Ayush Malik Conversion: शामली के चर्चित आयुष मलिक धर्मांतरण मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान आयुष मलिक ने खुद अदालत के सामने अपना पक्ष रखा। मामले में उसकी कथित हिरासत को लेकर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की गई थी। सुनवाई के दौरान आयुष ने कहा कि उसने बिना किसी दबाव, भय या जबरदस्ती के अपनी इच्छा से धर्मांतरण किया है। उसने चांदनी कुरैशी से निकाह को भी अपनी मर्जी से हुआ बताया।
आयुष के बयान के बाद हाईकोर्ट ने उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता को ध्यान में रखते हुए उसे अपनी इच्छा के अनुसार जीवन जीने की अनुमति दी। अदालत ने उसे अपनी मर्जी से कहीं भी रहने और अपनी पसंद का धर्म चुनने की स्वतंत्रता भी दी।
पिता की शिकायत से शुरू हुआ था मामला
आयुष मलिक से जुड़ा मामला उसके पिता देवराज मलिक की शिकायत के बाद सामने आया था। 6 जून को शामली शहर कोतवाली में दर्ज FIR में आरोप लगाया गया था कि जिम ट्रेनर चांदनी कुरैशी ने आयुष को प्रेम जाल में फंसाकर उसका धर्मांतरण कराया।
शिकायत में धर्मांतरण के पीछे संपत्ति हड़पने के उद्देश्य का भी आरोप लगाया गया था। पुलिस ने शिकायत के आधार पर चांदनी कुरैशी, उसके पिता इस्लाम कुरैशी और तीन मौलवियों समेत कुल आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।
FIR दर्ज होने के अगले दिन पुलिस ने चांदनी कुरैशी और उसके पिता इस्लाम कुरैशी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसके बाद 24 जुलाई को कैराना की जिला अदालत से दोनों को जमानत मिल गई।
बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के बाद हाईकोर्ट पहुंचा मामला
मामले में आगे नया मोड़ तब आया, जब आयुष मलिक के दोस्त सुल्तान कारी की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की गई।
याचिका में दावा किया गया था कि आयुष को उसके पिता देवराज मलिक ने अवैध रूप से हिरासत में रखा है। साथ ही यह आरोप लगाया गया था कि जिला प्रशासन की मदद से उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रभावित की जा रही है।
इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 9 सितंबर के आदेश में आयुष मलिक और उसके पिता देवराज मलिक को अदालत के सामने पेश करने का निर्देश दिया। आदेश के अनुपालन में आयुष को कोर्ट में पेश किया गया।
कोर्ट में आयुष ने धर्मांतरण और निकाह पर क्या कहा?
अदालत के सामने आयुष मलिक ने अपने बयान में कहा कि उसने अपनी इच्छा से धर्मांतरण किया है। उसने स्पष्ट किया कि इस दौरान उस पर किसी तरह का दबाव, भय या जबरदस्ती नहीं थी।
आयुष ने चांदनी कुरैशी से अपने निकाह को लेकर भी अदालत के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उसने कहा कि निकाह भी उसकी अपनी मर्जी से हुआ है।
आयुष के इस बयान के बाद अदालत ने उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता को ध्यान में रखते हुए उसे अपनी इच्छा के अनुसार जीवन जीने की अनुमति दी। कोर्ट ने उसे अपनी मर्जी से कहीं भी रहने और अपनी पसंद का धर्म चुनने की स्वतंत्रता भी दी।
इस तरह मामले में एक तरफ उसके पिता की शिकायत में जबरन धर्मांतरण और संपत्ति हड़पने जैसे आरोप लगाए गए थे, जबकि अदालत के सामने आयुष ने धर्मांतरण और निकाह को अपनी इच्छा से किया गया बताया।
फिलहाल हाईकोर्ट में आयुष ने अपनी स्वतंत्र इच्छा को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है और अदालत ने उसे अपनी पसंद के अनुसार जीवन जीने की अनुमति दी है।