पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच नई दिल्ली में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के शीर्ष नेताओं की मुलाकात हुई। BRICS सम्मेलन से अलग ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नहयान आमने-सामने आए और बातचीत की। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ महीनों से चल रहे तनाव को देखते हुए इस हाई लेवल बैठक को अहम कूटनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।
नई दिल्ली में हुई इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से हाथ मिलाया और साथ बैठकर बातचीत की। भारत में मौजूद ईरानी दूतावास ने भी इस मुलाकात की पुष्टि की और इसे क्षेत्रीय शांति के लिए अहम बताया।
BRICS सम्मेलन से अलग हुई अहम मुलाकात
नई दिल्ली में हुई यह बैठक केवल औपचारिक मुलाकात तक सीमित नहीं रही। पश्चिम एशिया में तनाव और युद्ध के माहौल के बीच ईरान और UAE के शीर्ष नेताओं का एक मंच पर आना महत्वपूर्ण संकेत के तौर पर सामने आया।
पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच मिसाइल हमलों और तीखे बयानों को लेकर तनाव देखने को मिला था। ऐसे माहौल के बावजूद दोनों नेताओं की दिल्ली में मुलाकात से यह संकेत मिला कि दोनों देश टकराव के बजाय कूटनीतिक बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहते हैं।
मिसाइल हमलों के बीच बातचीत का रास्ता खुला
ईरान और UAE के बीच पिछले कुछ महीनों में तनाव काफी बढ़ा था। पश्चिम एशिया में बढ़ते बवाल के दौरान ईरान की तरफ से UAE के क्षेत्रों को निशाना बनाकर कई बार मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए थे।
UAE ने इन हमलों की लगातार कड़ी निंदा की और इसे अपनी संप्रभुता का सीधा उल्लंघन बताया था। इस साल मार्च में UAE अधिकारियों ने कहा था कि देश डिफेंसिव स्थिति में है, लेकिन वह किसी बड़े युद्ध में नहीं घसीटा जाना चाहता।
इसके बाद मई में UAE का रुख और सख्त हुआ। UAE ने कहा था कि ऐसी हरकतों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ईरान को इसके गंभीर नतीजे भुगतने होंगे।
इन सबके बीच नई दिल्ली में दोनों नेताओं का आमने-सामने बैठना यह दिखाता है कि बातचीत की गुंजाइश अभी बनी हुई है।
BRICS मंच से पेजेश्कियन का बयान
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने BRICS के मंच से अमेरिका और पश्चिमी देशों पर भी निशाना साधा। उन्होंने BRICS सदस्य देशों से अमेरिकी प्रतिबंधों और दबाव के खिलाफ एक साथ खड़े होने की अपील की।
पेजेश्कियन ने कहा कि BRICS को दुनिया में न्याय की आवाज बनना चाहिए। उन्होंने नागरिक बुनियादी ढांचे और शांतिपूर्ण परमाणु ठिकानों पर होने वाले हमलों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे संवेदनशील ठिकानों पर हमला अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है। उन्होंने फिलिस्तीन के मुद्दे को भी पूरी दुनिया की साख के लिए एक बड़ी परीक्षा बताया और कहा कि फिलिस्तीनी लोगों के हक और अधिकारों का साथ देना BRICS देशों का नैतिक फर्ज है।
‘नई दिल्ली डिक्लेरेशन 2026’ में शांति की अपील
BRICS सम्मेलन के अंत में सभी सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से ‘नई दिल्ली डिक्लेरेशन 2026’ को अपनाया। साझा घोषणापत्र में पश्चिम एशिया में तेजी से बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई गई।
डिक्लेरेशन में सभी पक्षों से तुरंत अधिकतम संयम बरतने की अपील की गई। इसमें आम नागरिकों और नागरिक सुविधाओं की सुरक्षा पर जोर दिया गया। साथ ही सभी देशों की राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान को जरूरी बताया गया।
BRICS नेताओं ने यह संदेश दिया कि टिकाऊ शांति बातचीत और कूटनीति के रास्ते ही हासिल की जा सकती है।
दिल्ली की बैठक से भारत की कूटनीति पर नजर
भारत की मेजबानी में हुई ईरान और UAE के शीर्ष नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है। दोनों देशों के नेताओं का नई दिल्ली में आमने-सामने बैठना भारत के मंच पर हुई एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटना के तौर पर सामने आया।
भारत के सभी ग्लोबल पावर्स और मिडिल ईस्ट के देशों के साथ अच्छे और भरोसेमंद रिश्ते होने की बात इस संदर्भ में अहम है। दिल्ली में हुई इस बैठक ने यह तस्वीर सामने रखी कि तनाव के बावजूद विरोधी पक्ष बातचीत के लिए एक मंच पर आ सकते हैं।