ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने राष्ट्रपति चुनाव में वापसी करते हुए चौथी बार जीत दर्ज की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को उन्हें बधाई दी और भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने की इच्छा जताई। इस चुनावी नतीजे को दोनों देशों के बीच व्यापार, महत्वपूर्ण खनिजों और अन्य क्षेत्रों में सहयोग के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
ब्राजील के सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट (टीएसई) के अनुसार, दूसरे चरण की मतगणना पूरी होने पर लूला को 51.8 प्रतिशत वैध वोट मिले, जबकि दक्षिणपंथी सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो को 48.2 प्रतिशत वोट हासिल हुए। दोनों उम्मीदवारों के बीच करीब 44 लाख मतों का अंतर रहा।
पहले चरण में पीछे रहने के बाद लूला की वापसी
चार अक्टूबर को हुए पहले चरण के चुनाव में लूला को 45.16 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि फ्लावियो बोल्सोनारो 47.03 प्रतिशत मतों के साथ उनसे आगे थे। उस समय दोनों के बीच करीब 22 लाख वोटों का अंतर था। इसके बावजूद लूला ने दूसरे चरण में जीत हासिल की।
करीब चार दशक पहले प्रत्यक्ष चुनाव बहाल होने के बाद यह पहला मौका है, जब पहले चरण में दूसरे स्थान पर रहने वाला उम्मीदवार राष्ट्रपति चुनाव जीतने में सफल रहा है। लूला ब्राजील के पहले ऐसे राष्ट्रपति भी होंगे, जो चार कार्यकाल पूरे करेंगे।
फ्लावियो बोल्सोनारो जेल में बंद पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो के सबसे बड़े बेटे हैं। पहले चरण में उनकी बढ़त ने चुनावी सर्वेक्षणों के अनुमानों को भी गलत साबित किया था। दूसरे चरण से पहले कई सर्वेक्षणों में दोनों उम्मीदवारों के बीच कड़े मुकाबले की संभावना जताई गई थी।
रविवार रात शुरुआती मतगणना में फ्लावियो आगे चल रहे थे, लेकिन उत्तर-पूर्वी ब्राजील के नतीजे आने के बाद लूला ने बढ़त बना ली। यह क्षेत्र लंबे समय से उनका मजबूत जनाधार रहा है।
पहले चरण में मतदान करीब 78.9 प्रतिशत रहा था, जो दूसरे चरण में बढ़कर लगभग 80.8 प्रतिशत हो गया। एटलसइंटेल के प्रमुख आंद्रेई रोमन के मुताबिक, मतदान से दूर रहने वाले लोगों की संख्या में कमी से लूला को फायदा मिला हो सकता है।
पीएम मोदी ने भारत-ब्राजील साझेदारी मजबूत करने की बात कही
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लूला को बधाई देते हुए लिखा, "मेरे प्रिय मित्र, राष्ट्रपति लूला को उनकी शानदार चुनावी जीत पर हार्दिक बधाई। मैं भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने तथा इसका विस्तार करने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने को उत्सुक हूं।"
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भारत और ब्राजील विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करते रहेंगे। दोनों देश ग्लोबल साउथ की साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के साथ अधिक समावेशी, समानतापूर्ण और टिकाऊ दुनिया बनाने की दिशा में काम करेंगे।
लूला की जीत ऐसे समय में हुई है, जब भारत और ब्राजील के संबंधों में इस साल तेजी आई है। ब्राजील, पश्चिमी गोलार्ध में ब्रिक्स के प्रमुख समर्थकों में शामिल है और भारत ने 2026 में इस समूह की अध्यक्षता संभाली है। ऐसे में दोनों देशों के बीच सहयोग जारी रहने की उम्मीद है।
भारत के लिए क्यों अहम है लूला की जीत?
