हाइलाइट
• SIR के बाद छूटे मतदाताओं के लिए विशेष अभियान
• 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चलेगा अभियान
• पात्र मतदाता Form-6 के जरिए नाम जुड़वा सकेंगे
• पूर्व CEC एसवाई कुरैशी ने Form-6 पर उठाए सवाल
EC Drive and SIR Form-6 Controversy: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण SIR को लेकर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने छूटे हुए पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने के लिए विशेष अभियान चलाने का फैसला किया है। SIR पूरा कर चुके 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह अभियान तत्काल शुरू किया जाएगा। आयोग ने संबंधित मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, जिला निर्वाचन अधिकारियोंc और निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों को इसके निर्देश दिए हैं।
फॉर्म-6 के माध्यम से आवेदन
आयोग के अनुसार, SIR के दौरान या उसके बाद जिन पात्र मतदाताओं के नाम सूची से छूट गए हैं, वे मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म-6 के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे। अभियान में युवा और पहली बार मतदान के पात्र नागरिकों को भी शामिल किया जाएगा। यह प्रक्रिया मतदाता सूची के निरंतर अद्यतन के तहत होगी।
आयोग ने अधिकारियों को एसआईआर से पहले और बाद की मतदाता सूचियों का मिलान करने के निर्देश दिए हैं। इसके आधार पर ऐसे मतदाताओं की पहचान की जाएगी, जिनके नाम पहले सूची में थे, लेकिन बाद की सूची में नहीं हैं। जरूरत पड़ने पर बूथ स्तर के अधिकारी घर-घर जाकर पात्र मतदाताओं से फॉर्म-6 भरवाएंगे। एसआईआर के दौरान फॉर्म-6 में जोड़ी गई अतिरिक्त घोषणा इस विशेष अभियान में लागू नहीं होगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर पूरी हो चुके राज्यों में सामान्य वैधानिक फॉर्म-6 के जरिए नाम जोड़ने की प्रक्रिया जारी रहेगी।
आयोग ने कहा है कि किसी पात्र नागरिक का नाम छूट जाने की स्थिति में उसे मतदाता सूची में शामिल कराने का अवसर उपलब्ध कराया जाएगा। गोवा में पहले ही बूथ स्तर के अधिकारियों को छूटे मतदाताओं के घर जाकर आवेदन लेने के निर्देश दिए जा चुके हैं। आयोग के मुताबिक वहां 97 मामलों में से 81 मतदाताओं ने फॉर्म-6 भर दिया है।
एसवाई कुरैशी की आपत्ति
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने आयोग के ड्राइव को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर कहा कि Form 6 किसी हटाए गए मतदाता द्वारा नहीं भरा जा सकता। यह केवल नए मतदाताओं के लिए है। जिन सभी लोगों को इसे भरने के लिए मजबूर किया गया है, उन्होंने ऐसा आपराधिक कृत्य किया है, जिसमें एक साल तक की जेल की सजा हो सकती है। जिन निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर किया, वे भी अपराध में उकसाने के दोषी हैं। यह प्रेस नोट निर्वाचन आयोग द्वारा अपराध में उकसावे को दर्शाता है।