नौ स्वरूपों के दर्शन
11 अक्टूबर- प्रतिपदा—शैलपुत्री 12 अक्टूबर-द्वितीया—ब्रह्मचारिणी 13 अक्टूबर-तृतीया—चंद्रघंटा 14 अक्टूबर-चतुर्थी—कूष्मांडा 15 अक्टूबर-पंचमी—स्कंदमाता 16 अक्टूबर-षष्ठी—कात्यायनी 17 अक्टूबर-सप्तमी—कालरात्रि 18 अक्टूबर-अष्टमी—महागौरी 19 अक्टूबर-नवमी—सिद्धिदात्री 20 अक्टूबर-विजयादशमी
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Navratra 2026: महाशक्ति मां जगदम्बा की उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर 2026 से शुरू होकर 19 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। पौराणिक मान्यता के अनुसार देवताओं की प्रार्थना पर मां भगवती ने शुंभ-निशुंभ और महिषासुर जैसे असुरों के संहार का वरदान दिया था। इसी आधार पर आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नौ दिनों तक देवी आराधना की परंपरा चली आ रही है।
कलश स्थापना मुहुर्त
इस बार आश्विन शुक्ल प्रतिपदा पर चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग दोनों होने के कारण प्रात:काल कलश स्थापना का मुहूर्त नहीं रहेगा। अभिजित मुहूर्त में सुबह 10:51 से दोपहर 01:09 बजे तक कलश स्थापना और ध्वजारोहण किया जा सकेगा। नवरात्र के पहले दिन साधक तैलाभ्यंग स्नान के बाद संकल्प लेकर गणपति पूजन, पुण्यवाचन, नांदी श्राद्ध और मातृका पूजन करेंगे। इसके बाद मां दुर्गा का पंचोपचार अथवा षोडशोपचार पूजन किया जाएगा।
इस बार अष्टमी तिथि की वृद्धि है। अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को भोर में पांच बजकर 54 मिनट पर लग रही है जो 19 अक्टूबर को प्रात: छह बजकर 53 मिनट रहेगी। शास्त्रों में तिथि वृद्धि का अर्थ होता है कि कोई भी तिथि सूर्योदय से पूर्व प्रारम्भ हो तथा अगले दिन सूर्योदय के पश्चात तक रहे।
महानवमी पूजन एवं व्रत पारण
19 अक्टूबर को सुबह 06:53 मिनट के बाद महानवमी लगेगी, जो 20 अक्टूबर को प्रात: 09:34 मिनट तक रहेगी। नवमी में होम, चंडी पूजन और बलिदान किया जाएगा। नवरात्र व्रत का पारण 20 अक्टूबर को प्रात: किया जाना चाहिए। इसी दिन सुबह 09:34 के बाद दशमी लगेगी। अपराह्न में विजयादशमी मनाई जाएगी और शाम को दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन होगा। नवरात्र में 17 अक्टूबर को रात्रि 11:36 से 18 अक्टूबर की रात्रि 12:36 बजे तक महानिशा पूजन का मुहूर्त रहेगा। इस बार माता का आगमन हाथी पर और गमन भैंसा पर होगा। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार हाथी पर आगमन सुवृष्टि और सुख-समृद्धि की वृद्धि का संकेत है, जबकि भैंसा पर गमन विपत्ति, रोग और शोक का सूचक माना गया है।