स्टारलिंक की भारत में एंट्री पर सवाल, राहुल गांधी और एलन मस्क के बीच क्या हुई बात?

स्टारलिंक की भारत में एंट्री पर सवाल, राहुल गांधी और एलन मस्क के बीच क्या हुई बात?
हाइलाइट्स
• स्टारलिंक की भारत में एंट्री में देरी पर एलन मस्क ने उठाए सवाल
• राहुल गांधी और मस्क की बातचीत के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज
• सरकार का दावा—सैटेलाइट इंटरनेट के नियम सभी कंपनियों के लिए समान
• लाइसेंस, स्पेक्ट्रम और सुरक्षा शर्तों पर टिकी स्टारलिंक की लॉन्चिंग

भारत में एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी स्टारलिंक की सेवा शुरू होने का इंतजार जारी है। लॉन्चिंग में देरी को लेकर मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सवाल उठाए और दावा किया कि उनकी कंपनी पिछले पांच साल से भारत सरकार के कानूनों और जरूरी शर्तों का पालन कर रही है। मस्क के इस पोस्ट पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जवाब देते हुए उनका स्वागत किया। इसके बाद दोनों के बीच हुई बातचीत चर्चा का विषय बन गई।

राहुल गांधी ने लिखा, ‘भारत में आपका स्वागत है, एलन. दूसरे शख्स के मिलने तक इंतजार कीजिए.’ इस पर मस्क ने जवाब दिया, ‘धन्यवाद, राहुल. यह वाकई परेशान करने वाला है.’

इस बातचीत के बाद स्टारलिंक की भारत में एंट्री, सरकारी मंजूरी की प्रक्रिया और टेलीकॉम सेक्टर में प्रतिस्पर्धा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, राहुल गांधी के संदेश में दूसरे व्यक्ति का जिक्र किस संदर्भ में था, यह स्पष्ट नहीं किया गया है।

2021 से 2026 तक कैसे आगे बढ़ा स्टारलिंक का मामला?

भारत में स्टारलिंक की लॉन्चिंग का मुद्दा पिछले कुछ वर्षों से अलग-अलग चरणों में चर्चा में रहा है। इसकी समयरेखा इस प्रकार है:

2021: प्री-बुकिंग शुरू, फिर रोकनी पड़ी

स्टारलिंक ने भारत में अपनी सेवाओं के लिए प्री-बुकिंग शुरू की थी। लेकिन जरूरी सरकारी मंजूरी नहीं मिलने के कारण कंपनी को बुकिंग रोकनी पड़ी।

2024: स्पेक्ट्रम आवंटन पर विवाद

सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन का मुद्दा चर्चा में आया। इस दौरान एलन मस्क ने स्पेक्ट्रम की नीलामी का विरोध किया।

2025: लाइसेंस मिलने के बाद भी इंतजार

स्टारलिंक को भारत में लाइसेंस मिला, लेकिन सेवा शुरू नहीं हो सकी। कंपनी को अन्य जरूरी मंजूरियों और शर्तों से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करनी थी।

अक्टूबर 2026: लॉन्चिंग में देरी पर सवाल

मस्क ने सोशल मीडिया पर सेवा शुरू होने में हो रही देरी पर सवाल उठाए। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि नियमों के मामले में किसी कंपनी के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा है।

स्टारलिंक पर राहुल गांधी और एलन मस्क की बातचीत क्यों चर्चा में है?

एलन मस्क की पोस्ट पर राहुल गांधी ने उनका स्वागत किया। इसके जवाब में मस्क ने स्थिति को परेशान करने वाला बताया। दोनों के बीच हुई इस बातचीत के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बहस शुरू हो गई।

मस्क पहले भी आरोप लगा चुके हैं कि भारत में कारोबारी हित स्टारलिंक की एंट्री में बाधा बन रहे हैं। उन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी का नाम भी इस विवाद में लिया। हालांकि, भारत सरकार ने इन आरोपों को बेबुनियाद और गलत धारणा पर आधारित बताया है।

अभिनेता कमल हासन ने भी X पर इस विषय पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कोई अरबपति किसी देश की नीति तय नहीं कर सकता। भारत को लोकतांत्रिक देश बताते हुए उन्होंने कहा कि देश का भविष्य भारतीय जनता ही तय करेगी। मस्क की पोस्ट पर अन्य लोगों ने भी अपनी राय रखी।

स्टारलिंक की मंजूरी पर सरकार का क्या रुख है?

