Dhanteras 2026: झाड़ू भी बनती है धन की चाबी, जानिए धनतेरस पर क्यों करते हैं इसकी खरीदारी?

Dhanteras 2026: झाड़ू भी बनती है धन की चाबी, जानिए धनतेरस पर क्यों करते हैं इसकी खरीदारी?
हाइलाइट्स
• धनतेरस पर 2 झाड़ू खरीदने की क्या है मान्यता?
• एक घर के लिए, दूसरी मंदिर में दान!
• झाड़ू खरीदने से जुड़ी है मां लक्ष्मी की मान्यता

धनतेरस पर खरीदारी को शुभ माना जाता है। इस दिन लोग अपनी श्रद्धा और बजट के अनुसार सोना-चांदी, बर्तन, वाहन और दूसरी चीजें खरीदते हैं। लेकिन इन खरीदारी के बीच झाड़ू का भी खास धार्मिक महत्व बताया जाता है। मान्यता है कि धनतेरस पर दो झाड़ू खरीदना शुभ होता है। इनमें से एक घर में इस्तेमाल के लिए रखी जाती है, जबकि दूसरी मंदिर में दान करने की परंपरा है।

देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुदगल ने इस परंपरा के पीछे की धार्मिक मान्यताओं के बारे में बताया है। आइए जानते हैं कि धनतेरस पर झाड़ू खरीदने और मंदिर में दान करने को किस नजरिए से देखा जाता है।

धनतेरस पर झाड़ू खरीदना क्यों माना जाता है शुभ?

धनतेरस कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, धन के देवता कुबेर और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस अवसर पर खरीदारी करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।

झाड़ू का संबंध घर की साफ-सफाई से है। यह घर की गंदगी दूर करने के काम आती है, इसलिए इसे स्वच्छता और अच्छे वातावरण का प्रतीक माना जाता है। इसी मान्यता के चलते धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदने की परंपरा भी प्रचलित है।

झाड़ू का मां लक्ष्मी से क्या संबंध है?

देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुदगल ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि धनतेरस पर झाड़ू खरीदना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि मां लक्ष्मी का वास साफ-सुथरे घर में होता है। इसलिए घर को स्वच्छ और व्यवस्थित रखना जरूरी समझा जाता है।

इसके विपरीत, घर में गंदगी और अव्यवस्था को नकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इससे परिवार में अशांति और कलह का माहौल बन सकता है।

पंडित नंद किशोर मुदगल के अनुसार, धार्मिक मान्यताओं में मां लक्ष्मी की बड़ी बहन ज्येष्ठा को दरिद्रता और अशुभता से जोड़ा जाता है। ऐसी मान्यता है कि गंदगी वाली जगह पर ज्येष्ठा का प्रभाव रहता है, जिससे घर में परेशानियां और आपसी विवाद बढ़ सकते हैं। इसी वजह से झाड़ू को मां लक्ष्मी से जोड़कर देखा जाता है।

हालांकि, ये धार्मिक मान्यताएं हैं। इनके जरिए घर में साफ-सफाई और सकारात्मक माहौल बनाए रखने का संदेश भी दिया जाता है।

धनतेरस पर दो झाड़ू खरीदने की क्या है परंपरा?

ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुदगल के मुताबिक, धनतेरस पर संभव हो तो दो झाड़ू खरीदी जा सकती हैं। इनमें से एक झाड़ू अपने घर के लिए रखी जाती है और दूसरी किसी मंदिर में दान करने की परंपरा बताई जाती है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, मंदिर में झाड़ू दान करना शुभ माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है और परिवार में समृद्धि आती है। कुछ लोग इस परंपरा का पालन बिना किसी दिखावे के करते हैं।

इस तरह धनतेरस पर झाड़ू खरीदने और मंदिर में दान करने की परंपरा को स्वच्छता, सुख-समृद्धि और धार्मिक आस्था से जोड़कर देखा जाता है।