योगी ने कहा, आक्रांताओं ने भारत का वैभव ही नहीं, ज्ञान भी लूटा

योगी ने कहा, आक्रांताओं ने भारत का वैभव ही नहीं, ज्ञान भी लूटा
हाइलाइट्स :
• दिग्विजयनाथ-अवेद्यनाथ पुण्यतिथि समारोह का शुभारंभ
• आधुनिक तकनीक से प्राचीन ज्ञान को नई पीढ़ी से जोड़ने का आह्वान

Yogi Adityanath on Invasion: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गोरक्ष पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विदेशी आक्रांताओं ने भारत का वैभव लूटने के साथ उसकी समृद्ध ज्ञान परंपरा और बौद्धिक विरासत को भी नष्ट करने का प्रयास किया। मंदिरों पर हमले इसी व्यापक सोच का हिस्सा थे। अब समय है कि भारत अपनी ज्ञान परंपरा को प्रमाणों के साथ दुनिया के सामने रखे और आधुनिक तकनीक के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाए।

मुख्यमंत्री गुरुवार 24 सितंबर 2026 को श्री गोरखनाथ मंदिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि पर आयोजित सप्त दिवसीय समारोह के व्याख्यान सत्र को संबोधित कर रहे थे।

हमले सिर्फ संपदा लूट के लिए नहीं

योगी ने कहा कि रामायण काल में दंडकारण्य के ऋषि आश्रमों पर हमलों से लेकर विदेशी आक्रमणों तक, भारत की ज्ञान धरोहर को निशाना बनाया गया। सोमनाथ मंदिर पर महमूद गजनवी के हमले का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मंदिरों पर आक्रमण केवल संपदा लूटने तक सीमित नहीं थे, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा को कमजोर करना भी उनका उद्देश्य था।

उन्होंने कहा कि ब्रिटिश काल में तरीका बदल गया। भारतीयों को अपनी भाषा, चिकित्सा पद्धति और परंपरागत ज्ञान को लेकर भ्रमित किया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि समाज धीरे-धीरे अपनी जड़ों और मूल्यों से दूर होता गया।

काशी में प्राचीन पांडुलिपि होंगी डिजिटल

मुख्यमंत्री ने कहा कि तक्षशिला, नालंदा, काशी, उज्जैन, कांची और नवद्वीप भारत के प्राचीन ज्ञान केंद्र रहे हैं। कुंभ जैसे आयोजनों में भी संत और विद्वान शोध, विचार और नवाचार पर चर्चा करते थे।

उन्होंने बताया कि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, काशी में एक लाख से अधिक प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटाइजेशन का काम चल रहा है। अयोध्या, प्रयागराज, मथुरा-वृंदावन और लखनऊ समेत कई स्थानों पर भी पांडुलिपियां, ताम्रपत्र और शिलालेख उपलब्ध हैं।

योगी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने में प्रमाण सबसे महत्वपूर्ण हैं। तकनीक के माध्यम से गलतफहमियों और दुष्प्रचार का तथ्यपूर्ण जवाब देते हुए इस विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना होगा।