अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेट्स की जीत ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। डेमोक्रेट्स ने अमेरिकी कांग्रेस पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। इस नतीजे को ट्रंप प्रशासन के खिलाफ जनता के फैसले के तौर पर देखा जा रहा है। अब सवाल यह है कि अमेरिकी राजनीति में आए इस बदलाव का भारत पर क्या असर पड़ सकता है? व्यापार और टैरिफ से लेकर H-1B वीजा और कच्चे तेल की कीमतों तक कई अहम मुद्दे इससे प्रभावित हो सकते हैं।
ट्रंप के खिलाफ क्यों बढ़ी मतदाताओं की नाराजगी?
चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को कई अहम जगहों पर नुकसान उठाना पड़ा। टेक्सास जैसे राज्य में भी पार्टी की पकड़ कमजोर हुई, जहां करीब चार दशक से डेमोक्रेट्स को बढ़त नहीं मिली थी।
इस हार के पीछे बढ़ती महंगाई, जीवनयापन का खर्च, टैरिफ और ईरान के खिलाफ अमेरिकी युद्ध जैसे मुद्दों को अहम माना जा रहा है। ईरान के साथ संघर्ष के चलते ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी हुई, जिसका असर रिपब्लिकन पार्टी के चुनावी प्रदर्शन पर पड़ा।
राष्ट्रपति ट्रंप की लोकप्रियता भी अपने निचले स्तर के करीब पहुंच गई है। 'एपी वोटर पोल' के मुताबिक, ज्यादातर मतदाता बढ़ती कीमतों के लिए ट्रंप प्रशासन को जिम्मेदार मानते हैं। साथ ही, उनकी इच्छा है कि कांग्रेस राष्ट्रपति के फैसलों पर अधिक अंकुश लगाए।
कांग्रेस पर डेमोक्रेट्स का नियंत्रण भारत के लिए क्यों अहम?
दोनों सदनों पर डेमोक्रेट्स के नियंत्रण से उन्हें कानून बनाने, जांच कराने और फंडिंग से जुड़े मामलों में ज्यादा ताकत मिल गई है। हालांकि, इससे अमेरिकी विदेश नीति पर उनका सीधा नियंत्रण नहीं हो जाएगा।
राष्ट्रपति के पास वीटो समेत व्यापक कार्यकारी अधिकार हैं। ऐसे में कांग्रेस में सत्ता का समीकरण बदलने के बावजूद विदेश नीति से जुड़े फैसलों में राष्ट्रपति की भूमिका अहम बनी रहेगी।
भारत के नजरिए से यह बदलाव महत्वपूर्ण है, क्योंकि अमेरिकी सरकार और कांग्रेस के फैसलों का असर भारतीय निर्यात, अमेरिका में काम कर रहे भारतीय पेशेवरों और दोनों देशों के रक्षा सहयोग पर पड़ सकता है।
व्यापार और टैरिफ नीति पर क्या होगा असर?
अमेरिका भारतीय उत्पादों के लिए एक बड़ा बाजार है। ऐसे में अमेरिकी टैरिफ नीति में होने वाला बदलाव भारत के निर्यातकों को सीधे प्रभावित कर सकता है।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता अभी तक लागू नहीं हो पाया है। हालांकि, विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस महीने की शुरुआत में मीडिया से कहा था कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता अंतिम रूप लेने के करीब है।
अब कांग्रेस में डेमोक्रेट्स की मजबूत स्थिति के बाद व्यापार और टैरिफ से जुड़े फैसलों पर क्या रुख अपनाया जाता है, इस पर नजर रहेगी।
H-1B वीजा और आव्रजन नीति में बदलाव की संभावना
अमेरिकी चुनाव के नतीजे वहां काम कर रहे भारतीय पेशेवरों, खासकर H-1B वीजा धारकों के लिए भी अहम हो सकते हैं। कांग्रेस में बदले राजनीतिक समीकरण का असर भविष्य के आव्रजन कानूनों और उनकी निगरानी की प्रक्रिया पर पड़ सकता है।
रिपब्लिकन पार्टी के समर्थन वाले कुछ प्रस्तावों को रोकने की कोशिश हो सकती है। इनमें पिछले सितंबर में घोषित नए H-1B वीजा आवेदनों पर 100,000 डॉलर की फीस लगाने का फैसला भी शामिल है।
हालांकि, इस राजनीतिक बदलाव के बाद आव्रजन नीति में क्या बदलाव होंगे, यह आने वाले फैसलों पर निर्भर करेगा।
कच्चे तेल की कीमतों में कमी से भारत को मिल सकती है राहत
अमेरिकी चुनाव के नतीजों का एक संभावित असर ईरान के साथ जारी संघर्ष और ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है। रिपब्लिकन पार्टी की कमजोर स्थिति के कारण राष्ट्रपति ट्रंप के लिए ईरान के साथ युद्ध को लंबे समय तक जारी रखना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच टकराव कम होने की संभावना जताई जा रही है।
इससे रक्षा बजट और सैन्य खर्च में कमी आने की उम्मीद है। इसके साथ ही कच्चे तेल और ऊर्जा की कीमतों में भी गिरावट आ सकती है।
भारत अपनी ईंधन जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होने पर देश के आयात बिल में कमी आ सकती है और घरेलू अर्थव्यवस्था को राहत मिल सकती है।
कुल मिलाकर, अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेट्स की बढ़त भारत के लिए व्यापार, वीजा, रक्षा सहयोग और ऊर्जा जैसे कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। हालांकि, इन मुद्दों पर वास्तविक असर अमेरिकी कांग्रेस और ट्रंप प्रशासन के आगामी फैसलों से ही स्पष्ट होगा।