हाइलाइट्स
• नवी पिल्लै को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार देने पर विवाद
• नेतन्याहू ने नोबेल समिति के फैसले की कड़ी आलोचना की
• इजरायल ने पिल्लै पर पक्षपातपूर्ण रुख अपनाने का आरोप लगाया
• अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय पर नए प्रतिबंध लगाए
• करीम खान से जुड़े आरोपों का भी नेतन्याहू ने किया उल्लेख
Navi Pillay Nobel Peace Prize: नवी पिल्लै को वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने के बाद इजरायल में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस फैसले की आलोचना करते हुए नोबेल समिति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिल्लै ने इजरायल के खिलाफ पक्षपातपूर्ण आरोपों को बढ़ावा दिया और उनके काम ने देश की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचाया। दूसरी ओर, नोबेल समिति ने पिल्लै को शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को आगे बढ़ाने के प्रयासों के लिए सम्मानित किया है।
नेतन्याहू ने नोबेल समिति पर साधा निशाना
इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से सोशल मीडिया मंच X पर जारी बयान में नेतन्याहू ने कहा कि नोबेल समिति ने अपना नैतिक विवेक खो दिया है। उन्होंने पिल्लै पर इजरायल के खिलाफ झूठे और भ्रामक आरोप फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि समिति ने ऐसे व्यक्ति को सम्मानित किया है, जिसका रुख इजरायल के प्रति पक्षपातपूर्ण रहा है।
नेतन्याहू ने अपने बयान में अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) के मुख्य अभियोजक करीम खान का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिल्लै के निष्कर्षों और आरोपों ने इजरायल के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी कार्रवाई का आधार तैयार करने में भूमिका निभाई।
नेतन्याहू ने करीम खान पर लगे यौन दुर्व्यवहार के आरोपों का भी जिक्र किया और दावा किया कि इजरायल के खिलाफ कार्रवाई के संदर्भ में इन आरोपों का राजनीतिक इस्तेमाल किया गया।
गाजा पर रिपोर्ट को लेकर इजरायल की नाराजगी
नवी पिल्लै दक्षिण अफ्रीका की वरिष्ठ विधिवेत्ता हैं। वह संयुक्त राष्ट्र की पूर्व मानवाधिकार उच्चायुक्त रह चुकी हैं और अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्थाओं में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा चुकी हैं।
वर्ष 2021 से 2025 तक उन्होंने फिलिस्तीनी क्षेत्रों और इजरायल से संबंधित संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र जांच आयोग की अध्यक्षता की थी। आयोग ने गाजा में इजरायल की कार्रवाई को नरसंहार करार दिया था। इजरायल इन आरोपों को खारिज करता रहा है। पिल्लै की इसी भूमिका और इजरायल के खिलाफ आयोग के निष्कर्षों को लेकर इजरायली नेतृत्व ने लगातार आपत्ति जताई है।
नोबेल समिति ने किस आधार पर दिया पुरस्कार?
नोबेल समिति ने 9 अक्टूबर 2026 को नवी पिल्लै को नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा की। समिति के अनुसार, उन्हें शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया है।
समिति ने अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था को मजबूत करने और युद्ध अपराधों, मानवता के खिलाफ अपराधों तथा नरसंहार के मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में उनके योगदान को रेखांकित किया। पिल्लै ने अपने लंबे कानूनी करियर में रंगभेद के खिलाफ संघर्ष, मानवाधिकारों की रक्षा और अंतरराष्ट्रीय न्याय से जुड़े मामलों में काम किया है।
अमेरिका ने भी ICC के खिलाफ की कार्रवाई
नवी पिल्लै को पुरस्कार दिए जाने के बाद अमेरिका ने भी अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के खिलाफ नए प्रतिबंधों की घोषणा की। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अदालत को अमेरिकी संप्रभुता के लिए खतरा बताया और कहा कि प्रतिबंधों का उद्देश्य अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ अदालत की कार्रवाई को रोकना है।
हालांकि, अमेरिका की ओर से ICC के खिलाफ प्रतिबंधों की घोषणा और नवी पिल्लै के पुरस्कार पर औपचारिक आपत्ति दो अलग-अलग बातें हैं।
नवी पिल्लै को मिला नोबेल शांति पुरस्कार अब अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था, गाजा में इजरायल की सैन्य कार्रवाई और ICC की भूमिका को लेकर जारी विवाद के केंद्र में आ गया है। जहां नोबेल समिति उनके योगदान को अंतरराष्ट्रीय कानून और जवाबदेही को मजबूत करने से जोड़ रही है, वहीं इजरायल का नेतृत्व उनके काम को पक्षपातपूर्ण बताते हुए फैसले की आलोचना कर रहा है।