NEET PG में बड़ा बदलाव संभव, पर्सेंटाइल की जगह लागू हो सकती है रैंक आधारित मेरिट व्यवस्था

NEET PG में बड़ा बदलाव संभव, पर्सेंटाइल की जगह लागू हो सकती है रैंक आधारित मेरिट व्यवस्था
हाइलाइट्स
• NEET PG में पर्सेंटाइल की जगह रैंक आधारित सिस्टम का प्रस्ताव
• NMC ने NEET PG और NEET SS के लिए दी सैद्धांतिक मंजूरी
• खाली मेडिकल सीटें भरने के लिए समिति ने सुझाए 5 उपाय

NEET PG की प्रवेश प्रक्रिया में आने वाले समय में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मेडिकल की पीजी सीटों पर दाखिले के लिए अब पर्सेंटाइल आधारित पात्रता की जगह रैंक आधारित मेरिट सिस्टम लागू करने का प्रस्ताव सामने आया है। प्रवेश व्यवस्था की समीक्षा के लिए बनाई गई 12 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिपोर्ट पेश की है। इसमें बताया गया है कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने NEET PG और सुपर स्पेशियलिटी प्रवेश परीक्षा (NEET SS) के लिए इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।

इस बदलाव को लेकर जल्द मसौदा नियम जारी किए जाने की उम्मीद है। इसके बाद संबंधित पक्षों से सुझाव और राय मांगी जाएगी। समिति ने दाखिला प्रक्रिया में सुधार के साथ मेडिकल शिक्षा के न्यूनतम गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने पर भी जोर दिया है।

NEET PG में पर्सेंटाइल सिस्टम बदलने की जरूरत क्यों पड़ी?

NEET PG 2025 की पात्रता के लिए निर्धारित कटऑफ पर्सेंटाइल में भारी कमी किए जाने के बाद यह मामला चर्चा में आया था। खाली पीजी मेडिकल सीटों को भरने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने क्वालिफाइंग स्कोर में बड़ी कटौती की थी।

इस फैसले के तहत सामान्य वर्ग का क्वालिफाइंग स्कोर 276 से घटाकर 103 कर दिया गया था। वहीं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए यह स्कोर 235 से घटाकर -40 कर दिया गया था।

कटऑफ में इतनी बड़ी कमी पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई थी। न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने कहा था कि पात्रता पर्सेंटाइल में इस तरह की कटौती से मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती दिखाई देती है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि भले ही यह सरकार का नीतिगत फैसला हो, लेकिन इसकी जांच की जाएगी। इसके बाद केंद्र सरकार को मौजूदा नीट दाखिला व्यवस्था का व्यापक ऑडिट करने, उसकी खामियों की पहचान करने और व्यावहारिक समाधान सुझाने का निर्देश दिया गया था।

मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेषज्ञ समिति की चिंता

केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में समिति ने कहा कि खाली सीटों की संख्या को देखते हुए सक्षम अधिकारियों ने पात्रता पर्सेंटाइल में कमी की है। हालांकि, पीजी मेडिकल शिक्षा के न्यूनतम मानकों से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

समिति के मुताबिक, प्रतियोगी परीक्षाओं के महत्व को केवल प्रशासनिक औपचारिकता के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। दाखिला प्रक्रिया में सुधार करते समय योग्य उम्मीदवारों के चयन और शिक्षा की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना जरूरी है।

खाली पीजी मेडिकल सीटें भरने के लिए समिति के 5 सुझाव

पीजी मेडिकल पाठ्यक्रमों में बड़ी संख्या में सीटें खाली रहने की समस्या को दूर करने के लिए विशेषज्ञ समिति ने कई उपाय सुझाए हैं।

1. गैर-क्लिनिकल पाठ्यक्रमों की फीस कम हो

समिति ने राज्य की फीस निर्धारण समितियों और संबंधित अधिकारियों से क्लिनिकल और गैर-क्लिनिकल विषयों के लिए अलग-अलग फीस तय करने पर विचार करने को कहा है। गैर-क्लिनिकल पाठ्यक्रमों की फीस कम रखने का सुझाव दिया गया है, ताकि अधिक उम्मीदवार इन विषयों में दाखिला लेने के लिए प्रोत्साहित हों।

2. कुछ विषयों में सेवा बंधन से छूट

प्री-क्लिनिकल और पैरा-क्लिनिकल विषयों में दाखिला लेने वाले उम्मीदवारों को सेवा बंधन से छूट देने की सिफारिश की गई है। समिति का सुझाव है कि इससे इन विषयों की खाली सीटों की समस्या कम हो सकती है।

3. काउंसलिंग के अतिरिक्त चरण

खाली सीटों को भरने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद काउंसलिंग के अतिरिक्त चरण आयोजित किए जा रहे हैं। हालांकि, समिति ने ध्यान दिलाया है कि इससे पूरी काउंसलिंग प्रक्रिया में अधिक समय लग सकता है।

4. सीट रोकने वाले उम्मीदवारों की पहचान

समिति ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और आयुर्विज्ञान में राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (NBEMS) को पहचान सत्यापन और बायोमेट्रिक जांच की व्यवस्था पर विचार करने का सुझाव दिया है।

इसका मकसद उन उम्मीदवारों को रोकना है, जो दाखिला लेने के बजाय सिर्फ सीट रोकने के इरादे से प्रवेश परीक्षाओं में शामिल होते हैं।

5. डेंटल और नर्सिंग की खाली सीटों पर भी ध्यान

डेंटल और नर्सिंग के स्नातकों के लिए रोजगार के अधिक अवसर तैयार करने का सुझाव दिया गया है। इसके साथ ही लगातार दो से तीन साल तक खाली रहने वाली सीटों को बंद करने पर विचार करने और इन पाठ्यक्रमों की फीस कम करने की सिफारिश भी की गई है।

NEET PG काउंसलिंग में देरी रोकने के लिए क्या बदला?

