सोनिया की अंतरराष्ट्रीय पब्लिशर से छपी किताब क्या पढ़ पाएंगे भारत के लोग?

सोनिया की अंतरराष्ट्रीय पब्लिशर से छपी किताब क्या पढ़ पाएंगे भारत के लोग?

काँग्रेस नेता सोनिया गांधी की प्रस्तावित किताब को लेकर प्रकाशन कंपनी पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने एक बयान जारी कर उनकी पुस्तक के प्रकाशन से इनकार किया है।

पहले कहा जा रहा था कि पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया सोनिया की आत्मकथा  या यूं कहें उनका संस्मरण 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' का प्रकाशन करने जा रही है जो 10 नवंबर 2026 को जारी की जाएगी।

प्रकाशन कंपनी ने कहा है कि उसने पुस्तक में ख़ास तौर पर समकालीन राजनीति से संबंधित कुछ अंशों में बदलाव के लिए सोनिया गांधी से आग्रह किया था लेकिन उन्होने कोई परिवर्तन करने से इनकार कर दिया।

हालांकि काँग्रेस नेता की इस पुस्तक का अंतरराष्ट्रीय नॉफ़ संस्करण 10 नवंबर को बिना किसी बदलाव के 100,000 प्रतियों के साथ प्रकाशित होगा।यह पुस्तक 544 पृष्ठों की संस्मरण बताई जा रही है।

पेंगुइन ने स्पष्ट किया कि तथ्य-जांच और संपादन उनकी मानक प्रक्रिया है और उसने अपने निर्णय को किसी दबाव में लिए जाने से इनकार किया है।

ऐसे में सवाल ये है कि अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह पुस्तक प्रकाशित होती है और तय तारीख़ पर जारी हो जाती है तो क्या भारत के लोगों को यह किताब पढ़ने को मिलेगी। इसका उत्तर यह है कि अगर पुस्तक पर प्रतिबंध नहीं लगता है तो इसे आयात किया जा सकता है लेकिन उसकी क़ीमत ज्यादा पड़ेगी।

काँग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘पेंगुइन वर्ल्डवाइड, श्रीमती सोनिया गांधी जी की आने वाली किताब को दुनिया भर में उसके मूल रूप में प्रकाशित करने के लिए तैयार है, लेकिन पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया इसे भारत में लॉन्च करने के लिए इसमें बदलाव चाहता है। आखिर क्या वजह या दबाव है कि जो किताब दुनिया भर में प्रकाशित हो रही है, उसे भारत में प्रकाशित नहीं किया जा सकता?’

X पर किए पोस्ट में उन्होंने दावा किया, ‘असली मुद्दा यह है कि पेंगुइन इंडिया पर मोदी, RSS और मोदी के शासनकाल में चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र पर कब्ज़े से जुड़े हिस्सों को हटाने का दबाव डाला गया। यह लोकतंत्र की हत्या है।