Messi Retirement: लियोनेल मेसी ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से दूसरी बार संन्यास का ऐलान कर दिया है। करीब एक दशक के अंतराल में अर्जेंटीना की जर्सी छोड़ने का उनका फैसला दो बार आया, लेकिन दोनों मौकों की परिस्थितियां बिल्कुल अलग रहीं। 2016 में लगातार फाइनल हार के बाद मेसी बेहद निराश थे, जबकि 2026 में विश्व कप और कोपा अमेरिका समेत बड़े खिताब जीतने के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय करियर को अलविदा कहा।
2016 में लगातार हार के बाद टूट गए थे मेसी
साल 2016 में कोपा अमेरिका के फाइनल में अर्जेंटीना का सामना चिली से हुआ। न्यू जर्सी के मेटलाइफ स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में पेनल्टी शूटआउट में मेसी का प्रयास लक्ष्य से चूक गया और चिली ने खिताब जीत लिया।
यह अर्जेंटीना के लिए लगातार तीसरा बड़ा फाइनल था, जिसमें उसे हार मिली थी। मुकाबले के बाद सिर्फ 29 साल की उम्र में मेसी ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास का ऐलान कर दिया।
उन्होंने कहा था, 'राष्ट्रीय टीम मेरे लिए खत्म हो गई है। यह चार फाइनल हो चुके हैं और मैं जीत नहीं सका। मैंने अपनी पूरी कोशिश की। यह किसी से ज्यादा मुझे दुख देता है, लेकिन साफ है कि यह मेरे लिए नहीं है।'
रोनाल्डो ने समझा मेसी का दर्द
मेसी के संन्यास के फैसले पर क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने भी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने मेसी के फैसले को मुश्किल बताया और लोगों से उसे समझने की बात कही।
रोनाल्डो ने मेसी की पेनल्टी मिस होने का बचाव करते हुए कहा था, 'वह हार और निराशा के आदी नहीं हैं, यहां तक कि दूसरे स्थान पर रहना भी उनके लिए आसान नहीं है। पेनल्टी मिस करने से कोई खराब खिलाड़ी नहीं बन जाता।'
मेसी को रोते हुए देखकर रोनाल्डो ने दुख जताया और अर्जेंटीना के लिए उनकी वापसी की उम्मीद भी जाहिर की थी। उन्होंने कहा था, 'मेसी को रोते हुए देखना दुख देता है और मुझे उम्मीद है कि वह अपने देश के लिए वापस लौटेंगे, क्योंकि अर्जेंटीना को उनकी जरूरत है।'
वापसी के बाद बदली मेसी की पूरी कहानी
मेसी उसी साल के अंत में अर्जेंटीना की टीम में वापस लौट आए। इसके बाद उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की कहानी ने अलग मोड़ लिया।
2021 में अर्जेंटीना ने मेसी के साथ कोपा अमेरिका का खिताब जीता। ब्राजील के खिलाफ माराकाना स्टेडियम में मिली जीत के बाद मेसी के करियर का एक बड़ा दर्द खत्म हुआ।
इसके बाद 2022 में कतर विश्व कप में मेसी ने अर्जेंटीना को खिताब दिलाया। लुसैल स्टेडियम में फ्रांस के खिलाफ फाइनल पेनल्टी शूटआउट तक गया, जिसमें अर्जेंटीना ने जीत दर्ज की और मेसी ने विश्व कप ट्रॉफी उठाई।
2024 में अर्जेंटीना ने फिर कोपा अमेरिका का खिताब जीता। इस तरह 2016 में जिस खिलाड़ी के लिए अर्जेंटीना की जर्सी हार और निराशा से जुड़ गई थी, उसी जर्सी में मेसी ने विश्व कप और कोपा अमेरिका समेत बड़े खिताब हासिल किए।
2026 में दूसरी विदाई, इस बार कहानी अलग थी
करीब 10 साल बाद मेसी ने फिर अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल को अलविदा कह दिया। 2026 विश्व कप के फाइनल में अर्जेंटीना को स्पेन के खिलाफ अतिरिक्त समय तक चले मुकाबले में हार मिली। यह अर्जेंटीना के लिए मेसी का आखिरी मैच साबित हुआ।
इस बार हालात 2016 से बिल्कुल अलग थे। पहली विदाई के समय मेसी के सामने अधूरापन और लगातार फाइनल हारने का दर्द था। दूसरी बार वह विश्व कप और कोपा अमेरिका समेत बड़े गौरव हासिल करने के बाद अर्जेंटीना की जर्सी से विदा हुए।
इस बीच उनके पिता और लंबे समय तक सलाहकार रहे जॉर्ज मेसी के निधन ने इस विदाई को और भावुक बना दिया। इसके बाद मेसी ने अर्जेंटीना की जर्सी से अपना रिश्ता खत्म करने का फैसला किया।
अपने अंतिम संदेश में उन्होंने लिखा, 'यह ऐसा फैसला है जो मेरी आत्मा को दुख देता है, लेकिन मैं जानता हूं कि अब समय आ गया है।'
उन्होंने आगे कहा, 'मैं कसम खाता हूं कि मैंने हमेशा अपना सब कुछ दिया। सिर्फ उन पिछले वर्षों में नहीं, जब हमने सब कुछ जीता, बल्कि उससे पहले भी। मैंने खुद को पूरी तरह दे दिया है; अब मेरे पास देने के लिए कुछ नहीं बचा।'
और फिर मेसी ने कहा, 'ऊपर वाले का शुक्र है कि उन्होंने मुझे अर्जेंटीनी बनाया।'
दो संन्यास, दो अलग कहानियां
2016 में मेसी ने उस समय संन्यास लिया था, जब उन्हें लगा कि वह अर्जेंटीना को वह नहीं दे पाए जिसकी उम्मीद थी। लगातार असफलताओं के बीच उन्होंने खुद को भी उस स्थिति का हिस्सा माना।
2026 में उनका फैसला अलग था। इस बार उनके पास अपने देश के लिए विश्व कप और कोपा अमेरिका समेत बड़े खिताब जीतने की उपलब्धियां थीं। पहली विदाई में हार का दर्द था, जबकि दूसरी में एक लंबे सफर को पूरा करने का भाव।
2016 में रोनाल्डो ने मेसी से लौटने की उम्मीद जताई थी। इसके बाद मेसी वापस आए और आने वाले वर्षों में अर्जेंटीना के साथ कोपा अमेरिका और विश्व कप जीते।
यही मेसी की अंतरराष्ट्रीय कहानी का सबसे बड़ा अंतर है—एक विदाई में अधूरापन था, तो दूसरी में अपने देश के लिए सब कुछ देने का संतोष।