समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने वाराणसी में गंगा नदी पर इफ्तार पार्टी को लेकर हुई कार्रवाई पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। और उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई निष्पक्ष नहीं थी, बल्कि इसमें भ्रष्टाचार की बू आती है। अखिलेश यादव ने कहा कि जिन लोगों पर कार्रवाई की गई, हो सकता है उन्होंने “पुलिस की हथेली गरम” नहीं की हो, और अगर ऐसा किया होता तो शायद उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाता। उनके इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
उन्होंने इस पूरे मामले को दोहरे मापदंड का उदाहरण बताते हुए कहा कि एक ओर आम लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाती है, जबकि दूसरी ओर बड़े आयोजनों और प्रभावशाली लोगों को छूट मिल जाती है। इसी संदर्भ में उन्होंने वाराणसी में चल रहे क्रूज का भी जिक्र किया। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि उस क्रूज पर दुनिया की महंगी शराब परोसी जाती रही और इसके बावजूद प्रशासन ने कोई सख्त कदम नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि यह दिखाता है कि कानून का पालन हर किसी के लिए समान रूप से नहीं किया जा रहा है।
गंगा नदी की स्वच्छता को लेकर भी अखिलेश यादव ने गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि क्रूज संचालन के दौरान जो गंदगी और कचरा निकलता है, उसे गंगा में ही डाला जा रहा है, जिससे नदी प्रदूषित हो रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब सरकार गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए बड़े-बड़े दावे करती है, तो फिर ऐसे मामलों में लापरवाही क्यों बरती जा रही है। उनके अनुसार, यह केवल दिखावे की राजनीति है और जमीनी स्तर पर हालात अलग हैं।
इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और विभिन्न दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। जहां एक तरफ सत्ताधारी पक्ष इन आरोपों को निराधार बता सकता है, वहीं विपक्ष इसे मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है। गंगा जैसी आस्था और पर्यावरण से जुड़ी नदी पर उठे इन सवालों ने इस पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है। अब देखना होगा कि प्रशासन इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या इस मुद्दे पर कोई ठोस कार्रवाई होती है या नहीं।