Nana Patekar Famous Dialogue: नाना पाटेकर सिर्फ अपनी शानदार अदाकारी के लिए ही नहीं, बल्कि संवाद बोलने के खास अंदाज के लिए भी जाने जाते हैं। उनकी आवाज, चेहरे के भाव और संवाद अदायगी ने कई साधारण पंक्तियों को ऐसा असर दिया कि वे लंबे समय तक दर्शकों की याद में बनी रहीं। ‘क्रांतिवीर’ से लेकर ‘वेलकम’ तक उनके कई संवाद अपने-अपने किरदारों की पहचान बन गए।
नाना पाटेकर ने कभी गुस्से और आक्रामक अंदाज से तालियां बटोरीं, तो कभी गंभीर बात को ऐसे अंदाज में पेश किया कि वह यादगार बन गई। उनके ऐसे ही 5 संवादों पर नजर डालते हैं, जिनका जिक्र आज भी उनके अभिनय के साथ किया जाता है।
क्रांतिवीर का ‘आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने?’
फिल्म ‘क्रांतिवीर’ का संवाद ‘आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने?’ नाना पाटेकर के सबसे पहचाने जाने वाले संवादों में शामिल है। एक सीन में बोले गए इस संवाद में गुस्से के साथ चुनौती और व्यवस्था के खिलाफ विद्रोह का भाव नजर आता है।
नाना की आवाज और चेहरे के भावों ने इस लाइन को सिर्फ फिल्म का संवाद नहीं रहने दिया। यही वजह है कि आज भी यह संवाद नाना पाटेकर के नाम के साथ तुरंत याद किया जाता है।
‘ये मुसलमान का खून, ये हिंदू का खून...’ ने उठाया सवाल
‘क्रांतिवीर’ का ही एक और संवाद है- ‘ये मुसलमान का खून, ये हिंदू का खून... बता इसमें मुसलमान का कौन सा, हिंदू का कौन सा?’
इस संवाद के जरिए नाना के किरदार ने धर्म के नाम पर होने वाली हिंसा पर सवाल खड़ा किया। संवाद का सवाल सीधा था, लेकिन उसका असर गहरा रहा। यही इसकी सबसे बड़ी खासियत थी और यह दृश्य ‘क्रांतिवीर’ के प्रभावशाली हिस्सों में शामिल रहा।
‘भगवान का दिया हुआ सब कुछ है...’ और उदय शेट्टी
फिल्म ‘वेलकम’ में नाना पाटेकर ने उदय शेट्टी का किरदार निभाया था। उनका संवाद ‘भगवान का दिया हुआ सब कुछ है... दौलत है, शोहरत है, इज्जत है...’ उनके अलग अंदाज को दिखाता है।
नाना ने अपनी इंटेंस एक्टिंग को कॉमेडी के साथ इस तरह जोड़ा कि संवाद और परिस्थिति का विरोधाभास ही हास्य का हिस्सा बन गया। उदय शेट्टी के संवाद आज भी सोशल मीडिया और मीम कल्चर में इस्तेमाल होते हैं।
‘एक मच्छर साला आदमी को हिजड़ा बना देता है’
फिल्म ‘यशवंत’ का यह संवाद नाना पाटेकर की आक्रामक संवाद अदायगी का उदाहरण है। संवाद के तीखे शब्दों के बावजूद उसकी प्रस्तुति ने इसे चर्चित बनाया।
यह उन संवादों में शामिल है, जिनका जिक्र नाना पाटेकर के अभिनय और डायलॉग डिलीवरी के साथ आज भी किया जाता है।
‘धंधे में कोई किसी का भाई नहीं होता’ ने दिखाया अपराध की दुनिया का चेहरा
‘परिंदा’ में नाना पाटेकर ने अन्ना का किरदार निभाया था। फिल्म का संवाद ‘धंधे में कोई किसी का भाई नहीं होता’ अपराध की दुनिया के उसूल को सीधे शब्दों में सामने रखता है।
इस किरदार के जरिए रिश्तों से ज्यादा स्वार्थ और धंधे को महत्व देने वाली सोच दिखाई गई। अन्ना का किरदार नाना पाटेकर की प्रभावशाली नकारात्मक भूमिकाओं में शामिल रहा।
नाना पाटेकर की संवाद अदायगी की खासियत यही रही कि उनके बोले हुए शब्द सिर्फ कहानी का हिस्सा नहीं लगे, बल्कि उनके किरदारों की पहचान बन गए। ‘क्रांतिवीर’, ‘वेलकम’, ‘यशवंत’ और ‘परिंदा’ के ये संवाद आज भी उनके अभिनय और खास अंदाज की याद दिलाते हैं।