भारत सरकार का कहना है कि सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं के लिए बनाए गए नियम सभी कंपनियों पर समान रूप से लागू होते हैं। सरकार ने इस आरोप को खारिज किया है कि नियामकीय प्रक्रिया का इस्तेमाल किसी कंपनी को रोकने या दूसरी कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।

स्टारलिंक के मामले में लाइसेंस के अलावा सुरक्षा जांच और तकनीकी शर्तें भी अहम हैं। सेवा शुरू करने से पहले सुरक्षा नियंत्रणों की स्वतंत्र जांच और भारतीय गेटवे की व्यवस्था जैसे मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत बताई गई है।

इसके अलावा घरेलू नेटवर्क में डेटा ट्रैफिक की रूटिंग और जरूरत पड़ने पर संदिग्ध टर्मिनल को तुरंत बंद करने की क्षमता भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। साथ ही, ISRO और भारतीय कंपनियों के सैटेलाइट नेटवर्क को बढ़ावा देने पर जोर है, ताकि कनेक्टिविटी बढ़े और रणनीतिक निर्भरता न बढ़े।

चीन में टेस्ला की गाड़ियों पर भी सुरक्षा से जुड़े प्रतिबंधों की रिपोर्ट

भारत में स्टारलिंक की मंजूरी पर सवाल उठा रहे एलन मस्क की कंपनी टेस्ला को लेकर चीन में भी सुरक्षा कारणों से प्रतिबंधों की खबरें सामने आ चुकी हैं।

रिपोर्टों के मुताबिक, जून 2022 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के चेंगदू दौरे के दौरान कुछ सड़कों पर टेस्ला की आवाजाही रोकी गई थी। जुलाई 2023 में वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स के उद्घाटन समारोह के दौरान भी कुछ इलाकों में टेस्ला की एंट्री पर रोक की खबरें आईं। इसके अलावा, 2022 में बेइदैहे इलाके में टेस्ला की गाड़ियों पर करीब दो महीने तक प्रतिबंध लगाए जाने की रिपोर्ट थी।

चीनी सेना ने भी सुरक्षा कारणों से अपने परिसरों में टेस्ला की गाड़ियों के इस्तेमाल पर रोक लगाई थी। आशंका जताई गई थी कि कारों में लगे कैमरे संवेदनशील ठिकानों की तस्वीरें रिकॉर्ड कर सकते हैं और डेटा देश से बाहर जा सकता है।

हालांकि, चीन में टेस्ला की गाड़ियों से जुड़े प्रतिबंधों की परिस्थितियां भारत में स्टारलिंक के लाइसेंस मामले से अलग हैं। फिर भी यह उदाहरण दिखाता है कि देश अपनी सुरक्षा संबंधी चिंताओं के आधार पर तकनीकी कंपनियों पर नियम लागू कर सकते हैं।

रिलायंस इंडस्ट्रीज के आर्थिक योगदान का भी जिक्र

स्टारलिंक विवाद में रिलायंस इंडस्ट्रीज के कारोबारी योगदान का भी हवाला दिया जा रहा है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी ने पिछले छह सालों में सरकारी खजाने में 10 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का योगदान किया।

वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी का भुगतान करीब 2.10 लाख करोड़ रुपए रहा। इसी अवधि में कारोबार में दोबारा निवेश 1.40 लाख करोड़ रुपए और सामाजिक योगदान 2,156 करोड़ रुपए बताया गया। कंपनी की वर्कफोर्स चार लाख से ज्यादा बताई गई है, जबकि 2024-25 में उसका निर्यात 2.78 लाख करोड़ रुपए रहा।

अमेरिका में रिलायंस की 6.7 अरब डॉलर की प्रस्तावित रिफाइनरी परियोजना का भी जिक्र हो रहा है। हालांकि, किसी कंपनी का आर्थिक योगदान अपने आप में दूसरी कंपनी की लाइसेंस प्रक्रिया का जवाब नहीं है। स्टारलिंक को मंजूरी देने का फैसला सुरक्षा, लाइसेंस और स्पेक्ट्रम से जुड़े नियमों के आधार पर होना है।

स्टारलिंक की भारत में लॉन्चिंग कब होगी?

स्टारलिंक की भारत में एंट्री को लेकर बहस के बीच मुख्य सवाल यही है कि कंपनी की सेवाएं कब शुरू होंगी। एलन मस्क ने मंजूरी में देरी पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार का रुख है कि सैटेलाइट कम्युनिकेशन से जुड़े नियम सभी कंपनियों पर समान रूप से लागू होते हैं।

आगे सेवा शुरू होने की प्रक्रिया सुरक्षा जांच, लाइसेंस और तकनीकी शर्तों से जुड़ी आवश्यकताओं पर निर्भर करेगी। फिलहाल यह देखना बाकी है कि स्टारलिंक सभी जरूरी शर्तें पूरी कर भारत में अपनी सेवाएं कब शुरू कर पाती है।