके साथ एक बड़ी जिम्मेदारी भी दी—इन हजारों गौरैयों की देखभाल की। जमाल शेख आज भी अपने पिता की इस विरासत को पूरी ईमानदारी से निभा रहे हैं। वे रोजाना इन पक्षियों के लिए दाना-पानी का इंतजाम करते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो।

परंपरा, लगाव और प्रेरणा

शेख परिवार में पीढ़ियों से जानवरों और पक्षियों के प्रति खास लगाव रहा है। यही कारण है कि आज भी इस परंपरा को पूरी निष्ठा के साथ निभाया जा रहा है। ‘गौरैया वाली हवेली’ सिर्फ एक ऐतिहासिक इमारत नहीं, बल्कि इंसान और प्रकृति के बीच संतुलन का प्रतीक बन चुकी है। यह जगह लोगों को यह संदेश देती है कि अगर थोड़ी सी कोशिश की जाए, तो हम अपने आसपास के जीव-जंतुओं के लिए सुरक्षित वातावरण बना सकते हैं और प्रकृति को बचाने में अहम योगदान दे सकते हैं।