नवंबर में बर्फीले पहाड़ों के बीच ट्रेकिंग का प्लान? ये 5 रास्ते बनाएं सफर यादगार

नवंबर में बर्फीले पहाड़ों के बीच ट्रेकिंग का प्लान? ये 5 रास्ते बनाएं सफर यादगार
हाइलाइट्स
• नवंबर में घूमने के लिए 5 शानदार ट्रेक
• बर्फीले पहाड़, झीलें और खूबसूरत वादियां
• वीकेंड के लिए नाग टिब्बा भी है विकल्प

नवंबर का महीना पहाड़ों की सैर और ट्रेकिंग का अनुभव लेने के लिए खास हो सकता है। मानसून के बाद आसमान साफ होने लगता है और ठंडी हवाओं के बीच हिमालय की चोटियों के नजारे देखने का मौका मिलता है। इस दौरान मौसम अनुकूल रहा, तो कुछ जगहों पर हल्की बर्फबारी का अनुभव भी हो सकता है।

अगर आप पहाड़ों के बीच चाय की चुस्कियों और गरमागरम मैगी का आनंद लेना चाहते हैं, तो नवंबर में इन पांच ट्रेक पर जाने का प्लान बना सकते हैं। इनमें शुरुआती लोगों के लिए छोटे रास्ते भी हैं और लंबी दूरी तय करने वाले ट्रेक भी। आइए, इनकी खासियत और दूरी के बारे में जानते हैं।

1. केदारकांठा ट्रेक: पहली बार ट्रेकिंग करने वालों के लिए विकल्प

अगर आप पहली बार हिमालय में ट्रेकिंग करने जा रहे हैं, तो केदारकांठा एक विकल्प हो सकता है। इस रास्ते पर देवदार और ओक के जंगलों के बीच से गुजरते हुए जुडा का तालाब तक पहुंचा जाता है। आगे बढ़ने पर ऊंची चोटियों के खूबसूरत नजारे देखने को मिलते हैं।

केदारकांठा की चोटी से स्वर्गारोहिणी और बंदरपूंछ जैसी चोटियां दिखाई देती हैं। नवंबर में यहां मौसम शांत रह सकता है, जबकि महीने के आगे बढ़ने के साथ तापमान में गिरावट और हल्की बर्फबारी की संभावना रहती है।

इस ट्रेक से जुड़ी जरूरी जानकारी:

  • चोटी की ऊंचाई: लगभग 12,500 फीट

  • कुल दूरी: करीब 20 किलोमीटर

  • अवधि: छह दिन और पांच रातें

  • यात्रा में देहरादून से सफर भी शामिल है।

2. ब्रह्मताल ट्रेक: जंगल, झील और पहाड़ों के नजारे

ब्रह्मताल उन लोगों के लिए आकर्षक विकल्प है, जिन्हें ट्रेकिंग के दौरान प्राकृतिक नजारे और शांत माहौल पसंद है। यहां का रास्ता जंगलों और अल्पाइन झीलों के बीच से गुजरता है। साफ मौसम में त्रिशूल और नंदा घुंटी की चोटियां भी दिखाई देती हैं।

ओक और रोडोडेंड्रोन के जंगलों से होकर गुजरने वाला यह रास्ता फोटोग्राफी पसंद करने वालों को भी आकर्षित करता है। हल्की धूप में जंगलों का नजारा सफर को और खूबसूरत बना सकता है।

ब्रह्मताल ट्रेक की प्रमुख बातें:

  • अधिकतम ऊंचाई: लगभग 12,250 फीट

  • कुल दूरी: करीब 21 किलोमीटर

  • अवधि: लगभग चार दिन

  • कठिनाई स्तर: आसान से मध्यम

3. हर की दून: घाटी और पारंपरिक गांवों का अनुभव

अगर आपको ऊंची चोटी पर चढ़ने के बजाय घाटियों, जंगलों और गांवों के बीच घूमना पसंद है, तो हर की दून ट्रेक पर विचार कर सकते हैं। इसे अक्सर 'देवताओं की घाटी' कहा जाता है। यहां ऊंचे पहाड़ों और जंगलों के साथ पारंपरिक गांवों का नजारा भी देखने को मिलता है।

