लोकसभा में पास, अब राज्यसभा की बारी

लोकसभा में पास, अब राज्यसभा की बारी

विपक्ष के वाक आउट के बीच संसद के निचले सदन में लोक परीक्षा संशोधन विधेयक को मंगलवार को ध्वनिमत से पारित कर दिया।

विधेयक पर दो दिन चली चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने कहा कि यव विधेयक परीक्षाओं में पारदर्शिता और अपराधियो को जल्द एवं कठोर सजा दिलाने में मदद करेगा।

सिंह ने छात्र आंदोलनकारियो पर गोली चलाने के विपक्ष के नेता राहुल गांधी के आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा कि कहीं गोली नहीं चलाई गई, आंसू गैस के गोले दागे गये थे।

विधेयक पर वोटिंग के वक्त विपक्ष के सांसदो ने वाकआउट किया जिसके बाद अध्यक्ष ने इसे सत्ता पक्ष के सांसदो की मौजूदगी में ध्वनिमत से पारित करा दिया।

लोकसभा से पारित इस विधेयक को अब राज्यसभा में पारित किया जायेगा। सरकार ने इसे विचार के लिए उच्च सदन में रख भी दिया है। दोनों सदनों से विधेयक पास होने और उसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी से क़ानून का स्वरूप लेगा।

विधेयक की ख़ासियत

त्वरित जांच

विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतें

वरित सुनवाई

विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति

अपीलों का समयबद्ध निपटान

अधिक कठोर दंड प्रावधान

अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने पर नया प्रावधान

सज़ा बढ़ाने का प्रस्ताव

जेल की सज़ा दस वर्ष तक

जुर्माना 10 से बढ़ाकर 50 लाख रुपए

इस अधिनियम के तहत अपराधों में शामिल पाए जाने वाले सेवा प्रदाताओं के लिए, विधेयक में अधिकतम जुर्माना 1 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए करने और उन्‍हें कोई भी लोक परीक्षा आयोजित करने से प्रतिबंधित करने की अवधि को चार वर्ष से बढ़ाकर आठ वर्ष करने का प्रस्ताव है।

इस विधेयक में सेवा प्रदाताओं के प्रबंधकीय कर्मियों के लिए कड़ी सज़ा का भी प्रस्ताव है। इसमें कम से कम पांच वर्ष और अधिक से अधिक दस वर्ष तक की जेल की सज़ा और अधिकतम जुर्माना 1 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए करने का प्रावधान है।

परीक्षा से जुड़े संगठित अपराध पर नया प्रावधान

न्यूनतम जेल पांच वर्ष से बढ़ाकर सात वर्ष

दस वर्ष तक बढ़ायी जा सकती है जेल की सजा

अधिकतम जुर्माना 1 से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपए

यह विधेयक केंद्र सरकार को यह अधिकार भी देता है कि वह इस अधिनियम के तहत अपराधों की जांच का कार्य, इस उद्देश्य के लिए गठित विशेष कार्य बल को सौंप सकता है।

त्‍वरित जांच और सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए, विधेयक में एक नई धारा 12क जोड़ी गई है। इसमें दो माह के भीतर जांच पूरी करने, इस अधिनियम के तहत अपराधों की दैनिक सुनवाई के लिए सत्र न्‍यायालय को विशेष फास्ट ट्रैक अदालत के तौर पर नामित करने, आरोप पत्र दाखिल होने की तारीख से तीन माह के अंदर सुनवाई पूरी करने और प्रत्येक विशेष फास्ट ट्रैक अदालत के लिए विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति का प्रावधान है।

इस विधेयक में एक नई धारा 12 भी है कि विशेष फास्ट ट्रैक अदालत के किसी निर्णय, आदेश या सजा के खिलाफ अपील तीस दिनों की अवधि के भीतर उच्च न्यायालय के समक्ष की जा सकती है और जहां संभव हो, तीन माह के भीतर उसका निपटान किया जाना चाहिए।