उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि बदलते दौर में शिक्षकों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। उन्हें छात्रों को सच और झूठ में अंतर पता करना, सोशल मीडिया के दुष्प्रचार से बचने का तरीका और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI जैसी नई तकनीकों का जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग भी सिखाना होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया व एआई आज की जरूरत हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल समाज व देशहित में होना चाहिए। भारत विरोधी ताकतें इन्हीं माध्यमों का दुरुपयोग कर समाज में भ्रम, विद्वेष और अव्यवस्था फैलाने का प्रयास कर रही हैं, इसलिए शिक्षण संस्थानों को युवाओं को जागरूक करने के लिए आगे आना होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम लोगों के विद्यार्थी रहते परिवार के सदस्य प्रेरित करते थे कि एक-दो समाचार पत्र नियमित पढ़ो, पाठ्यक्रम की पुस्तकों के साथ-साथ रेफरेंस बुक्स भी देखो। यह भी सिखाया जाता था कि किसी पुस्तक या लेख में व्याकरणीय अशुद्धि के कारण अर्थ का अनर्थ हो सकता है, तो केवल उसी पर विश्वास न करें। लेकिन, आज स्थिति बदल गई है।
योगी ने कहा कि युवाओं का एक बड़ा वर्ग, लगभग 60 प्रतिशत, अपने स्मार्टफोन व यूट्यूब के माध्यम से देश-दुनिया को समझने का प्रयास करता है। स्मार्टफोन पर जो सामग्री समाचार या विचार के रूप में उपलब्ध है, छात्र कई बार उसी को सच मान लेता है। जबकि यह आवश्यक नहीं कि वह सच ही हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट व गुमनाम प्लेटफॉर्म के माध्यम से कोई भी व्यक्ति समाज में भ्रम व विद्वेष फैलाने का प्रयास कर सकता है। सही तथ्यों की जानकारी और आत्म-अनुशासन के अभाव में पूरा समाज अव्यवस्था व अराजकता का शिकार हो सकता है, जिसका दुष्परिणाम वर्तमान और भविष्य दोनों को भुगतना पड़ता है।
मुख्यमंत्री रविवार को आगरा में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों एवं उनके आश्रितों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने वाली 'मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना' के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे।
सीएम ने कहा कि कैशलेस चिकित्सा सुविधा के माध्यम से विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों चाहे वे राजकीय हों, शासकीय सहायता प्राप्त अशासकीय महाविद्यालय हों अथवा स्ववित्तपोषित प्रबंधन के अंतर्गत संचालित विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय हों, सभी को इस योजना के अंतर्गत शामिल किया जा रहा है। इसके साथ ही शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी इस योजना से जोड़ा जा रहा है। प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये की कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने वाली इस योजना से लगभग 10 लाख लोग कवर होंगे।