हाइलाइट्स
• कुकुरमुत्ता और मशरूम में क्या है अंतर?
• जंगल से बाजार तक कैसे पहुंचा मशरूम?
• सफेद मशरूम इतना पॉपुलर क्यों है?
भारत में मशरूम आज बाजार से लेकर घरों और रेस्तरां तक आसानी से नजर आता है। इसकी मदद से मटर मशरूम, मशरूम मसाला, टिक्का, सूप और मंचूरियन जैसी कई डिश तैयार की जाती हैं। लेकिन एक समय ऐसा भी था, जब बारिश के मौसम में खेतों और जंगलों में उगने वाले कुकुरमुत्ते को जंगली चीज समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता था।
समय के साथ मशरूम की खेती का तरीका बदला और इसकी अलग-अलग किस्मों को बड़े पैमाने पर उगाया जाने लगा। आज इसे बाजारों में पैक करके सब्जी के रूप में बेचा जाता है। इसके स्वाद, बनावट और कई तरह के व्यंजनों में इस्तेमाल होने की वजह से यह लोगों के खानपान का हिस्सा बन गया है।
कुकुरमुत्ता और मशरूम में क्या अंतर है?
कुकुरमुत्ता और मशरूम के नाम को लेकर अक्सर भ्रम होता है। हिंदी में फफूंद की कुछ प्रजातियों को कुकुरमुत्ता कहा जाता है, जबकि अंग्रेजी में मशरूम शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, खेत या जंगल में अपने आप उगने वाले हर कुकुरमुत्ते को खाने योग्य नहीं माना जा सकता।
कुछ कुकुरमुत्ते जहरीले भी हो सकते हैं। इसलिए किसी अनजान कुकुरमुत्ते को सिर्फ देखकर खाने लायक समझना खतरनाक हो सकता है।
खाने के लिए इस्तेमाल होने वाले मशरूम की खेती खास तरीके से की जाती है। इसमें उसकी किस्म, गुणवत्ता और उत्पादन की प्रक्रिया पर ध्यान दिया जाता है, ताकि उसे सब्जी और दूसरे व्यंजन बनाने में इस्तेमाल किया जा सके।
मशरूम की खेती कैसे बढ़ी?
मशरूम का इस्तेमाल किसी एक देश या आधुनिक खानपान तक सीमित नहीं है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में लोग लंबे समय से मशरूम इकट्ठा करके खाते आए हैं। समय के साथ इसकी खेती की तकनीकों में विकास हुआ और इसका उत्पादन बड़े स्तर पर होने लगा।
सफेद मशरूम की व्यावसायिक खेती का इतिहास यूरोप, खासकर फ्रांस से जुड़ा है। भारत में भी मशरूम की खेती का दायरा बढ़ा है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की ओर से किए गए कई शोध में मशरूम उत्पादन के विस्तार और इसकी विभिन्न किस्मों की खेती का उल्लेख किया गया है। आज देश में सफेद बटन मशरूम के अलावा ऑयस्टर, मिल्की और पैडी स्ट्रॉ मशरूम की भी खेती की जाती है।
सफेद मशरूम क्यों है लोकप्रिय?
भारत में आम तौर पर सफेद मशरूम ज्यादा देखने को मिलता है। इसकी पहचान करना आसान है और इसका आकार भी इसे लोकप्रिय बनाने वाले कारणों में शामिल है। इसके अलावा, इसे कई तरह के व्यंजनों में आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है।
भारत में मशरूम की लोकप्रियता के पीछे क्या वजहें हैं?
1. स्वाद और बनावट दूसरी सब्जियों से अलग
मशरूम का स्वाद और बनावट आम सब्जियों से अलग होती है। पकने के बाद यह नरम हो जाता है। मसालों, क्रीम, टमाटर, लहसुन और अलग-अलग सॉस के साथ इसका स्वाद अच्छी तरह मेल खाता है।
इसी वजह से मशरूम का इस्तेमाल भारतीय ग्रेवी वाली सब्जियों के साथ-साथ चाइनीज और कॉन्टिनेंटल व्यंजनों में भी किया जाता है।
2. शाकाहारी खाने में कई विकल्प
मशरूम से कई तरह के व्यंजन तैयार किए जा सकते हैं। मटर मशरूम, मशरूम मसाला, मशरूम टिक्का और सूप इसके कुछ उदाहरण हैं। अलग-अलग स्वाद में पकाए जा सकने के कारण यह शाकाहारी भोजन में भी इस्तेमाल होने लगा है।
3. होटल और रेस्तरां के मेन्यू में बढ़ा इस्तेमाल
पिज्जा, पास्ता, सूप, सैंडविच, बर्गर और कई तरह के स्टार्टर में मशरूम का इस्तेमाल किया जाता है। होटल और रेस्तरां में इन व्यंजनों की उपलब्धता ने भी इसे ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में भूमिका निभाई है।
खेतों में उगने वाली चीज से बाजार की सब्जी तक
कुकुरमुत्ते से मशरूम तक का सफर इसकी पहचान और इस्तेमाल में आए बदलाव को दिखाता है। खेती की तकनीकों के विकास और अलग-अलग व्यंजनों में इसके इस्तेमाल ने मशरूम को भारतीय बाजारों और खानपान में जगह दिलाई है। हालांकि, जंगली कुकुरमुत्ते और खेती से तैयार खाने योग्य मशरूम के बीच अंतर समझना जरूरी है।