जनगणना की तारीखों का एलान, 95 साल बाद होगी जाति की गिनती

जनगणना की तारीखों का एलान, 95 साल बाद होगी जाति की गिनती
  • 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक होगी आबादी की गणना
  • 10 से 24 जनवरी तक ऑनलाइन स्व-गणना का विकल्प
  • एक से पांच मार्च तक दर्ज आंकड़ों का पुनरीक्षण
  • 1931 के बाद पहली बार सभी जातियों की होगी गणना
  • यूपी, पंजाब, गोवा और उत्तराखंड के लिए अलग कार्यक्रम

Census 2027 Dates in India: देश में लंबे समय से प्रतीक्षित जनगणना 2027 को लेकर केंद्र सरकार ने आबादी की गणना का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। गृह मंत्रालय के तहत भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण की ओर से 30 अक्टूबर को जारी अधिसूचना के मुताबिक, देश के अधिकांश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक जनगणना की जाएगी। इसके बाद एक से पांच मार्च तक दर्ज आंकड़ों का पुनरीक्षण किया जाएगा। इस बार की जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक होगी, क्योंकि इसमें सभी जातियों की गणना भी की जाएगी। 1931 के बाद पहली बार व्यापक स्तर पर जातिवार आंकड़े जुटाए जाएंगे। आजादी के बाद यह पहली जनगणना होगी, जिसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा अन्य जातियों की भी गणना होगी।

सरकार ने चुनाव वाले राज्यों और बर्फबारी प्रभावित क्षेत्रों के लिए अलग कार्यक्रम निर्धारित किया है। उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा और उत्तराखंड के गैर-बर्फबारी वाले क्षेत्रों को 25 जनवरी से 28 फरवरी वाले कार्यक्रम से अलग रखा गया है। इन चार राज्यों और क्षेत्रों के लिए सितंबर में ही अलग समय-सारिणी अधिसूचित की जा चुकी है। वहीं मणिपुर को फिलहाल नई अधिसूचना के दायरे से बाहर रखा गया है। वहां के लिए अगली घोषणा के बाद कार्यक्रम तय होगा। लद्दाख और जम्मू-कश्मीर तथा हिमाचल प्रदेश के बर्फबारी प्रभावित गैर-समकालिक क्षेत्रों में भी अलग समय-सारिणी लागू होगी।

तीन चरणों में पूरी होगी आबादी की गणना

अधिसूचना के अनुसार, जनगणना के दूसरे चरण यानी जनसंख्या गणना की प्रक्रिया तीन हिस्सों में पूरी होगी। पहले हिस्से में लोगों को खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज करने का विकल्प दिया जाएगा। इसके लिए 10 जनवरी से 24 जनवरी 2027 तक स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध रहेगी। इसके बाद 25 जनवरी से 28 फरवरी तक जनगणना कर्मचारी घर-घर जाकर लोगों की जानकारी दर्ज करेंगे। इस दौरान परिवार के सदस्यों की संख्या, उम्र, सामाजिक और अन्य निर्धारित जानकारियों को एकत्र किया जाएगा। तीसरे और अंतिम हिस्से में एक से पांच मार्च तक दर्ज आंकड़ों का पुनरीक्षण किया जाएगा। इस दौरान जानकारी की दोबारा जांच और जरूरी सुधार किए जाएंगे।

चुनाव वाले राज्यों के लिए पहले ही तय हो चुका है कार्यक्रम

उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा और उत्तराखंड के गैर-बर्फबारी वाले क्षेत्रों के लिए पांच सितंबर को जारी अधिसूचना में अलग कार्यक्रम घोषित किया गया था। इन राज्यों में 16 से 30 नवंबर 2026 तक स्व-गणना का विकल्प दिया गया है। इसके बाद एक दिसंबर 2026 से चार जनवरी 2027 तक घर-घर जाकर आबादी की गणना होगी। पांच से नौ जनवरी तक पुनरीक्षण का काम किया जाएगा। इन क्षेत्रों के लिए जनगणना की संदर्भ तिथि पांच जनवरी 2027 निर्धारित की गई है। इस तरह चुनावी राज्यों में जनगणना का काम देश के बाकी हिस्सों से पहले पूरा करने की व्यवस्था की गई है।

1931 के बाद पहली बार होगी जातिवार गणना

जनगणना 2027 की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता जातिवार गणना है। देश में 1931 के बाद व्यापक जातिगत आंकड़े जनगणना के नियमित स्वरूप में एकत्र नहीं किए गए। हालांकि, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की गणना नियमित रूप से होती रही है। वर्ष 2011 में सामाजिक-आर्थिक एवं जाति जनगणना (SECC) भी कराई गई थी, लेकिन उसके जातिगत आंकड़े नियमित जनगणना के आंकड़ों की तरह जारी नहीं किए गए थे।

जातिगत गणना को आगामी जनगणना में शामिल करने का फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 30 अप्रैल 2025 को लिया था। इसके तहत सभी समुदायों की जातियों से संबंधित जानकारी जनगणना के दूसरे चरण में जुटाई जाएगी। इससे देश की सामाजिक संरचना और विभिन्न जातियों की आबादी से जुड़े आंकड़े सामने आने का रास्ता खुलेगा।

2011 के बाद पहली बार होगी जनगणना

भारत में पिछली जनगणना वर्ष 2011 में हुई थी। इसके बाद वर्ष 2021 में प्रस्तावित जनगणना कोरोना महामारी के कारण स्थगित कर दी गई थी। अब करीब 16 साल के अंतराल के बाद देश में आबादी की नई गणना होने जा रही है। जनगणना से प्राप्त आंकड़े सरकार की योजनाओं, विकास कार्यक्रमों, संसाधनों के वितरण और नीतिगत फैसलों के लिए महत्वपूर्ण आधार उपलब्ध कराएंगे। इस बार डिजिटल माध्यमों और ऑनलाइन स्व-गणना की सुविधा से प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने की तैयारी है।