नीदरलैंड और बेल्जियम में अगले महीने शुरू होने वाले हॉकी वर्ल्ड कप में भारतीय हॉकी टीम अपनी मौजूदा नीली जर्सी की बजाय केसरिया जर्सी में खेलती दिखाई देगी।
टीम की जर्सी का कलर बदले जाने पर सवाल भी उठाये जा रहे हैं। राजनीतिज्ञों के साथ कुछ खिलाड़ियों ने भी इस पर आपत्ति जताई है।
ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने इस बदलाव पर एक लंबा ट्वीट पोस्ट किया है जिसकी मुख्य बात यह है
मुझे यह जानकर बहुत दुख हुआ है कि भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का मशहूर रंग बदलकर केसरिया कर दिया गया है। भारतीय हॉकी टीम के नीले रंग का खास शेड सिर्फ़ एक रंग नहीं है, बल्कि यह देश की खेल विरासत से जुड़ी एक भावना है।
हॉकी टीम के पूर्व कप्तान विरेन रास्किन्हा ने भी आपत्ति जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा
मुझे कहना होगा कि हॉकी इंडिया ने भारतीय हॉकी के लिए बहुत अच्छे काम किए हैं। लेकिन यह शर्मनाक है। भारतीय टीम की पहचान और विरासत हमेशा से 'नीला' रंग रही है। मैंने कई सालों तक गर्व के साथ नीली जर्सी पहनी है। फैंस हमारी भारतीय टीम को नीले रंग में देखना चाहते हैं। नारंगी रंग का क्या लॉजिक है?
हाकी इंडिया ने टीम की नई जर्सी का वीडियो सोमवार 27 जुलाई 2026 को जारी करते हुए कहा
पेश है भारत की नई जर्सी!
हर सिलाई एक कहानी कहती है। हर पैटर्न और हर रंग में भारत का गौरव झलकता है।
हमारी टीमें FIH हॉकी वर्ल्ड कप बेल्जियम और नीदरलैंड्स 2026 में एक बार फिर देश का मान बढ़ाने के लिए तैयार हैं।
हालांकि कुछ विशेषज्ञ रंग में बदलाव की वजह तकनीकी बता रहे हैं। उनके मुताबिक़ नीले रंग की प्लेइंग यूनिफॉर्म, नीली सिंथेटिक सतह के साथ घुल-मिल जाती है जो अब इंटरनेशनल हॉकी मैचों में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली पिचों का स्टैंडर्ड रंग है। इस एक जैसे दिखने की वजह से खिलाड़ियों को मैदान पर साफ-साफ देखने में दिक्कत होती थी।
हालांकि भारतीय हॉकी में जर्सी का रंग बदलना कोई नई बात नहीं है। 2014 FIH हॉकी वर्ल्ड कप के दौरान टीम की जर्सी का रंग पीला कर दिया गया था और 2018 FIH हॉकी वर्ल्ड कप के दौरान रंग बदलकर आसमानी नीला कर दिया गया था।