NEET परीक्षा पेपर लीक को लेकर देश के विभिन्न राज्यों में दर्ज मुकदमों के लेकर फैला भ्रम धीरे धीरे साफ़ हो गया है क्योंकि अलग अलग राज्यों की सरकारों ने आंदोलनकारियों पर एक्शन वापस लेने का ठोस भरोसा दिया है।
दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी CJP के आंदोलन खत्म करने की शर्तों में एक शर्त यह भी थी कि आंदोलनकारियों के ख़िलाफ़ दर्ज FIR वापस ली जाएगी। केंद्र सरकार ने यह माँग स्वीकार कर ली थी।
आंदोलन खत्म होने के बाद बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और राजस्थान जैसे कुछ राज्यों से खबरें आने लगीं कि पुलिस मामले को वापस लेने की बजाय उसे बढ़ा रही है।
ऐसी खबरों के बीच CJP के नेताओं में बेचैनी बढ़ने लगी और वो सोशल मीडिया में वादाखिलाफी के आरोप लगाने वाले वीडियो और बयान पोस्ट करने लगे।
CJP ने तो सोमवार को वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल को साथ लेकर एक प्रेस कांफ्रेंस भी इस मुद्दे पर की। हालांकि बाद में CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास Saurav Das ने पोस्ट किया-
हमारी प्रेस कॉन्फ्रेंस के कुछ घंटों बाद, सरकार के प्रतिनिधियों ने हमसे मुलाक़ात की। यह बैठक 2-3 घंटे तक चली। उन्होंने हमें बिहार और असम के उन नोटिफ़िकेशन की कॉपी दीं, जिनमें FIR वापस लेने, भविष्य में कोई कार्रवाई न करने और हिरासत में लिए गए या गिरफ़्तार किए गए सभी लोगों को रिहा करने की गारंटी दी गई है।उन्होंने केंद्र सरकार और BJP/NDA शासित अन्य राज्यों की ओर से भी कल तक गारंटी-नोटिफ़िकेशन जारी करने के अपने वादे को दोहराया।
इसबीच मंगलवार को देश की शीर्ष अदालत ने भी छात्र आंदोलन के दौरान गिरफ्तार या हिरासत में लिये गये बिना आपराधिक इतिहास वाले छात्रों को रिहा करने का निर्देश जारी किया। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, असम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और केरल सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने सभी CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का भी आदेश दिया है।
बिहार में विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव Tejaswi Yadav ने तो इस मामले को लेकर 29 जुलाई से राज्य में बड़ा आंदोलन शुरू करने की घोषणा कर दी थी। उन्होंने सोमवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था-
प्रदर्शनकारी छात्रों के केस वापसी लेने का आज रात्रि 12 बजे तक का अल्टीमेटम है अन्यथा 29 जुलाई को सुबह 7 बजे से आंदोलन शुरू।
हालांकि बाद में बिहार सरकार ने 26 जुलाई को शाम 6:00 बजे से पहले बिहार में कहीं भी हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ कोई दंडात्मक या जवाबी कानूनी कार्रवाई नहीं करने की आधिकारिक तौर पर घोषणा कर दी।
CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका Ashutosh Ranka ने बाद में सोशल मीडिया पर लिखा-
बिहार और बंगाल में FIR वापस ले ली गई हैं। लेकिन राजस्थान में हमारे वॉलंटियर्स (मुकेश, लक्ष्य और कई अन्य) को परेशान किया जा रहा है।
हम मांग करते हैं कि केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ तालमेल बिठाए और हमारे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस ले। हम कल तक केंद्र सरकार से लिखित समझौते का भी इंतज़ार कर रहे हैं।