मेडिकल काउंसलिंग समिति (MCC) ने विशेषज्ञ पैनल को बताया कि 2026-27 की काउंसलिंग प्रक्रिया में कई बदलाव किए गए हैं। इनका उद्देश्य दाखिले में होने वाली देरी और उम्मीदवारों की परेशानियों को कम करना है।

फ्रीज और फ्लोट विकल्प की नई व्यवस्था

नई व्यवस्था में उम्मीदवारों को सीट के चयन के आधार पर दो विकल्प दिए गए हैं।

  • फ्रीज: इस विकल्प में उम्मीदवार अपनी आवंटित सीट को बरकरार रखता है।

  • फ्लोट: इसमें उम्मीदवार आवंटित सीट स्वीकार करने के साथ बेहतर सीट मिलने पर अपग्रेड का विकल्प चुन सकता है।

फ्लोट विकल्प चुनने वाले उम्मीदवार ऑनलाइन ही अपनी सीट स्वीकार कर सकते हैं और अपग्रेड के लिए आवेदन भी कर सकते हैं। इसके लिए संबंधित संस्थान में व्यक्तिगत रूप से जाने की जरूरत नहीं होगी।

दाखिले की दूसरी प्रक्रियाएं भी ऑनलाइन

सीट अपग्रेड होने के बाद पुरानी आवंटित सीट से उम्मीदवार को मुक्त करने की प्रक्रिया भी ऑनलाइन कर दी गई है। इसके अलावा नई व्यवस्था में कई प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाया गया है।

  • उम्मीदवार को फीस केवल एक बार जमा करनी होगी।

  • फीस उसी संस्थान में जमा होगी, जहां वह अंतिम रूप से दाखिला लेगा।

  • जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड किए जा सकेंगे।

  • संस्थानों के नोडल अधिकारी ऑनलाइन दस्तावेजों का सत्यापन करेंगे।

मेडिकल कॉलेजों की सीटों के आंकड़ों में कैसे हुआ सुधार?

मेडिकल कॉलेजों की सीटों से जुड़ी जानकारी को बेहतर बनाने के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) को MCC के काउंसलिंग पोर्टल से जोड़ दिया गया है।

पहले मेडिकल कॉलेज अपनी सीटों का विवरण सीधे एमसीसी को भेजते थे। इसके बाद एमसीसी को इन आंकड़ों का एनएमसी के रिकॉर्ड से मैन्युअल मिलान करना पड़ता था।

नई व्यवस्था में एनएमसी को सीधे काउंसलिंग पोर्टल से जोड़ने के कारण सीटों की जानकारी साझा करना और उसका सत्यापन करना आसान हुआ है। समिति के मुताबिक, इससे सीटों के विवरण में दोहराव की समस्या खत्म हुई है और काउंसलिंग का कार्यक्रम व्यवस्थित करने में भी मदद मिली है।

भविष्य की काउंसलिंग व्यवस्था के लिए 5 अहम सुझाव

विशेषज्ञ समिति ने आने वाले वर्षों में काउंसलिंग प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए पांच सिफारिशें की हैं।

  1. NMC, NBEMS और NTA काउंसलिंग शुरू होने से पहले सत्यापित सीटों का विवरण उपलब्ध कराएं।

  2. MCC हर शैक्षणिक वर्ष और पाठ्यक्रम के लिए निश्चित काउंसलिंग कार्यक्रम तैयार करे और उसे सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के लिए पेश करे।

  3. काउंसलिंग के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं बनाई जाएं और हर साल उन्हें अपडेट किया जाए।

  4. काउंसलिंग से पहले और बाद में संबंधित पक्षों के साथ नियमित बैठकें हों, ताकि समस्याओं की पहचान की जा सके।

  5. NEET के परिणाम सीधे राज्य की काउंसलिंग अथॉरिटी तक पहुंचाने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था विकसित की जाए।

समिति की रिपोर्ट पर याचिकाकर्ता के वकील ने उठाए सवाल

सुप्रीम कोर्ट में विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पेश होने के बाद याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश हुए वकील सत्यम सिंह राजपूत ने रैंक आधारित व्यवस्था के प्रस्ताव पर सवाल उठाए।

उन्होंने दलील दी कि पात्रता कटऑफ अंकों में भारी कमी के फैसले को सही ठहराने के बजाय समिति ने अब अंक निर्धारित करने की पूरी व्यवस्था में बदलाव का सुझाव दे दिया है।

राजपूत ने कहा, "अब विडंबना यह है कि वे पर्सेंटाइल से रैंक आधारित व्यवस्था की ओर जा रहे हैं। इसमें अंतर क्या है?"

वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है। इसके बाद अदालत ने मामले की सुनवाई स्थगित कर दी।