बिहार की राजनीति में चर्चित नाम और मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह को बड़ी राहत मिली है। पटना हाईकोर्ट ने उन्हें दुलारचंद यादव हत्या मामले में जमानत दे दी है। अनंत सिंह इस केस में आरोपी होने के चलते पटना के बेऊर जेल में बंद थे। अब कोर्ट से बेल मिलने के बाद उनके जल्द ही जेल से बाहर आने की संभावना है। जानकारी के मुताबिक, कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद वे शुक्रवार (20 मार्च 2026) या शनिवार (21 मार्च 2026) तक रिहा हो सकते हैं।
दुलारचंद यादव हत्याकांड बिहार की राजनीति में काफी चर्चित रहा है। यह घटना 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान हुई थी, जिसके बाद अनंत सिंह को इस मामले में आरोपी बनाया गया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया था, जहां से उन्होंने चुनाव भी लड़ा। खास बात यह रही कि जेल में रहते हुए ही उन्होंने चुनाव जीतकर मोकामा सीट पर अपनी पकड़ बरकरार रखी। इससे उनके राजनीतिक प्रभाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।
अनंत सिंह के जेल से बाहर आने की खबर से उनके समर्थकों में उत्साह का माहौल है। लंबे समय से उनके समर्थक उनकी रिहाई का इंतजार कर रहे थे। बताया जा रहा है कि जैसे ही वे जेल से बाहर आएंगे, उनके समर्थक उनका जोरदार स्वागत करेंगे। मोकामा और आसपास के क्षेत्रों में उनके समर्थकों की अच्छी-खासी संख्या है, जो उन्हें एक मजबूत नेता के रूप में देखते हैं। ऐसे में उनकी वापसी राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
हाल ही में राज्यसभा चुनाव के दौरान भी अनंत सिंह चर्चा में आए थे। वह जेल से बाहर आकर बिहार विधानसभा पहुंचे थे और मतदान किया था। उस दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने संकेत दिया था कि वह जल्द ही जेल से बाहर आने वाले हैं। पत्रकारों के सवाल पर उन्होंने कहा था कि उनके समर्थक उदास नहीं हैं और वह एक से दो महीने के भीतर बाहर आ जाएंगे। अब हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद उनका यह बयान सच साबित होता नजर आ रहा है।
इस दौरान अनंत सिंह ने एक और बड़ा संकेत दिया था कि भविष्य में उनकी राजनीतिक विरासत उनके परिवार द्वारा संभाली जाएगी। उन्होंने कहा था कि अब उनका “बाल-बच्चा” राजनीति करेगा। इससे यह साफ होता है कि वह अपने परिवार को राजनीति में आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। गौरतलब है कि उनसे पहले उनकी पत्नी नीलम देवी मोकामा से विधायक रह चुकी हैं और परिवार का इस क्षेत्र में मजबूत राजनीतिक आधार है।
कुल मिलाकर, अनंत सिंह को मिली जमानत न केवल उनके लिए व्यक्तिगत राहत है, बल्कि बिहार की राजनीति में भी इसका असर देखने को मिल सकता है। उनकी रिहाई के बाद मोकामा और आसपास के इलाकों में राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जेल से बाहर आने के बाद वह किस तरह अपनी राजनीतिक भूमिका को आगे बढ़ाते हैं और अपने समर्थकों के बीच किस तरह सक्रिय होते हैं।