भारत और ब्राजील ने इस साल आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को विस्तार देने पर जोर दिया है। फरवरी में लूला भारत की राजकीय यात्रा पर आए थे और उन्होंने एआई इम्पैक्ट समिट में भी हिस्सा लिया था। 21 फरवरी को हैदराबाद हाउस में लूला और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बातचीत हुई थी।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, लूला की फरवरी यात्रा के दौरान सहयोग के दस प्रमुख नतीजे सामने आए थे। इनमें महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ मृदा तत्वों से जुड़ा समझौता, डिजिटल तकनीक, इस्पात आपूर्ति शृंखला के लिए खनन, स्वास्थ्य नियमन, छोटे कारोबार और डाक क्षेत्र में सहयोग शामिल थे।
पीएम मोदी ने कहा था कि दोनों देश अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब डॉलर से काफी आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। लूला ने इस लक्ष्य को 30 अरब डॉलर तक बढ़ाने की बात कही थी। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, दोनों नेताओं ने 2030 तक व्यापार को कम से कम दोगुना करके 30 अरब डॉलर तक पहुंचाने पर सहमति जताई थी।
भारत-ब्राजील व्यापार 15 अरब डॉलर के पार
भारत और ब्राजील के बीच व्यापार में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2025 में दोनों देशों का व्यापार 15 अरब डॉलर से अधिक रहा, जो पिछले साल की तुलना में करीब 25 प्रतिशत ज्यादा था। इससे ब्राजील के निर्यात के लिए भारत उसका दसवां सबसे बड़ा बाजार बन गया।
वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और ब्राजील के बीच व्यापार 15.07 अरब डॉलर रहा।
महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग की संभावना
महत्वपूर्ण खनिज और दुर्लभ मृदा तत्व दोनों देशों की साझेदारी का अहम हिस्सा हैं। ब्राजील के पास दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा दुर्लभ मृदा भंडार है, लेकिन 2025 में वैश्विक खनन उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी एक प्रतिशत से भी कम थी।
भारत चीन से होने वाली आपूर्ति के विकल्प तलाश रहा है। ऐसे में दुर्लभ मृदा तत्वों को लेकर ब्राजील की नीतियां भारत के लिए महत्वपूर्ण हैं। इस क्षेत्र में अमेरिका की भी दिलचस्पी है।
कमजोर संसदीय समर्थन और आर्थिक चुनौतियां लूला के सामने
चौथे कार्यकाल में लूला को संसद में कमजोर समर्थन का सामना करना पड़ सकता है। चार अक्टूबर को हुए चुनाव में फ्लावियो बोल्सोनारो की लिबरल पार्टी (पीएल) ने 513 सदस्यीय चैंबर ऑफ डेप्युटीज में 121 सीटें जीतीं। वर्ष 2022 में पार्टी के पास 99 सीटें थीं। निर्वाचन न्यायालय के आंकड़ों के मुताबिक, पीएल संसद का सबसे बड़ा दल बन गया है।
दक्षिणपंथी दलों के पास करीब 276 सीटें हैं, हालांकि संविधान में संशोधन के लिए जरूरी 308 सीटों से यह संख्या कम है। ऐसे में सेंट्राओ के नाम से पहचाने जाने वाले मध्य-दक्षिणपंथी दलों का समूह महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ये दल अक्सर सरकारी पदों और बजट में हिस्सेदारी के बदले समर्थन देते हैं।
लूला सरकार के सामने शुरुआती चुनौतियों में 2027 का बजट भी शामिल होगा। इसमें सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 0.5 प्रतिशत के बराबर प्राथमिक बजट अधिशेष का लक्ष्य रखा गया है।
केंद्रीय बैंक के 19 अक्टूबर को जारी साप्ताहिक फोकस सर्वेक्षण में 2026 की महंगाई दर 5.22 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। यह 4.5 प्रतिशत की निर्धारित ऊपरी सीमा से अधिक है। सर्वेक्षण में साल के अंत तक सेलिक बेंचमार्क ब्याज दर 13.25 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई गई थी।
द रियो टाइम्स के लैटिन अमेरिका पावर इंडेक्स के अनुसार, ब्राजील का सार्वजनिक कर्ज जीडीपी के करीब 93 प्रतिशत के बराबर है। इसके अलावा, कमजोर संसदीय स्थिति, अर्थव्यवस्था की चुनौतियां और अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव भी लूला के सामने मुश्किलें पैदा कर सकते हैं।