- 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में संयुक्त घोषणा-पत्र अंगीकृत
- सीमा पार आतंकवाद और उसके वित्तपोषण की निंदा
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार का समर्थन
- ओम बिरला ने 2027 की ब्रिक्स अध्यक्षता चीन को सौंपी
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12th BRICS Parliamentary Forumभारत: भारत की अध्यक्षता में आयोजित 12वां ब्रिक्स संसदीय मंच संयुक्त घोषणा-पत्र अंगीकृत करने के साथ संपन्न हो गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने समापन सत्र में कहा कि वैश्विक चुनौतियों का स्थायी समाधान संघर्ष में नहीं, बल्कि संवाद, शांति और सहयोग में निहित है। मंच के घोषणा-पत्र में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों, राष्ट्रीय संप्रभुता, परस्पर सम्मान और अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के प्रति सदस्य देशों की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश
संयुक्त घोषणा-पत्र में सीमा पार आतंकवाद, आतंकवाद के वित्तपोषण और आतंकवादियों को सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने की निंदा की गई। इसमें आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने और इस मुद्दे पर दोहरे मानदंड समाप्त करने की मांग की गई। घोषणा-पत्र के पैराग्राफ 40 में आतंकवाद से जुड़े इन मुद्दों का उल्लेख किया गया है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार का समर्थन
घोषणा-पत्र में वैश्विक शासन व्यवस्था में ग्लोबल साउथ की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों का समर्थन किया गया। नई दिल्ली घोषणा के पैराग्राफ 13 में इसका उल्लेख है। इसका उद्देश्य वैश्विक निर्णय लेने की प्रक्रिया में विकासशील देशों की आकांक्षाओं और हितों को उचित प्रतिनिधित्व देना है।
डिजिटल तकनीक और नैतिक एआई पर जोर
ब्रिक्स संसदीय मंच में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के विस्तार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के नैतिक इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया। घोषणा-पत्र में जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुद्दों पर समान लेकिन पृथक उत्तरदायित्वों और संबंधित क्षमताओं (CBDR-RC) के सिद्धांत के पालन का समर्थन किया गया। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से समर्थन भी जताया।
संसदें संवाद और जनविश्वास का केंद्र
समापन भाषण में ओम बिरला ने कहा कि अलग-अलग परिस्थितियों और चुनौतियों के बावजूद ब्रिक्स देशों की साझा प्रतिबद्धता मानवता के कल्याण, शांति और समृद्धि में निहित है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक अस्थिरता, आर्थिक अनिश्चितता और क्षेत्रीय संघर्षों के बीच संवाद और सहयोग की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है।
बिरला ने संसदों को केवल कानून बनाने वाली संस्थाएं मानने के बजाय संवाद, आम सहमति, जवाबदेही और जनविश्वास के केंद्र के रूप में विकसित करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक और एआई संसदीय कामकाज को अधिक प्रभावी बना सकते हैं, लेकिन इनके इस्तेमाल में मानवीय मूल्य, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।
2027 की अध्यक्षता चीन को सौंपी
12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के समापन पर ओम बिरला ने वर्ष 2027 के लिए ब्रिक्स की अध्यक्षता चीन को सौंपते हुए उसे बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास जताया कि चीन के नेतृत्व में सदस्य देशों के बीच सहयोग आगे बढ़ेगा। मंच का समापन विश्व की संसदों से शांति, सहयोग और साझा समृद्धि के लिए मिलकर काम करने के आह्वान के साथ हुआ।