इस सफर के दौरान ओसला जैसे गांवों से गुजरने का मौका मिलता है। यहां की पारंपरिक लकड़ी की वास्तुकला गढ़वाल हिमालय के स्थानीय जीवन की झलक दिखाती है। इस वजह से हर की दून का अनुभव केवल ट्रेकिंग तक सीमित नहीं रहता, बल्कि गांवों और उनकी संस्कृति को करीब से देखने का अवसर भी देता है।

इस ट्रेक की दूरी लगभग 38 किलोमीटर है और यह करीब 11,600 फीट की ऊंचाई तक पहुंचता है।

4. संदकफू ट्रेक: एक जगह से दिखती हैं चार ऊंची चोटियां

हिमालय की खूबसूरती देखने के लिए उत्तराखंड या हिमाचल प्रदेश तक ही सीमित रहने की जरूरत नहीं है। पश्चिम बंगाल और नेपाल की सीमा पर सिंगालीला रिज में स्थित संदकफू भी एक खास ट्रेकिंग विकल्प है।

साफ मौसम में यहां से दुनिया की पांच सबसे ऊंची चोटियों में से चार—एवरेस्ट, कंचनजंगा, ल्होत्से और मकालू—को देखा जा सकता है। इनमें कंचनजंगा का नजारा खास तौर पर आकर्षित करता है। इसकी आकृति को लोकप्रिय रूप से 'स्लीपिंग बुद्ध' कहा जाता है।

संदकफू पश्चिम बंगाल का सबसे ऊंचा पॉइंट भी है। यहां तक पहुंचने वाले ट्रेक की जानकारी इस तरह है:

  • ऊंचाई: लगभग 11,930 फीट

  • कुल दूरी: करीब 60 से 68 किलोमीटर

  • अवधि: चार से सात दिन

5. नाग टिब्बा: वीकेंड पर ट्रेकिंग का प्लान

अगर आपके पास लंबी छुट्टी नहीं है और आप वीकेंड पर पहाड़ों में घूमना चाहते हैं, तो नाग टिब्बा एक विकल्प हो सकता है। गढ़वाल हिमालय का यह लोकप्रिय छोटा ट्रेक शुरुआती लोगों के लिए अनुकूल माना जाता है।

यह रास्ता जंगलों से होकर गुजरता है। मौसम साफ रहने पर यहां से बंदरपूंछ और स्वर्गारोहिणी जैसी चोटियों के नजारे देखे जा सकते हैं। ट्रेक का लक्ष्य नाग टिब्बा चोटी है, जो लेसर हिमालय की नाग टिब्बा रेंज की सबसे ऊंची चोटी है।

नाग टिब्बा ट्रेक की मुख्य जानकारी:

  • चोटी की ऊंचाई: लगभग 9,915 फीट

  • कुल दूरी: करीब 14 से 16 किलोमीटर का गोल चक्कर

  • अवधि: आमतौर पर दो दिन और एक रात

कम समय में ट्रेकिंग का अनुभव लेने की योजना बना रहे लोगों के लिए यह रास्ता उपयोगी विकल्प हो सकता है।

नवंबर में कौन-सा ट्रेक चुनें?

इन पांचों ट्रेक का अनुभव एक-दूसरे से अलग है। केदारकांठा पहली बार ट्रेकिंग करने वालों के लिए विकल्प है, जबकि ब्रह्मताल जंगलों और झीलों के नजारों के लिए जाना जाता है। हर की दून में घाटी और पारंपरिक गांवों का अनुभव मिलता है। संदकफू से कई ऊंची हिमालयी चोटियां दिखाई दे सकती हैं, वहीं नाग टिब्बा कम समय में ट्रेकिंग का प्लान बनाने वालों के लिए उपयुक्त विकल्प है।

ट्रेक चुनते समय अपनी उपलब्ध छुट्टियों, तय की जाने वाली दूरी और चढ़ाई की कठिनाई को ध्यान में रखें। नवंबर में पहाड़ों का मौसम बदल सकता है, इसलिए सफर की योजना बनाते समय मौसम की स्थिति पर भी नजर रखना जरूरी है।