भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह 31 अक्टूबर 2026 को अपने पद से सेवानिवृत्त हो रहे हैं। करीब 42 साल तक वायुसेना में सेवाएं देने वाले एपी सिंह का सैन्य सफर कई अहम जिम्मेदारियों और अभियानों से जुड़ा रहा। उनके कार्यकाल में ऑपरेशन सिंदूर, स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस के परीक्षण और वायुसेना की आधुनिक युद्धक तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया गया।
उनके रिटायरमेंट के साथ ही एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित भारतीय वायुसेना के 29वें प्रमुख की जिम्मेदारी संभालेंगे। ऐसे में एपी सिंह के सैन्य करियर, उनकी प्रमुख भूमिकाओं और उपलब्धियों को जानना महत्वपूर्ण है।
कौन हैं एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह?
अमर प्रीत सिंह का जन्म 27 अक्टूबर 1964 को हुआ था। उन्होंने 1984 में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) से प्रशिक्षण पूरा किया और भारतीय वायुसेना की फाइटर पायलट स्ट्रीम में कमीशन प्राप्त किया। दिसंबर 1984 में शुरू हुआ उनका सैन्य करियर करीब 42 वर्षों तक चला।
वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज और नेशनल डिफेंस कॉलेज के पूर्व छात्र हैं। इसके अलावा वह क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट भी हैं। उन्हें लड़ाकू और परिवहन विमानों को उड़ाने का अनुभव है। उनके नाम 5,000 घंटे से अधिक की उड़ान दर्ज है।
अपने करियर में उन्होंने एक ऑपरेशनल फाइटर स्क्वाड्रन और फ्रंटलाइन एयर बेस की कमान संभाली। रूस के मॉस्को में उन्होंने 'मिग-29 अपग्रेड प्रोजेक्ट मैनेजमेंट टीम' का नेतृत्व भी किया।
तेजस लड़ाकू विमान के परीक्षण में निभाई अहम जिम्मेदारी
एपी सिंह के सैन्य करियर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस के विकास और परीक्षण से जुड़ा रहा। वह नेशनल फ्लाइट टेस्ट सेंटर में प्रोजेक्ट डायरेक्टर (फ्लाइट टेस्ट) के पद पर कार्यरत रहे। यहां उन्हें लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस की फ्लाइट टेस्टिंग की जिम्मेदारी दी गई थी।
इसके अलावा उन्होंने साउथ वेस्टर्न एयर कमांड में 'एयर डिफेंस कमांडर' और ईस्टर्न एयर कमांड में 'सीनियर एयर स्टाफ ऑफिसर' के रूप में काम किया। वाइस चीफ ऑफ द एयर स्टाफ बनने से पहले वह सेंट्रल एयर कमांड के 'एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ' भी रहे।
वायुसेना प्रमुख के तौर पर भी उन्होंने स्वदेशी रक्षा उपकरणों और आत्मनिर्भरता की जरूरत पर जोर दिया। तेजस जैसे स्वदेशी लड़ाकू विमानों का विकास भारत की रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजना है।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वायुसेना की भूमिका
अमर प्रीत सिंह के कार्यकाल में ऑपरेशन सिंदूर एक प्रमुख घटनाक्रम रहा। मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की थी। इस अभियान को ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया गया था।
इस कार्रवाई में भारतीय सशस्त्र बलों ने संयुक्त रूप से हिस्सा लिया और वायुसेना ने सटीक हमलों के जरिए आतंकवादी कैंपों को निशाना बनाया।
अक्टूबर 2025 में वायुसेना दिवस के अवसर पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी जानकारियां साझा की थीं। उन्होंने बताया था कि अभियान में भारतीय वायुसेना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल के साथ कार्रवाई की गई।
उन्होंने यह भी कहा था कि भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया और पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों को नुकसान पहुंचाया। उनके मुताबिक, इस अभियान में स्वदेशी तकनीक और हथियार प्रणालियों का प्रभावी इस्तेमाल किया गया।
आधुनिक युद्ध की चुनौतियों के लिए वायुसेना की तैयारी पर जोर
एपी सिंह के कार्यकाल में वायुसेना के सामने पारंपरिक युद्ध के साथ-साथ नई तकनीकों से जुड़ी चुनौतियां भी रहीं। ड्रोन, लंबी दूरी की मिसाइलें, रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती गई।
ऐसे में उन्होंने वायुसेना की युद्धक तैयारियों को मजबूत करने, नई तकनीक अपनाने और आधुनिक हथियार प्रणालियों को शामिल करने पर जोर दिया। बदलते युद्ध के स्वरूप के अनुसार जवानों को प्रशिक्षित करने की जरूरत भी उनके प्रमुख फोकस में रही।
स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना और विदेशी उपकरणों पर निर्भरता कम करना भी उनके कार्यकाल के अहम मुद्दों में शामिल रहा।
5,000 घंटे से ज्यादा उड़ान, आखिरी फ्लाइट भी रही खास
करीब चार दशक से अधिक के सैन्य करियर में अमर प्रीत सिंह ने 5,000 घंटे से ज्यादा उड़ान भरी। रिटायरमेंट से पहले उनकी अंतिम उड़ान 20 अक्टूबर 2026 को हैदराबाद के पास हुई।
उन्होंने HJT-16 किरण MK-1 ट्रेनर विमान में यह उड़ान भरी। इस दौरान उनके साथ उनके पहले फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर विंग कमांडर वीएस कोचर (रिटायर्ड) भी मौजूद थे। करीब 55 मिनट तक चली इस उड़ान के साथ उनके विमान उड़ाने के सफर का एक खास अध्याय समाप्त हुआ।
इस उड़ान को इसलिए भी यादगार माना गया क्योंकि उनके शुरुआती दिनों में विमान उड़ाना सिखाने वाले प्रशिक्षक ही इस आखिरी उड़ान में उनके साथ थे। इससे पहले अक्टूबर 2026 में जोधपुर में आयोजित एक्सरसाइज तरंग शक्ति के दौरान उन्होंने स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान से भी उड़ान भरी थी।
एपी सिंह को मिल चुके हैं ये सैन्य सम्मान
भारतीय वायुसेना में उनके योगदान के लिए अमर प्रीत सिंह को कई सैन्य सम्मान मिले हैं। उन्हें 2019 में अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) और 2023 में परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM) से सम्मानित किया गया था।
ये सम्मान उनकी विशिष्ट सेवाओं और सैन्य नेतृत्व में योगदान के लिए दिए गए।
कौन संभालेंगे भारतीय वायुसेना की कमान?
एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह के रिटायरमेंट के बाद एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित भारतीय वायुसेना के नए प्रमुख होंगे। केंद्र सरकार ने उन्हें वायुसेना का अगला प्रमुख नियुक्त किया है। वह 31 अक्टूबर 2026 से 29वें वायुसेना प्रमुख के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे।
आशुतोष दीक्षित फिलहाल वायुसेना के उप प्रमुख के पद पर कार्यरत हैं। वह एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट और क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर हैं। उनके पास 3,500 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है। उन्होंने मिराज-2000, मिग विमानों, जगुआर, तेजस और अन्य विमानों को उड़ाया है।
उनके सैन्य करियर में ऑपरेशन सफेद सागर और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों से जुड़ा अनुभव भी शामिल है। वह सेंट्रल एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ और चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी काम कर चुके हैं।