मनुस्मृति का आया हवाला, राज्यसभा में हुआ हंगामा

मनुस्मृति का आया हवाला, राज्यसभा में हुआ हंगामा

HIGHLIGHT

मल्लिकार्जुन खरगे ने मनुस्मृति से उद्धरण दिया 

उद्धरण को लेकर राज्यसभा में हंगामा हुआ

जेपी नड्डा ने टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति की

सभापति ने खरगे की टिप्पणी रिकॉर्ड से हटाई

राज्यसभा में लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के मनुस्मृति का हवाला देने पर ज़ोरदार हंगामा हुआ।

सदन में खरगे विधेयक पर अपनी बात रख रहे थे। इस क्रम में उन्होंने कहा,” मैं संस्कृत में ठीक नहीं बोल सकता इसलिए उसका अनुवाद बता रहा हैं।” इसके बाद उन्होंने अपने बात पर बल देने के लिए मनुस्मृति को उद्धृत किया।

खरगे के उद्धरण देते ही उच्च सदन के नेता जेपी नड्डा अपने स्थान पर खड़े हुए और उन्होंने विपक्ष के नेता के कथन को समाज में अशांति फैलाने वाला बताया। इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि खरगे जिस पुस्तक का हवाला दे रहे हैं उसे प्रमाणित authenticate करें।

नड्डा ने खरगे के कथन को सदन की कार्वाई से हटाने की माँग की। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर उनके पक्ष से सुधांशु त्रिवेदी बात कहेंगे। इस दौरान दोनों पक्षों की तरफ़ से शोर शराबा होता रहा।

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कलकत्ता हाईकोर्ट के एक पूर्व जज विलियम जोंस के साथ ही बाबासाहब डॉक्टर आंबेडकर की किताब को कोट किया और कई किताबों का संदर्भ दिया और कहा कि इसीलिए कह रहा हूं कि ये ऑथेंटिकेट करें।

विपक्ष की तरफ़ से काँग्रेस के प्रमोद तिवारी ने एक प्रकाशन का हवाला दिया गया। उन्होंने एक किताब दिखाते हुए कहा कि यह किताब इनके कार्यकाल में छपी है, चल रही है, प्रतिबंधित नहीं है। अगर ये कह रहे हैं, दिखा रहे हैं, तो गलती इनकी है। 12 साल से इनकी सरकार है।

लेकिन नड्डा ने कहा कि वह मूल मनुस्मृति का प्रमाण चाहते हैं जो ब्रिटिश काल से पहले की हो।

सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि खरगे की मनुस्मृति पर की गई टिप्पणियां रिकॉर्ड से हटा दी जाएंगी।

खरगे के भाषण के दौरान कई बार ऐसे मौके आये जब सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव हुआ।

शोर शराबे और हंगामे की वजह से खरगे अपने निर्धारित समय से ज्यादा समय तक बोलते रहे। अपनी बात समाप्त करते हुए उन्होंने सरकार के समक्ष चार मांगे रखीं

  1. देश में एक Fixed Annual Exam Calendar होना चाहिए। छात्रों को हर साल अनिश्चितता और देरी का सामना नहीं करना चाहिए।

  2. इस पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक हाई-पावर्ड कमेटी से स्वतंत्र जाँच कराई जाए, ताकि सच सामने आए और जवाबदेही तय हो।

  3. PSUs और Government-aided Institutions में जितनी भी vacancies हैं, उन्हें समयबद्ध तरीके से भरा जाए।

  4. छात्रों के साथ बर्बरता की जिम्मेदारी गृह मंत्री को लेनी चाहिए।