सावन आते ही हर तरफ 'हर-हर महादेव' और बोल बम की गूंज क्यों सुनाई देने लगती है? आखिर ऐसा क्या है इस महीने में कि खुद भगवान शिव इसे अपना सबसे प्रिय मास मानते हैं?
विद्वानों और शास्त्रों के अनुसार सावन महीने में भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसकी शुरूआत देवशयनी एकादशी से होती है और फिर वह देवोत्थान एकादशी को योगनिद्रा त्यागते हैं। विष्णु के योगनिद्रा में होने का यह समय भक्तों, साधु-संतों सभी के लिए महत्वपूर्ण होता है। यह चार महीनों में होने वाला एक वैदिक यज्ञ है, जो एक प्रकार का पौराणिक व्रत है, जिसे 'चौमासा' या चातुर्मास भी कहा जाता है। भगवान विष्णु के योग निद्रा में होने की वजह से सृष्टि के संचालन का उत्तरदायित्व भगवान शिव ग्रहण करते हैं। इसलिए सावन के प्रधान देवता भगवान शिव बन जाते हैं।
यह भी कहा जाता है कि सावन सिर्फ एक महीना नहीं बल्कि शिव और शक्ति के मिलन का पवित्र प्रतीक है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता सती ने अपने अगले जन्म में पार्वती के रूप में सावन महीने में कठोर तप किया था। उनकी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी स्वीकार किया। तभी से सावन शिव-पार्वती के प्रेम, तप और समर्पण का महीना माना जाता है।
एक और मान्यता इससे भी गहरी है। पौराणिक कथाओं में वर्णन आता है कि इसी सावन मास में समुद्र मंथन किया गया था। समुद्र मथने के बाद जो हलाहल विष निकला, उसे भगवान शंकर ने कंठ में समाहित कर सृष्टि की रक्षा की; लेकिन विषपान से महादेव का कंठ नीलवर्ण हो गया। इसी से उनका नाम 'नीलकंठ महादेव' पड़ा। विष के प्रभाव को कम करने के लिए सभी देवी-देवताओं ने उन्हें जल अर्पित किया।कहा जाता है कि सावन की वर्षा भी उस विष की तपिश को शीतलता प्रदान करती है, इसलिए यह महीना शिव को अत्यंत प्रिय है। यही वजह है कि श्रावण मास में भोले को जल चढ़ाने से विशेष फल की प्राप्ति का विधान बताया गया है।
एक अन्य कथा के अनुसार मरकंडू ऋषि के पुत्र मार्कण्डेय ने लंबी आयु के लिए सावन माह में ही घोर तप कर शिव की कृपा प्राप्त की थी, जिससे मिली मंत्र शक्तियों के सामने मृत्यु के देवता यमराज भी नतमस्तक हो गए थे।
भगवान शिव को सावन का महीना प्रिय होने का अन्य कारण यह भी कहा जाता है कि भगवान शिव सावन के महीने में पृथ्वी पर अवतरित होकर अपनी ससुराल गए थे और वहां उनका स्वागत अर्घ्य और जलाभिषेक से किया गया था। माना जाता है कि प्रत्येक वर्ष सावन माह में भगवान शिव अपनी ससुराल आते हैं। भू-लोक वासियों के लिए शिव कृपा पाने का यह उत्तम समय होता है।