‘मटका किंग’ में विजय वर्मा का दमदार अंदाज़, 60s मुंबई की क्राइम दुनिया जीवंत

Date: 2026-04-29
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विजय वर्मा अपनी नई सीरीज ‘मटका किंग’ के जरिए एक बार फिर चर्चा में हैं। यह एक पीरियड क्राइम ड्रामा है, जिसकी कहानी 1960 के दशक के मुंबई पर आधारित है। सीरीज में दिखाया गया है कि कैसे एक साधारण कॉटन मिल मैनेजर बृज भट्टी धीरे-धीरे एक बड़े सट्टेबाजी साम्राज्य की नींव रखता है। यह कहानी मशहूर ‘मटका’ सट्टा खेल से प्रेरित है, जिसे मुंबई में बड़े स्तर पर फैलाने का श्रेय कुछ ऐतिहासिक किरदारों को दिया जाता है। शो में दिखाया गया है कि कैसे बंटवारे के बाद आए व्यापारी और आम लोग नए शहर मुंबई में अपनी जिंदगी और पहचान बनाने की कोशिश करते हैं, लेकिन लालच और पैसा उन्हें अलग रास्तों पर ले जाता है।


 कहानी का विस्तार और मुख्य किरदार
सीरीज में विजय वर्मा बृज भट्टी का किरदार निभा रहे हैं, जो अपनी पत्नी बरखा और भाई लाछू के साथ एक चाल में रहता है। वह एक कॉटन मिल में नौकरी करता है और साथ ही अपने बॉस के साथ सट्टेबाजी के खेल में भी शामिल रहता है। धीरे-धीरे हालात बदलते हैं जब उसका भाई कर्ज और जुए के जाल में फंस जाता है। उसे बचाने के लिए बृज एक बड़ा जोखिम लेता है और नौकरी छोड़कर अपना खुद का सट्टा खेल शुरू करता है, जो ईमानदारी के नियम पर आधारित होता है। लेकिन आगे चलकर यही ईमानदारी और लालच की टकराहट कहानी को जटिल बना देती है। इस शो में सई ताम्हणकर, कृतिका कामरा, सिद्धार्थ जाधव और गुलशन ग्रोवर जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में हैं।


 निर्देशन, प्रदर्शन और समापन राय
इस सीरीज का निर्देशन अभय कोरान्न और नागराज मंजुले ने मिलकर किया है, जिन्होंने 1960 के दशक के मुंबई के माहौल को अच्छे से दिखाने की कोशिश की है। सेट डिजाइन, कॉस्ट्यूम और बैकग्राउंड संगीत कहानी को और प्रभावशाली बनाते हैं। खासकर किशोर कुमार के गाने और टाइटल ट्रैक शो की थीम को मजबूत बनाते हैं। विजय वर्मा ने अपने किरदार में गहराई और विविधता दिखाई है, चाहे वह भावनात्मक दृश्य हों या सख्त नेतृत्व वाले सीन। हालांकि कुछ जगहों पर कहानी की रफ्तार धीमी लगती है और कुछ तकनीकी कमियां भी नजर आती हैं, लेकिन कुल मिलाकर यह सीरीज थ्रिल और ड्रामा का अच्छा मिश्रण है। अगर दर्शकों को क्राइम ड्रामा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वाली कहानियां पसंद हैं, तो यह शो देखने लायक है।

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