ट्रंप ने रूसी तेल पर 100% अतिरिक्त टैरिफ टाला, भारत को कितनी राहत?

ट्रंप ने रूसी तेल पर 100% अतिरिक्त टैरिफ टाला, भारत को कितनी राहत?
हाइलाइट्स
• रूसी तेल पर 100% टैरिफ टला, भारत को राहत
• ट्रंप ने कानून अनिश्चितकाल के लिए रोका
• GTRI एक्सपर्ट ने बताई अमेरिकी नीति की अनिश्चितता

रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने की अमेरिकी योजना फिलहाल टल गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने संबंधित कानून को अनिश्चितकाल के लिए रोकने का फैसला किया है। इससे भारत के लिए रूस से कच्चा तेल खरीदने का रास्ता फिलहाल साफ हुआ है और भारतीय रिफाइनरियों को राहत मिलने की उम्मीद है।

ट्रंप ने यह फैसला अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रूबियो की भारत यात्रा से कुछ घंटे पहले लिया। हालांकि, अमेरिका ने भविष्य में इस कानून के तहत कार्रवाई करने का अधिकार अपने पास रखा है। ऐसे में मौजूदा राहत को स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता।

भारत-अमेरिका संबंधों पर क्या पड़ सकता है असर?

इस कानून को एसआरआईए के नाम से जाना जाता है और यह 18 सितंबर को लागू हुआ था। हालांकि, हाल ही में अमेरिका और रूस के बीच रूसी डीजल की खरीद को लेकर हुए समझौते के बाद अन्य देशों पर दंड लगाने के फैसले को लेकर मुश्किलें सामने आईं।

ट्रंप के कदम से भारत और अमेरिका के बीच व्यापार तथा ऊर्जा सहयोग पर चल रही बातचीत को आगे बढ़ाने में आसानी हो सकती है। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक 20 अक्टूबर को निर्धारित है। इसमें द्विपक्षीय संबंधों के अलावा क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा होनी है। क्वाड समिट को लेकर भी दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है।

इसके अलावा, दिसंबर में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की भी चर्चा है। इन घटनाक्रमों के बीच अमेरिकी टैरिफ पर फिलहाल रोक को भारत-अमेरिका संबंधों के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है।

भारत ने अमेरिकी कानून का किया था विरोध

पिछले महीने अमेरिकी कांग्रेस में संबंधित विधेयक पारित होने पर भारत ने कड़ा विरोध जताया था। भारत का कहना था कि इस तरह के फैसले से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध प्रभावित होने का खतरा है।

भारत लगातार यह भी स्पष्ट करता रहा है कि ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े फैसले किसी बाहरी दबाव के आधार पर नहीं, बल्कि देश और जनता के हितों को ध्यान में रखकर किए जाते हैं।

फिलहाल भारत रूस के साथ-साथ अमेरिका से भी बड़ी मात्रा में पेट्रोलियम उत्पाद खरीद रहा है। 20 अक्टूबर को मुंबई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और मार्को रूबियो की बैठक में ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठने की उम्मीद है।

पिछले कुछ महीनों में रूसी तेल पर भारत की निर्भरता को लेकर अमेरिकी दबाव बना था। ऐसे में टैरिफ संबंधी कानून को टालने से भारतीय रिफाइनरियों को फिलहाल राहत मिली है, लेकिन आगे की स्थिति अमेरिकी नीति पर निर्भर करेगी।

GTRI के अजय श्रीवास्तव ने क्या कहा?

अंतरराष्ट्रीय कारोबार पर शोध करने वाली एजेंसी GTRI के अजय श्रीवास्तव ने अमेरिकी फैसले को राहत देने वाला कदम बताया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यह छूट अमेरिकी व्यापार नीति में मौजूद अनिश्चितता को सामने लाती है। उनके मुताबिक, वॉशिंगटन पहले दंड की चेतावनी देता है, लेकिन जब उसे लागू करना मुश्किल होने लगता है तो पीछे हट जाता है।

श्रीवास्तव के अनुसार, एसआरआईए 18 सितंबर को कानून बना था। इसके बाद 9 अक्टूबर को अमेरिका और रूस के बीच रूसी डीजल खरीद का समझौता हुआ, जिससे दूसरे खरीदारों पर दंड लगाने को उचित ठहराना मुश्किल हो गया। उन्होंने यह भी कहा कि चीन को पहले से ही 10 जनवरी तक अमेरिकी टैरिफ बढ़ोतरी से सुरक्षा मिली हुई थी।

उनके मुताबिक, इससे संकेत मिलता है कि अमेरिकी हितों के आधार पर दंड लागू करने के फैसले बदल सकते हैं। जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता भी किसी देश को सुरक्षा हासिल करने में मदद कर सकती है।

रूस से भारत के तेल आयात में आई कमी

अजय श्रीवास्तव ने कहा कि भारत के लिए टैरिफ से मिली छूट सही समय पर आई है, लेकिन इससे स्थायी निश्चितता नहीं मिलती। उन्होंने बताया कि जुलाई में भारतीय तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत थी, जो अगस्त में घटकर 44 प्रतिशत रह गई।

उनके अनुसार, भारत ने ज्यादा कीमत होने के बावजूद अमेरिका और यूएई से अधिक तेल खरीदा। इसके बावजूद एसआरआईए कानून अब भी बना हुआ है।

श्रीवास्तव ने कहा, “भारत के लिए यह छूट समय सही है लेकिन इससे स्थायी निश्चितता नहीं मिलती। जुलाई में भारतीय तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत थी, जो अगस्त में घटकर 44 प्रतिशत रह गई। भारत ने ज्यादा कीमत होने के बावजूद अमेरिका से और यूएई से ज्यादा तेल खरीदा। फिर भी एसआरआईए कानून बना हुआ है। भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा की रक्षा करनी चाहिए, व्यावसायिक शर्तों पर तेल खरीदना चाहिए और अमेरिकी दबाव के फिर से बढ़ने के लिए तैयार रहना चाहिए।”